रविवार, 30 मई 2010

धर्म क्या है ?

कई बार सोचता हूँ धर्म है क्या इस्लाम ,हिन्दू ,क्र्श्चियन. सभी कहते है मेरा धर्म बेहतर है शान्ति का है . फिर आपस में लड़ते क्यों है अगर सभी का धर्म शान्ति का है तो ? जब सभी शान्ति धर्म है तो क्यों लड़ते है आपस में . एक एक धर्म को समझने की कोशिश करता हूँ बार बार करता हूँ . कोई कहता है मेरा धर्म ले लो कोई कहता है मेरा ले लो . लगता है धर्म को बेच रहे है खरीद रहे है . तब जाता हूँ भारतीय धर्म की और जो न हिन्दू धर्म है और न ही इस्लाम और न ही करिश्चियन . देखता हूँ एक अजीब सी आजादी है शान्ति है कोई भी किसी को भी  मान रहा है,पूज रहा है  . पत्थर  में भी भगवान ,धरती में भी माँ , पेड़ पोधो में भी ,पशुओ में भी , पक्षियों में भी , . हर जगह इश्वर का रूप दिखता है जिन्होंने मंदिर,गुरुद्वारों , में भगवान देखा . मस्जिद ,गिरजा घरो हर जगह एक इश्वर देखा .जल से लेकर थल से लेकर गगन सभी जगह एक इश्वर को देखा . दुसरो के दुःख में इश्वर को देखा सुख में इश्वर को देखा . कोन सा धर्म था वह ? वह धर्म किसी एक का नही किसी कोम का नही वह सम्पूर्ण सृष्टि के भले में सनातम धर्म था और है . जिसमे कोई बंधिश नही , कोई जबरदस्ती नही . जिसमे योगीजन ,देवी -देवता ,पहाडो ,नदियों , पत्तो ,पड़ो , सभी को पूजा जाता है . किसी की हत्या नही की जाती कोई अधर्म नही होता . यही तो है सच्चा धर्म जिसमे प्यासे को पानी ,भूखे को अन्न मिलता है . क्रूर राक्षसों को भी दया मिलती है .वही तो है धर्म जिसमे क्षमा , दान , है . वही तो है धर्म .

बुधवार, 26 मई 2010

जरा सोचिये

चारो तरफ से घिरे है भारतीय


भारतीय चारो तरफ से घिरे है यह बात १६ आने एकदम सच है स्थिति विस्फोटक है . ग्रह युद्ध की आशंकाओं से भी इनकार नही किया जा सकता . साम्प्रदायिक दंगे तो होते ही रहते है . पाकिस्तान अपनी चालो से बाज़ नही आ रहा रोज इंतज़ार कर रहा है कब भारत को दैहलाये . बांग्लादेशी घुसपैठिये हर गाव और बड़े शहर में मोजूद है और संख्या बढती जा रही है . नक्सली चीन के इशारे और उनके हथियारों प़र जब चाहे देश को दहला रहे है ट्रेनों की पटरिया उखाड़ रहे है विस्फोट कर रहे है . विदेशी लोग भारत के टुकड़े म्तान्त्र्ण से करना चाहते है सभी का एक ही सपना है भारत के टुकड़े कर कोई न कोई भाग हथिया लिया जाए . आसान टार्गेट है समय ज्यादा . सभी ज्यादा से ज्यादा भाग प़र कब्जा करेंगे . हम विकास के झुनझुने से खेलते रहेंगे सोटे रहेंगे सेना के जवान शहीद होते रहेंगे और विदेशी विकास की नीव के ठीक नीचे बारूद बिछाते रहेंगे .

हम क्या कर सकते है हम जातियों के नाम प़र लड़ते रहेंगे अपनों का लहू बहता देखते रहेंगे . यही तो हिन्दुस्तान में होता आया है और एसा ही होता रहेगा . हमें देश से क्या लेना हम आधुनिका में अंधे हो चुके है हम निजी स्वार्थो में खो चुके है . लेकिन वो नही सोये ता में बठे है इंतज़ार में बैठे देश के रहनुमा भी सत्ता में चूर है विकास कर रहे है और हम चमचमाती सडको को देखकर ख़ुशी से कूद रहे है उछल रहे है . लेकिन क्या हमारी आने वाली पीढ़ी  भी कूदेगी  झूमेगी या इन लोगो का शिकार बनेगी .जरा सोचिये

मंगलवार, 25 मई 2010

मायावती के राज में हिन्दू देवी देवताओं का अपमान

चुनाव से पहले मायावती का नारा था 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय ' इसी नारे को जनता में भुनाकर मायावती ने सत्ता का सफर तट किया था . सोशल इंजीनियरिंग का उनका फार्मूला सफल रहा . लेकिन सत्ता में आने के बाद लगता है मायावती अपने उस नारे को भुल गयी है . घटना कुछ दिन पहले की है लखनऊ से प्रकाशित एक पत्रिका अम्बेडकर टुडे’ पत्रिका का मई- 2010  के अंक में हिन्दू देवी देवताओं और वेदों के बारे में गलत बाते कही गई  है . जिस सोशल इंजीनियरिंग का मायावती दम भरती है उन्ही के प्रदेश में एसी अपमानजनक घटनाए हो रही है . क्या कोई पत्रिका बिना राजनितिक संरक्षण के एसे कृत्य कर सकती है . देखिये क्या क्या कहा गया है इस पत्रिका में हिन्दू धर्म’ मानव मूल्यों पर कलंक है, त्याज्य धर्म है, वेद- जंगली विधान है, पिशाच सिद्धान्त है, हिन्दू धर्म ग्रन्थ- धर्म शास्त्र- धर्म शास्त्र- धार्मिक आतंक है, हिन्दू धर्म व्यवस्था का जेलखाना है, रामायण- धार्मिक चिन्तन की जहरीली पोथी है, और सृष्टिकर्ता (ब्रह्या)- बेटी***(कन्यागामी) हैं तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी- दलितों का दुश्मन नम्बर-1 हैं।

इस पत्रिका के सम्पादक डॉ0 राजीव रत्न अपनी इस पत्रिका के विशेष संरक्षकों में मायावती मंत्रिमण्डल के पांच वरिष्ठ मंत्रियों क्रमशः स्वामी प्रसाद मौर्य (प्रदेश बसपा के अध्यक्ष भी हैं।), बाबू सिंह कुशवाहा, पारसनाथ मौर्य, नसीमुद्दीन सिद्दकी, एवं दद्दू प्रसाद का नाम बहुत ही गर्व के साथ घोषित करते हैं। क्या इस षड्यंत्र में मायावती के मंत्रियो का भी हाथ है . राजनीति को चमकाने के लिये किसी धर्म को बदनाम किया जाना जायज है . भले ही पत्रिका के मालिक ने यह मायावती को खुश करने के लिये किया हो अथवा नही  लेकिन वह यह क्यों भुल गये वह भी एक हिन्दू है . अभी यह साफ़ नही हो पाया है की मुख्यमंत्री  मायावती से इनके सम्बन्ध है भी या नही लेकिन एक बात तो तय है अगर यह खबर देश के कोने कोने तक पहुची तो मायावती की सोशल इंजीनियरिंग वाली छवि को धक्का  लगेगा . एक बात समझ से बाहर है अब तक यह खबर किसी चैनल ने नही दिखाई क्या यह पत्रिका साम्प्रदायिक नही है . अगर किसी और धर्म प़र एसी टिप्पणी होती तो ?.








