रविवार, 20 दिसंबर 2009

भारत तो जाती पाती में ही उलझकर रह जाएगा


वर्तमान में भारत  के नागरिको में देशभक्ति का आभाव होता जा रहा है . किसी भी शेत्र को लेलिजिये कोई भी राज्य या कोई भी शहर गंभीर मुद्दों या फिर किसी भी प्रकार का राष्ट्रिय मुद्दा हो आप मुश्किल से ५० आदमी नही जुटा सकते . लेकिन आप किसी फिल्म स्टार को बुला लीजिये लाखो लोग एक्त्त्रित हो जायेंगे मात्र एक झलक पाने को . आजकल भारतीय केवल एन्जॉय कर रहे है लाइफ को किसी का भी राष्ट्र की तरफ ध्यान नही है और खासकर युवा तो मोजमस्ती में इतने डूब गये है की १०० में से १ युवा ही होता होगा जो देश की रक्षा के लिए आर्मी ज्वाइन करना चाहता हो . आजका युवा  एसी जॉब करना चाहता है जिसमे पैसा और पर्सनैलिटी हो . देशसेवा का जज्बा युवाओं में दिन पर्तिदिन घटता जा रहा है .
                                                                            और आजकल उन लोगो की जनसँख्या में भी काफी बढ़ोतरी हो रही है जो लोग जाती के नाम पर लाखो एकत्रित हो जाते है एकता में कोई बुराई नही लेकिन . हर इन्सान अपनी जाती का सम्मलेन करेगा तो भारत तो जाती पाती में ही उलझकर रह जाएगा . अब किसी जातीय सम्मलेन में एसा क्या ज्ञान होता है की उसमे वही जाती हिस्सा ले जिसने वह प्रोग्राम किया है . अगर कोई ज्ञान की बात है तो वह सभी में बाटी जा सकती है . जातीय समूहों में देश को बाटने से देश को नुकसान ही हो रहा है . युवाओं का तो जोर एसे सम्मलनों में बढ़ चढ़कर होता है . हम भारतीय एसे जातीय सम्मलेन कर के क्या साबित करना चाहते है .किसके आगे ख़ुद को ऊँचा साबित करना चाहते है या अपने ही लोगो को नीचा ?  इससे तो बेहतर युवाओं में नई पीढ़ी में देशभक्ति का संचार करना चाहिए और इसमें सभी का दुसरे शेत्रो को भी निमंत्र्ण देना चाहिए . ताकि भारत के लोग एक दुसरे को जान सके .

4 टिप्‍पणियां:

  1. जाति के आधार पर सम्‍मेलन में कोई बुराई नहीं .. पर वहां भी राष्‍ट्रीय मुद्दा ही उठाया जाना चाहिए .. कम से कम इसी एकता का तो हम सकारात्‍मक उपयोग कर सकते हैं !!

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  2. sangeeta jee @ ase sammelno me mudde hote hai lekin kya arkshan hame do itna % hame vidhansabha ki site do jatiy sammelan insan ko insan se katne ka kam karte hain

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  3. आरक्षण राष्‍ट्रीय मुद्दा नहीं है .. उससे राष्‍ट्र का क्‍या जाति का भी कल्‍याण नहीं हो सकता है .. उस जाति के ऊपरी स्‍तर के लोगों को इससे फायदा हो पाता है .. यदि कोई जाति एकत्रित होती हैं .. तो अपने पेशे के आधुनिकीकरण की मांग करें .. यह पूरी जाति क्‍या पूरे राष्‍ट्र के लिए बेहतर बेहतर है !!

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  4. बढ़िया विचारणीय पोस्ट लिखी है।

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