बुधवार, 5 मई 2010

लिव इन रिलेशनशिप ' शादी से पहले रिश्ते कितने जायज

भारत में लिव इन रिलेशनशिप ' को मान्यता मिलने की बाटे हो रही है . कुछ परसेंट लोग एसे रिश्तो से सहमती जता रहे है . लेकिन भारत के सभ्य लोग जो आज भी अपने देश की संस्कृति से जुड़े है वह इसे गलत मानते है . टीवी प़र बहस छेड़ी जा रही है  बोलीवूड की हीरोइनों को मीडिया इस प़र अपनी राय परकत करने के लिये स्टूडियो में ला रहा है . लेकिन यह मुद्दा मात्र बोलीवूड से जुड़ा नही है यह पूरे देश की सभ्यता संस्कृति से जुड़ा एक सवाल है . यह सभ्यता और असभ्यता की लड़ाई है . भले ही कुछ परसेंट लोग इसे जायज माने लेकिन भारत की जनता क्या चाहती है यह भी तो दिखाया  जाना चाहिए .इस प़र भी कोई सर्वे होना चाहिए . इस  तरह के रिश्तो को अगर कानूनी मान्यता मिलने लगी तो शादी ब्याह जसे पवित्र रिश्ते के क्या माईने रहेंगे . पश्चिमी संस्कृति से पश्चिम के लोग भी अब उब चुके है और पश्चिम में लोग शान्ति की तलाश में भटक रहे है तो क्या इस तरह की बाते भारत के लोगो में कैसा सन्देश देंगी . क्या प्रभाव  पडेगा भारत प़र इसका भारत को भारतीय सभ्यता से जाना जाता है लेकिन भारत में बढ़ रहा पश्चिमी प्रभाव भारत को असभ्यता की और ले जाएगा . जिसमे न तो रिश्तो की कोई अहमियत होगी और न ही कोई जरुरत . क्या यह वंश परम्परा खत्म होने की तरफ पहला कदम तो नही है

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