प्रदेश सरकार ने हालांकि विवादित पत्रिका के मई अंक जब्त करने के साथ जोन्पूर के जिलाधिकारी को उसके शीर्षक को निरस्त करने के आदेश दिए है .

सोमवार, 24 मई 2010

क्या हम लोगो ने इसलिए वोट दिए थे इन लोगो को

जब से हम आजाद हुए है तभी से भारत आतंक से पीड़ित है . पाक परस्त आतंक हो या नक्सलियों का आतंक हर समय  अपनी दस्तक देता रहता है . और अपनी दहशत छोड़ जाता है भारतीय मानस के मन प़र . जिसमे अब तक हजारो सेना के जवान और आम आदमी अपनी जाने गवा चुके है . हजारो माओ की कोख उजड़ चुकी है सेकड़ो की मांग का   सिंदूर सिंदूर छीन गया है . बच्चे अनाथ हुए है मॉस के चीथड़े लोगो ने देखे है . एसा मंजर देखकर गुस्सा तो आता ही है और दया भी आती है . लेकिन भारत सरकार इन हमलो की मूल जडो में न पहुचकर या तो राजनीति में उलझी रहती है या फिर मुआवजा देकर सब कुछ भुल जाती है . इंसान की कीमत को सरकार मुआवजों पैसो के बल प़र तोलती है क्या हमारे नेताओं ने अपना जमीर बेच खाया है . जब इन लोगो का कोई अपना जान गवाएगा क्या तब भी ये लोग मुआवज़े से संतुष्टि पायेंगे . एसी तुच्छ राजनीति है की देश की सुरक्षा उसके नागरिको की सुरक्षा में भी वोट बैंक की राजनीति में तोला जाता है . जब मीडिया में कोई मुद्दा हावी होता है तब ये लोग विकास विकास चिलाते है . गरीब दलितों के घर खाना खाते है हिन्दू आतंक चिल्लाते है . भारत की अब तक की विफल सरकारे आतंक और नक्सल प़र कोई रोक नही लगा पाई है . देश का ग्रहमंत्री कहता है उसके पास पूरे अधिकार नही है फिर क्यों वह कुर्सी प़र बैठा है क्या देश के लोगो का बहता खून देखने के लिये . पाकिस्तान से मित्रता की बाते करते है ये लोग नक्सलियों से बाते करने की पेशकश करते है ये लोग . रस्सी का साप बना कर रख दिया है इन लोगो ने  . अब दंतेवाडा , का मुद्दा मीडिया प़र नही है अब एक और मुद्दा लाये है ये लोग . ' क्या राहुल बनेंगे प्रधान मंत्री  . अरे मेरे देश के रहनुमाओं पहले वर्तमान  स्थिति को तो संभाल लो २०१४ की सत्ता हथियाने की रणनीति पहले ही तयार कर रहे हो . मीडिया भी इन लोगो का साथ दे रहा है राहुल गांधी को एक हीरो की तरह बना दिया है इन लोगो ने . गरीबो के घर खाना खाने से क्या इनके सारे पाप धुल जायेंगे .क्यों की इनके लिये खून की अपने  देश की कोई कीमत नही है घिन आती है एसी सरकारों प़र . जो अपने लोगो का खोंन बहता देखे और फिर गरीबो के घर खाना खाए .क्या हम लोगो ने इसलिए वोट दिए थे इन लोगो को

रविवार, 23 मई 2010

राष्ट्र अपमानित है

कनाडा द्वारा बी  एस ऍफ़  के खिलाफ अपमान जनक टिप्पणी की गयी बी एस ऍफ़ को हिंसक सेना बताया . यह राष्ट्र के मुह प़र तमाचा है लेकी उससे बड़ी बात केंद्र ने इस प़र कोई सख्त प्रतिक्रिया  नही दी . जिस बी एस ऍफ़ के बाल प़र आज राष्ट्र सुरक्षित है जिसके बाल प़र हमारे राजनीतिज्ञ  सुरक्षित है क्या उसके खिलाफ भारत की धरती प़र ही एसा कहना उचित है . और उपर से केंद्र का ढुल मूल रवैया .जो लोग टन - मन - धन से देश सेवा कर रहे है क्या यह बात उनके मनोबल को नही घटाती . अपनी जान प़र खेलकर जो देश की सुरक्षा कर रहे उनके खिलाफ एसी टिप्पणी .  राष्ट्र को कब तक अपमान सहना पडेगा इन विदेशियों से . एसा ही एक मामला कुछ माह पहले सामने आया था जब जर्मनी से आये सांसदों के एक शिष्टमंडल ने गुजरात के मुख्यमंत्री को हिटलर कहा था . क्या यह गुजरात की जनता का अपमान नही है . एक लोकतांत्रिक ढंग से चुने हुए मुख्यमंत्री को हिटलर कहना देश की जनता के मुह प़र तमाचा है लेकिन केंद्र की सरकार तब भी खामोश थी और अब भी . वैसे बी एस ऍफ़ के मामले में विदेश मंत्रालय ने कनाडा सरकार के समक्ष आपति दर्ज करा दी है . लेकिन बड़ा सवाल कब तक हमारे ही देश में हमारे ही भारतवासियों को विदेशी अपमानित करते रहेंगे . अभी कुछ देर पहले एक खबर और भी आई है उनकी तरफ से सफाई दी जा रही है ' मै इस बात प़र जोर देना चाहती हूँ की कनाडा भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का असीम सम्मान करता है कनाडा के मन में भारतीय सशत्र सेना और उससे जुडी संस्था के लिये बहुत सम्मान है . लेकिन यह तो वही बात पहले गाली दी और बाद में माफ़ी मांग ली

गुरुवार, 20 मई 2010

जागो ग्रहमंत्री जी देश का सवाल है

देश की स्थिति बिगडती जा रही है कभी नक्सली तो कभी आतंकी देश को देहला रहे है लेकिन हमारे देश के ग्रहमंत्री  कहते है उनके पास सिमित अधिकार है . आज चिदम्बरम गृह  मंत्री की कुर्सी प़र बैठे है और रोज हो रहे हमलो को देखकर ब्यान दे रहे है उनके पास सिमित अधिकार है . तो क्या उनकी सरकार ने उनके हाथ बाँध रखे है यह सीधा आरोप है अपनी सरकार प़र . फिर क्यों वे पद प़र बने है जब उन्हें काम करने की आजादी ही नही ही है . यह तो सीधे - सीधे देश की सुरक्षा और देशवासियों के साथ खिलवाड़ हुआ . एक और ब्यान देखिये गृह मंत्री जी का ' सभी राज्यों के मुख्य मंत्री साथ दे . अब इस ब्यान से सवाल यह उठता है कोन सा मुख्यमंत्री है जो साथ नही दे रहा  . छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंग जी ने तो इतना तक कह दिया ये नक्सली आतंकी है . फिर भी देश के ग्रह  मंत्री कोई ठोस निर्णय  नही ले पा रहे है . जब २६ - ११ का आतंकी हमला हुआ तब भी पूरा विपक्ष एक सुर में सरकार के साथ था . फिर भी हमले के १ साल बाद भी हाफिज़ सैयद , हेडली जैसे मास्टर माइंड भारत के हाथ नही लगे है . उलटे हम उस देश से कह रहे है की आतंकियों  प़र कारवाई करो जो इनका जन्म दाता है जिसका मकसद ही भारत की बर्बादी है . हमारी सरकार न तो आतंकियों के खिलाफ कुछ करती है और न ही अपने देश में पनप रहे नक्सली जो की तालिबानियों का रूप धारण कर रहे है के खिलाफ कोई ठोस कारवाई करती है . तो क्या चिदम्बरम जी हम यह समझे नक्सली हो या आतंक ये दोनों ही आपके बलबूते के बाहर है . देश का ग्रहमंत्री पद प़र बने रहने के लिये देश की सुरक्षा को सिर्फ इसलिए ताक़ प़र रखे है चुकी उसे पद प़र रहना है भले ही देश की जनता को रोज - रोज कभी आतंकियों का तो कभी नक्सलियों का शिकार होना पड़े . भले ही देश की १०0 करोड़ जनता भैय  के माहोल में पल - पल रोज मरे लेकिन आपको कोई फर्क नही पड़ता . आज आप  लोगो के पास पावर है आदेश देने के लिये पावर है फिर भी आप  लोग आम जनता को मरता  देख कोई कारवाई नही करते और जब विपक्ष सख्त कारवाई की मांग उठाता है  तो पता नही क्यों आप मानवता की बाते करते है . लेकिन आप लोगो  को ये नही भूलना चाहिए नक्सली हो या , आतंकी आप  तक भी पहुच सकते है क्या तब भी आप  इसी प्रकार हाथ बांधे रहेंगे . जागो ग्रहमंत्री जी  देश का सवाल है

मंगलवार, 18 मई 2010

आधुनिकता की भूख में अंधे भारतीय

भारत जो सम्पूर्ण विश्व के देशो से अलग है जहा लोग शान्ति और मोक्ष की तलाश में आते है . जब सब जगह भटक कर कुछ हासिल नही होता तब हताश होकर लोग भारत में आते है . आखिर क्यों आते है सभी को पता है भारत एक प्राक्रतिक खूबसूरती का देश है हर गाव में योगी , मंदिरों की शंख ध्वनी , गंगा जैसी पावन नदी , काश्मीर की वाडिया , उतराखंड की शान्ति , हिमाचल की ख़ूबसूरती , ये सब विदेशियों और भारतीयों दोनों को आकर्षित कर एक अलग सी शांति का अनुभव कराती है . यहा की सभ्यता छोटे बड़े का सम्मान श्रम लाज लज्जा जो पूरे विश्व में सबसे अलग और अनोखी है . इन सब चीजों के भारतीयों को पैसे नही देने पड़े और ये सब प्राक्रतिक है प्राचीन है . लेकिन अब भारत के लोग भी पश्चिम की लीक प़र चल निकले है अपने देश की खूबसूरती का बत्ठा ख़ुद बैठाने प़र तुले है . भारतीय संस्कृति को नष्ट करने में लगे है . यह काम तब से जारी है जब दो ; चार भारतीय विदेशो में शिक्षा लेने गये और उन्होंने भारत को भी वैसा ही बनाने के सपने संजोय . यहा की प्रक्रति से छेडछाड की और ये काम आज जोरो प़र है . आधुनिकता के अन्धो ने सदा अपने देश की मान मर्यादा को ध्यान में न रखकर भारतीयों को असभ्यता में धकेल दिया . और वही काम निरंतर जारी है पैसे कमाने की इस अंधी दोड़ में भारत को भी फ्रांस , इटली बनाना चाहते है .जंगलो , वनों , नदियों , पहाड़ो - पर्वतों , सब कुछ रोजगार के नाम प़र बर्बाद किया जा रहा है . हमारी आस्थाओं , संस्कार आधुनिकता  के नाम प़र सभी कुछ नष्ट - भ्रष्ट किया जा रहा है . और सरकार का इन प़र कोई प्रतिबंध नही है हम अपनी पहचान को मिटाकर कसे रोजगार पा सकते है . क्या इस तरह के जो काम भारत में चल रहे है भारत को विकसित देश बनाने के नाम प़र ये भारत में महंगाई , जमीन के रेटों में महंगाई को नही बढा रहे है जिससे आम आदमी पिस्ता जा रहा है और विदेशी कम्पनिया चाँदी कूट रही है . मक्खन  वो ले जा रहे है और भारत के १० % लोगो के हाथ लस्सी लग रही है . और बाकी के लोग इन सब के नीचे दबते जा रहे है और हम अध्निकता में यह सब देख नही पा रहे या जो लोग देख रहे है समझ रहे वे लोग आँख मिचे बैठे है

शुक्रवार, 14 मई 2010

हिन्दू मुस्लिम एकता के रोड़े

भाइयो और बहनों बहुत से लोग हिन्दू मुस्लिम एकता के ख्वाब देखकर सो जाते है . किन्तु सुबह हते ही वह ख़्वाब कांच के महल की तरह चकना - चूर हो जाते है . फिर भी वे लोग ख्वाब देखते और दिखलाते है लेकिन क्या कारण है की हिन्दू मुस्लिम एकता नही हो सकती . क्या कारण है देश में कही न कही से दंगो - अलगावाद की स्थिति उत्पन्न होती रहती है . वैसे इस देश में एसे मुसलामन भी है जो हिन्दुओ के साथ घुल मिल कर रहते है और सैकड़ो  सालो से रह रहे है लेकिन फिर भी दंगे और अन्य तरह की घटनाए होती रहती है . इनका कारण पहला तो यही है इस देश में बिना किसी वीजा के अवैध तरीके से बंगलादेशी , पाकिस्तानी मुसलमानों का आना और बेरोजगारी को और बढ़ाना . जिससे मुसलमान की आर्थिक दशा देखने में कमजोर लगती है लेकिन लाखो की संख्या में बंगलादेशी भारत में अवैध  रूप से रह रहे है वे यहाँ हीरे - ज्वारात लेकर नही आते . इन्ही के कारण मुसलमानों की स्थिति  बदतर हो रही है और ये लोग सरकारी नोक्रिया , और काम धंधे भी करने लगे है जिससे भारतीय मुसलमानों और हिन्दुओ का काम -  धंधा छीन रहा है . और हमारी सरकारे इन्हें निकालने की जगह इन्हें हर सुविधा उपलब्ध कराती है .  जिससे हिन्दू और मुसलमान के बीच तनाव बढ़ रहा है . जिसमे आम मुसलमान और हिन्दू पिस्ता है . दुसरा कारण यह है मुसलमानों की पुरानी और कट्टर -  पंथी सोच जिसके तहत वे लोग अधिक से अधिक ध्र्मान्तर्ण करवाना चाहते है . और इसमें साथ हमारी सरकार देती है इन लोगो का इन्हें आरक्षण , और मदरसों प़र करोड़ो खर्च कर जिससे धर्म - परिवर्तन की समस्या बढती है और जब मत परिवर्तन हो जाता है तब यह स्थिति दंगो का रूप धारण कर लेती है . परन्तु सरकारे  न तो दंगाईयो के खिलाफ कारवाई करती है और न ही कट्टरपंथियों प़र लगाम कसती है . हिन्दू मुसलमान एकता हो सकती है लेकिन कैसे आइये देखते है .
  • धर्म परिवर्तन प़र पर्तिबंध लगे
  • बंगलादेशी घुसपैठियों  को बाहर का रास्ता दिखया जाए ताकि मुसलमानों की आर्थिक दशा सुधरे
  • मदरसों को बंद कर सभी को सामान शिक्षा दी जाए ताकि मुस्लिम मानसिकता में सुधार हो
  • जो भी दंगो की पहल करे उसे सख्त सज़ा दी जाए
  • फतवों प़र नियन्त्रण कसा जाये
  • कश्मीर में धारा ३७० रद्द की जाए
  • मुसलमानों को मेवात के मुसलमानों से सिख दी जाये जहा आज भी मुसलमान ५ लाख गए पाले है और ख़ुद को कृष्ण का वशज़ कहते है
  • सभी धर्मिक आरक्षण खत्म कर आर्थिक रूप से कमजोरो को आरक्षण  दिए जाए
लेकिन क्या ये सब हमारी सरकार कर सकती है जब तक एसा नही होगा तब - तक हिन्दू मुस्लिम एकता दिन में ख़्वाब देखने के बराबर है

बुधवार, 12 मई 2010

मुस्लिम महिलाओं के लिये फतवा

कल ही मुस्लिम महिलाओं के लिये फतवा निकाला गया है की कोई भी मुस्लिम महिला उस जगह काम न करे जहा उसे मर्दों के साथ काम करना होता है अथवा जहा मर्द काम करते है . ये फतवा मुसलमानों की आजादी और आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर देगा . अगर इस फतवे को मुस्लिम-  महिलाओं ने माना तो न जाने कितनी मुस्लिम महिलाए अपना काम छोड़ देंगी . क्या ईस तरह के फतवे मुसलमानों को और अधिक पिछड़े - पण में नही ड़ाल देंगे . आज मुस्लिम महिलाए पत्रकारिता में है , राजनीति में है , स्कूलों में है , कालेजो  में है और भी कई विभागों में मुस्लिम महिलाए कार्यरत है . जिनसे इन्हें समाज में इज्ज़त और घर का खर्च चलाने में मदद मिलती है . इस तरह के फतवे निकालकर मुसलमानों की स्थिति को कमजोर किया जाता है और फिर मुस्लिमो के पिछड़ेपन और आरक्षण की बाते की जाती है . आज हिन्दू समुदाय बहुत सी बातो को त्याग चुका है और अधिकतर हिन्दुओ की खुशहाली का राज भी यही है और अपने संस्कारों को भी बचाए है . अगर हिन्दू संस्कृति में इस तरह के फतवों के लिये जगह होती तो क्या आजादी में जो योगदान महिलाओं का था वह आज होता और क्या हम इस तरह के फतवों से आजादी हासिल करते  . पुरूषों के साथ प़र फतवा निकालने से क्या होगा जब एक मुस्लिम तीन बीवी रख सकता है और जब चाहे तब तलाक दे सकता है क्या इस तरह से मुस्लिम महिलाओं को सम्मान की पद्धति से नवाज़ा जा रहा है . इस तरह के फतवे दिए जा रहे है जो की इतिहास में भी सुनने को शायद ही मिले क्या यह बाबर - के जमाने भी पुरानी सोच है .

मंगलवार, 11 मई 2010

हिन्दू विवाह एक्ट में बदलाव जरूरी

आज कल हिन्दू विवाह को लेकर मीडिया में बहस छिड रही है लेकिन क्या वाकई इस क़ानून  में बदलाव की जरूरत है . हमारे शास्त्रों में वर्णित है माँ . नानी , और परनानी का गोत्र छोड़ा जाना और पिता का गोत्र . लेकिन अंग्रेजो के बनाये क़ानून इनका विरोध करते थे वही क़ानून आज तक चले आ रहे है . और मीडिया भी इन बातो प़र घंटो बहस कर इसे दकियानूसी बाते बता रहा है .  लेकिन हिन्दू समुदाय इन संस्कारों को भुला नही है और भुल  भी नही सकता . क्या नई चीज़ के नाम प़र भाई - बहन का विवाह जायज है . जिस प्रकार से अंग्रेजो ने हिन्दुओ के रीती - रिवाजों प़र प्रहार किया था वही प्रहार आज का मीडिया कर रहा है और नई पीढ़ी को बरगलाने का कार्य कर रहा है . जब भारत का बहुसंख्यक वर्ग एक गोत्र में विवाह नही करना चाहता फिर क्यों इस तरह की बहस कर और मुद्दे को उछाल कर हिन्दुओ को अपमानित किया जाता है . क्या मीडिया अंग्रेजो की लीक प़र नही चल रहा है . खाप - पंचायतो की जायज मांग को भी पुराने ख्यालात बताया जाता है और नये के नाम प़र हर पश्चिमी गलत चीज़ हम प़र थोप  दी जाती है . और भारतीय समाज इन सब बातो का खुलकर विरोध भी नही करता . एसा ही लिव इन रिलेशनशिप क़ानून   में हुआ.  मीडिया क्या चाहता है जो भी पश्चिमी देशो में चल रहा है वही ईस देश में भी चले . और हिन्दुओ की आस्था तार - तार होती रहे . सदियों से जिस गलत विचारों और गलत सभ्यता में कुछ देश चल रहे हम भी उन्ही के क़ानून अनुसार चले . यह बाते सिद्ध करती है की आज भी राज अंग्रेजो का ही है वह जो चाहते है वह इस देश प़र थोप देते है और हिन्दू बेचारा घर बैठ कर मन को मसोस कर बैठ जाता है . पता नही हमारे सांसद और सरकार , बुद्धिजीवी भी इन लोगो प़र लगाम क्यों नही कसते . जब की यह रीती- रिवाज ऋषि मुनियों के गहरे अनुभवो और रिसर्च के बाद बने है  क्या इस  तरह से मीडिया किसी और धर्म को कटघरे में खड़ा कर सकता है अथवा हिदुओ की ही सहनशीलता का गलत फायदा उठाया  जाता रहेगा .

सोमवार, 10 मई 2010

हिन्दू धर्म प़र ऊँगली उठाने वालो के लिये एक लेख

मेरी यह पोस्ट उन लोगो के लिये है जो लोग अक्सर हिन्दू धर्म प़र ऊँगली उठाते है और प्रतिदिन बखेड़ा खड़े करे रहते है . तभी कुछ दिनों से मै भी कुछ सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रहा था . जो मेरे ही नही हर हिन्दू के मन में भी उठते है . उन सवालों के जवाब तलाशने के लिये मै कई साधुओ के पास गया और जितनी जानकारी मै एकत्रित कर सका वह प्रस्तुत है उसके कुछ अंश .मै समझता हूँ टीवी प़र धारावाहिकों के माध्यम से हिन्दू धर्म प़र जो दुष्प्रचार किया जा रहा है वह भ्रम लोगो में फैलना कम होगा और लोग जागृत होंगे .




क्यों करते है तुलसी है पूजा =हिन्दू स्तरीय तुलसी की पूजा अपने सोभाग्य एवं वंश वृद्धि के लिये करती है . र्रमयं कथा में वर्णित एक परसंग के अनुसार राम दूत हनुमान जी जब सीता का पता लगाने गये तो वहा उन्होंने एक घर के अंगन में तुलसी का पोधा देखा जो की विभिष्ण का घर था उन्होंने तुरंत अनुमान लगा लिया की यह किसी धर्म परायण व्यक्ति का घर है अर्थात तुलसी पूजा की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है .
वज्ञानिक अर्थ  = तुलसी की पतियों में स्क्राम्क ' कितानुओ ' को मारने की अद्भुत शक्ति होती है . तुलसी एक दिव्य ओषधि का पोधा है . जुकाम खासी , मलेरिया आदि में लाभदायक है . इतना ही नही केंसर जैसी भयानक बिमारी में भी ठीक करने में लाभदायक है .
क्यों हिन्दू धर्म में मृतक की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करते है = हिन्दुओ की धार्मिक आस्था के अनुसार मृतक की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करने से मृतक की आत्मा को शान्ति मिलती है .
वज्ञानिक अर्थ = वज्ञानिक प्रिक्ष्नो से यह निष्कर्ष निकला है की अस्थियो में फास्फोरस अत्याधिक मात्रा में पायी जाती है जो खाद के रूप में भूमि को उपजाऊ बनाने में सहायक है . गंगा नदी के जल से हमारी अन्न उपजाने वाली जमीन की सिचाई होती है . जमीन की उर्वरा शक्ति बढाने में फास्फोरस सहायक है जो की गंगा के जल में अस्थिया प्रवाहित करने के कारण बहुत अधिक मात्रा में निहित है
 
आज के लिये इतना ही वक्त की कमी के कारण बाकी का लेख कल लिखा जाएगा . लेकिन इन दो बातो से भी यह प्रमाणित होता है की जिन बातो को आज रुढ़िवादी बताया जा रहा है और प्रहार किये जा रहे है वे बिलकुल निराधर है और ऋषि मुनियों ने जो परम्पराए बनाई है उनका वज्ञानिक अर्थ भी है

रविवार, 9 मई 2010

एक तरह चका चोंध ' और दूसरी तरफ गरीबी

जब भी घर से बाहर निकलता हूँ मन में एक अजीब सी पीड़ा होती है छोटे - छोटे बच्चे बेच रहे है सडको प़र पानी के पतासे . कोई फटे हुए कपडे पहना भीख मांग रहा है तो कोई पढ़ाई से वंचित है . कोई सर्दी से ठिठुर  रहा है तो कोई गर्मी में लू से तप रहा है . तभी देखता हूँ आगे चलकर शानदार पार्क बना है लगभग १४ एकड़ जमीन में मन को शांति मिलती है देश तरक्की प़र है . बाजारों की चका चोंध देखकर लगता है रोजगार में भी भारत आगे निकल रहा है . तभी लाइनों में भीख का कटोरा लिये खड़े है कुछ बच्चे ,  कुछ बजुर्ग ,  कुछ महिलाए . मन सिहर उठता है तभी एक बजुर्ग कटोरा लेकर एक बड़ी सी दूकान में जाता है दूकान मालिक उसे ५० पैसे कटोरे में डाल देता है . जैसे ही सुबह हुई तो स्टेशन  से देहली की गाडी पकड़ी और बैठ गया मै उसमे  . तभी एक बच्चा आया हाथ में कुछ संगीत का यंत्र लिये . तभी कुछ आवाज़ आई ' गरीबो की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा तुम एक पैसा दोगे वो दस लाख देगा . तभी एक दोस्त जेब से एक रुपया निकलता है और उसकी कटोरी में तेज़ से डालता है और कहता है ' चल बे . एसे सारे रास्ते कभी कोई मांगने आ रहा है तो कभी कोई चाय , चाय , छोले - छोले . तभी अपना स्टेशन आया और में गाडी से उतरा शहर में लाखो रूपए की महंगी गाडिया थी बड़े बड़े मोल  . दुकाने , लाइटे , चोडी - चोडी सड़के , बड़ी महंगी गाडियों का काफिला जा रहा था कोई भी गाडी १० लाख से कम नही थी चका चोंध से भरा शहर था नेता जी  महंगी गाडियों में मिनरल वाटर की बोतल का पानी पीते हुए सर से गुजर रहे थे . सारा शहर घुमा एक चमकदार शहर है दिल्ली . शाम को वापस ट्रेन  में बैठा फिर वही सब झोपड़ पट्टी बच्चे चाय बेचते . मन में एक सवाल कुरेद रहा था कही आधुनिकता और विकास के नीचे ये तबका दब न जाए . बड़ी बिल्डिंग के नीचे मजदूर न दब जाए . एक तरह चका चोंध ' और दूसरी तरफ गरीबी ठण्ड से सिकुड़ते बच्चे जो आजादी के ६३ सालो बाद भी एक पैसा मांग रहे है गा रहे है . २ रोटी के लिये हाथ फैला रहे है भले ही कितने मदर दे मना लो , फादर  दे मना लो  , चिल्ड्रन  दे मना लो लेकिन अंतिम सच्चाई तो यही है . आज भी बजुर्ग , महिलाओं , और बच्चो का ये हाल है युवा का भी कुछ एसा ही हाल है . यही है भारत  जो की मीडिया और नेता और ख़ास आदमी देख नही पाता समझ नही पाता जब की ये भी जीव है भारतीय है

अमेरिका में आतंकी हमला नही होता ' कुछ सिखों

अमेरिका ९ - ११ के बाद कोई हमला न तो हुआ है और अभी होने की कोई उम्मीद भी नही है . भारत २६ - ११ के बाद भी हमले हुए और उससे पहले भी . इन दोनों देशो को देखिये आखिर क्या कारण है इन दोनों देशो में इतना फर्क है . एक देश आतंक से डरता है तो दुसरा कुछ भी नही करता है . अमेरिका आतंक से डरता है और चोक्न्ना रहता है तभी तो ९ -११ के पश्चात अमेरिका में एक भी हमला नही हुआ वह स्थिति को भाप गया और वह चेत गया . लेकिन भारत में आतंक को लेकर दहशत भी है परन्तु उसके खिलाफ करवाई नही . हम एक हमला झेलकर सब कुछ बहुल जाते है और अमेरिका बम की गंध सूंघकर भी पाकिस्तान , इरान जैसे देशो को अपनी गर्जना से ही डरा देता है .हम लोग बार - बार उस देश से कहते है आतंक के खिलाफ करवाई करे और अमेरिका उस देश को ही तह नहस कर देता है जहा से उसके खिलाफ कोई खतरा हो . वैसे आज का जमाना भी यही है या तो तुम सामने वाले प़र ख़ुद पकड मजबूत करो नही तो वो तुम्हे ही ख़ा - निगल  जाएगा . लेकिन अपन न तो पकड मजबूत कर रहे और न ही उसे मजबूर कर रहे है की वो आतंकियों प़र लगाम कसे बल्कि अपन तो दोस्ती की पींगे बांधते आये है . वो जितना हमें देश को नुक्सान पहुचाता है हम उतने उसके करीब होते है . एक अमेरिका है जो उसकी तरफ ऊँगली करता है वह उसकी बाजू उतार लाता है . सभी कहते है मेरा भारत महान लेकिन आने वाली पीढ़ी पूछेगी क्या हम इसलिए महान है की हमने आतंक को  सहा  उस प़र कोई कारवाई नही की अपनों को खोकर हम कैसे बनेंगे महान . इतिहास में भारत ने  बहुत  से युद्ध जीते है लेकिन देश के भीतर जो युद्ध चल रहा है क्या वह हम जीत पाएंगे

शनिवार, 8 मई 2010

विस्फोटको के ढेर प़र भारत

अभी - अभी खबर मिल रही है अमृतसर में विस्फोट से लदी  एक कार पकड़ी है . और बमों को डिफुज़ की करवाई चल रही है . यह आतंक की साजिश है अधिकारियों का मानना है . लेकिन एसी साज़िशे रोज हो रही है कभी बंगलूर तो कभी डेल्ही , मुंबई हर जगह बम मिलने की खबरे आती है कभी अफवाहे आती है . लेकिन अफवाह हो या घटना एक बात तय है भारतीय आज बारूद के ढेर प़र बैठे है और एक डर की जिन्दगी जीने को मजबूर है . रोज - रोज के आतंकी साजिशो और अफवाहों ने भारतीयों को बहुत ही डरा सा सहमा सा दिया है . क्या ये सब यु ही चलता रहेगा हम यु ही डर - डर कर जीते रहेंगे . आखिर ये आतंकवादी हमारी धरती में घुसकर कैसे अपनी साजिशो को अंजाम दे जाते है अगर दे जाते है तो इन प़र कारवाई क्यों नही होती . जब तक इनकी कारवाइयो का जवाब हम मुहतोड़ नही देंगे तब तक भारतीय समाज में डर की भावना पनपती रहेगी . हम एक आजाद देश के नागरिक है हमारे पास बेहतरीन सेना है सेना के पास हथियार है फिर भी हम डर के जीने को मजबूर है . . आखिर इन आतंकवादियों का मुह क्यों नही तोड़ा जाता हम आज अपनी ही जमीन प़र अपने लोगो का लहू बहता देख रहे है  . बड़े शहरो में ट्रेनों प़र जाने से डर , भीड़ भाड़ वाले इलाको में जाने प़र डर , दहशरा दिवाली जैसे त्यौहार मनाने में भी डर हर जगह डर ही डर . कब तक हम विस्फोट के ढेर प़र बठे रहेंगे और उस ढेर प़र क्या हम सुरक्षित है . आतंकवादियों की धमकियों से अलर्ट जारी हो जाते है रेड अलर्ट , हाई अलर्ट . लेकिन उन प़र विस्फोटो से पहले देश के नागरिको का खून बहने से पहले कारवाई क्यों नही होती . कब तक किस्तों में सास लेते रहेंगे हम कब तक सरकारे मुआवजों से जख्मो को भरती रहेगी . क्या भारतीय नागरिको की कीमत पैसो से ज्यादा कुछ नही है आतंक का शिकार बनो और मुआवजा लो नोकरी लो . और बहुल जाओ सब कुछ फिर से कोई हमला झेलने को तैयार रहो .

शुक्रवार, 7 मई 2010

मुस्लिम बहुल इलाको में ही दंगे क्यों होते है

देश में अब तक जहा भी दंगे प्रसाद हुए है ज्यादातर मुस्लिम बहुल क्षेत्रो में ही हुए है . हम ज्यादा दूर जाए तो हम पायेंगे बटवारे के दोरान भी पंजाब , सिंध , बलूचिस्तान से ही शुरुआत हुई थी . जो वर्तमान में इस्लामिक राष्ट्र है . और वर्तमान में भी स्थिति कुछ एसी ही है बरेली और हद्राबाद के दंगे कुछ एसा ही दर्शाते है . कुछ लोग कहते है हिन्दू बहुल क्षेत्रो में मुस्लिम से भेद - भाव होता है उन्हें बेवजह तंग किया जाता है क्या यह बात सच है . अगर एसा होता तो क्या हरियाणा , महाराष्ट्र ,मध्य प्रदेश , राजस्थान जैसे राज्यों में मुसलमानों की जनसंख्या इतनी बढ़ सकती . आज भी बहुत से मुसलमान यह मानते है की हिन्दुस्तान में पाकिस्तान के मुकाबले मुस्लिम ज्यादा खुशहाल और सम्पन्न है . फिर एसा क्यों होता है की जनसंख्या बढ़ने प़र दंगे शुरू हो जाते है हिन्दुओ को खदेड़ा जाता है जब की आज जहा जिस भी राज्य , शहर अथवा गाव में मुसलमानों की आबादी ५ % भी नही है वहा भी मुसलमानों को किसी प्रकार की कोई तकलीफ नही है . मुसलमान अच्छी तरह से अपने बीवी बच्चो का पालन पोषण कर रहे है और खुशहाल भी है . लेकिन ध्र्मान्तर्ण के जरिये मत परिवर्तन होने प़र ही दंगे शुरू हो जाते है क्या यह हिन्दुओ के साथ अत्याचार नही है या यह हमारी सहिष्णुता का गलत फायदा है . मै सभी मुसलामनो का विरोध नही करता लेकिन इतना जरुर समझता हूँ जो मुसलमान राष्ट्रवाद की बाते करते है और मानवता को भली - भाति समझते है उनकी आवाजो को भी कट्टरपंथियों द्वारा दबा दिया जाता है . और कुछ एसे भी होते है जो मत परिवर्तन प़र अपने सुर ही बदल देते है और आक्रामक रूप अख्तियार कर लेते है . शान्ति का सन्देश इस्लाम भले ही देता हो लेकिन मुस्लिम बहुल इलाको में शान्ति क्यों नही टिकती क्यों पाकिस्तानी झंडे लहराए जाते है क्यों घरो दुकानों में आग लगा दी जाती है जैसा की बरेली में हुआ . और तब वे लोग इस सब को बंद करने की अपील तक नही करते फिर क्यों बार - बार मुसलमानों प़र अत्याचार की बाते करते है आखिर क्यों होता है एसा . क्या उनका मकसद यही होता है. वैसे देखा जाये तो सभी दंगो की जड़ है ध्र्मान्तर्ण फिर इस धर्मान्त्र्ण प़र प्रतिबंध क्यों नही लगाता . जो विशेषाधिकार अंग्रेजो ने दिए थे वे आज तक चालू है . जब की स्थिति आज पहले से भी  ज्यादा विस्फोटक है . क्या हम अंग्रेजो की लीक प़र ही चलते रहेंगे या हमारे देश में कुछ बदलाव होगा जिससे हिन्दू - मुस्लिम जनसंख्या बढ़ोतरी प़र ध्यान न देकर देश की तरक्की के बारे में सोचे . और देश मजबूत हो

मुस्लिम बहुल इलाको में ही दंगे क्यों होते है

देश में अब तक जहा भी दंगे प्रसाद हुए है ज्यादातर मुस्लिम बहुल क्षेत्रो में ही हुए  है . हम ज्यादा दूर जाए तो हम पायेंगे बटवारे के दोरान भी पंजाब  , सिंध , बलूचिस्तान से ही शुरुआत हुई थी . जो वर्तमान में इस्लामिक राष्ट्र है . और वर्तमान में भी स्थिति कुछ एसी ही है बरेली और हद्राबाद के दंगे कुछ एसा ही दर्शाते है . कुछ लोग कहते है हिन्दू बहुल क्षेत्रो में मुस्लिम से भेद - भाव होता है उन्हें बेवजह तंग किया जाता है क्या यह बात सच है . अगर एसा होता तो क्या हरियाणा , महाराष्ट्र ,मध्य प्रदेश ,  राजस्थान जैसे राज्यों में मुसलमानों की जनसंख्या इतनी बढ़ सकती . आज भी बहुत से मुसलमान यह मानते है की हिन्दुस्तान में पाकिस्तान के मुकाबले मुस्लिम ज्यादा खुशहाल और सम्पन्न है . फिर एसा क्यों होता है की जनसंख्या बढ़ने प़र दंगे शुरू हो जाते है हिन्दुओ को खदेड़ा जाता है जब की आज जहा जिस भी राज्य , शहर अथवा गाव में मुसलमानों की आबादी ५ % भी नही है वहा भी मुसलमानों को किसी प्रकार की कोई तकलीफ नही है . मुसलमान अच्छी  तरह से अपने बीवी बच्चो का पालन पोषण कर रहे है और खुशहाल भी है . लेकिन ध्र्मान्तर्ण के जरिये मत परिवर्तन  होने प़र ही दंगे शुरू हो जाते है क्या यह हिन्दुओ के साथ अत्याचार नही है या यह हमारी सहिष्णुता का गलत फायदा है . मै सभी मुसलामनो का विरोध नही करता लेकिन इतना जरुर समझता हूँ जो मुसलमान राष्ट्रवाद की बाते करते है और मानवता को भली - भाति समझते है उनकी आवाजो को भी कट्टरपंथियों  द्वारा दबा दिया जाता है . और कुछ एसे भी होते है जो मत परिवर्तन प़र अपने सुर ही बदल देते है और आक्रामक रूप अख्तियार कर लेते है . शान्ति का सन्देश इस्लाम भले ही देता हो लेकिन मुस्लिम बहुल इलाको में शान्ति क्यों नही टिकती क्यों पाकिस्तानी झंडे लहराए जाते है क्यों घरो दुकानों में आग लगा दी जाती है जैसा की बरेली में हुआ . और तब वे लोग इस सब को बंद करने की अपील तक नही करते फिर क्यों  बार - बार मुसलमानों प़र अत्याचार की बाते करते है आखिर  क्यों होता है एसा . क्या उनका मकसद यही होता है

कसाब की फ़ासी के बाद और पहले के कुछ सवाल

कसाब को फ़ासी मिल गयी सजा का एलान हो गया कोर्ट ने फैसला सूना दिया है . लेकिन कसाब की फ़ासी से पहले और बाद में कुछ सवाल उठते है और उठते रहेंगे  . जब तक यह सवाल और इनके जवाब नही मिलते भारतीय खून के आसू रोते रहेंगे .
  1. कसाब के साथियो प़र कारवाई कब होगी
  2. कब तक एसे क्साबो अफ्ज़लो को हम झेलते रहेंगे
  3. कब तक आतंक की फसल लहराती  रहेगी और हमारे देश को तबाह करती रहेगी
  4. क्या एसे ही भारतीयों का खून बहता रहेगा
  5. कब तक हेडली जैसे लोग भारत को नुक्सान पहुचाते रहेंगे
  6. क्या कसाब की फ़ासी के बाद आतंक खत्म हो जाएगा
  7. पाक में चल रहे आतंकी शिविरों प़र कारवाई कब होगी
ये एसे सवाल है जो भारत के लोगो को न तो आतंक के खोफ से निकलने देते है और न ही भारत को आर्थिक दृष्टि  से मज़बूत होने देते है . कसाब को फ़ासी तुरंत दे दी जाए तो बेशक एक सन्देश पहुचेगा लेकिन इस पूरे प्रकरण में पकिस्तान के कई आतंकी संगठन शामिल थे उन प़र कारवाई का न होना उनके होसलो को और बुलंद करता है . जिन लोगो को जन्नत और हुरो के सपने दिखाए जाते हो क्या वे लोग भारत में फिर से हमले करने की कोशिश नही करेंगे  . फ़ासी कसाब के गुनाहों का हिसाब किताब है लेकिन जो लोग इन्हें आतंकवादी बनाते है और नित्य नये - नये षड्यंत्र रचते है उनकी लगाम कब कसी जायेगी . या फिर से कोई कसाब १६६ लोगो का लहू बहायेगा  और बदले में हम उसे फ़ासी दे देंगे

बुधवार, 5 मई 2010

इस देश में अच्छे मुसलमानों की कोई कमी नही

एक आम मुसलमान जो मेहनत ,मजदूरी  कर अपना और अपने बच्चो का पेट पाल रहा  है  उसे दंगे प्रसादों से क्या लेना . सच में आम मुसलमान भारतीय संस्कृति में घुल मिल भी सकता है और एसे बहुत से मुसलमान है भी . लेकिन क्या कारण है वही आम मुसलमान भी दंगो की भीड़ में शामिल हो जाता है . देश के संविधान को मानने  से इनकार करने अथवा उसका विरोध करने लगता है . इसका कारण सपष्ट है और बिलकुल पारदर्शी है जो मुसलमान को एक भारतीय से पहले  एक मुसलमान बना देता है . रोज - रोज के दुष्प्रचार कभी कैसे फतवे तो कभी वैसे  जो देश हित में नही है जो देश की विचारधारा से मेल नही खाते . मुसलमानों के लिये अलग पढ़ाई इस तरह की बाटे अथवा मुद्दे जो देश का विरोध करती है यही वह चालबाजो की रणनीति है जो आम मुसलमान को भारत से अलग करती है . जिससे देशभक्त मुस्लिम की मानसिकता को भी परिवर्तित कर दिया जाता है . भारत में एसे बहुत से मुस्लिम मिल जायेंगे जो मंदिर में भी माथा टेकते होंगे लेकिन मुल्ला - मोलवी इनकी सोच में परिवर्तन कर देते है . और टकराव की स्थिति को उत्पन्न कर देते है .हिन्दू किसी भी जगह मंदिर - मस्जिद - गुरुद्वारे चर्च कही भी जा सकते है और सभी का सम्मान करते है . इसी तरह कई मुस्लिम भी भारतीय संस्कृति में घुल - मिल गये है लेकिन उन्हें यह अहसास कराया जाता है तुम अल्लाह के बन्दे हो . तभी मुस्लिम समाज पूरे विश्व में अलग - थलग पड़ता जा रहा है . मंदिर जाने  या किसी तरह की पूजा अर्चना प़र भी फतवे निकाल दिए जाता है कभी वन्दे मातरम प़र फतवे निकाले जाते है और मुस्लिम को एक अलग मानसिकता में ड़ाल दिया जाता है . और यही दंगे प्रसाद की जड़ है इसी तरह की बाटे हिन्दू - मुस्लिम एकता नही होने देती और हम खो देते है कई राष्ट्र भगत .

लिव इन रिलेशनशिप ' शादी से पहले रिश्ते कितने जायज

भारत में लिव इन रिलेशनशिप ' को मान्यता मिलने की बाटे हो रही है . कुछ परसेंट लोग एसे रिश्तो से सहमती जता रहे है . लेकिन भारत के सभ्य लोग जो आज भी अपने देश की संस्कृति से जुड़े है वह इसे गलत मानते है . टीवी प़र बहस छेड़ी जा रही है  बोलीवूड की हीरोइनों को मीडिया इस प़र अपनी राय परकत करने के लिये स्टूडियो में ला रहा है . लेकिन यह मुद्दा मात्र बोलीवूड से जुड़ा नही है यह पूरे देश की सभ्यता संस्कृति से जुड़ा एक सवाल है . यह सभ्यता और असभ्यता की लड़ाई है . भले ही कुछ परसेंट लोग इसे जायज माने लेकिन भारत की जनता क्या चाहती है यह भी तो दिखाया  जाना चाहिए .इस प़र भी कोई सर्वे होना चाहिए . इस  तरह के रिश्तो को अगर कानूनी मान्यता मिलने लगी तो शादी ब्याह जसे पवित्र रिश्ते के क्या माईने रहेंगे . पश्चिमी संस्कृति से पश्चिम के लोग भी अब उब चुके है और पश्चिम में लोग शान्ति की तलाश में भटक रहे है तो क्या इस तरह की बाते भारत के लोगो में कैसा सन्देश देंगी . क्या प्रभाव  पडेगा भारत प़र इसका भारत को भारतीय सभ्यता से जाना जाता है लेकिन भारत में बढ़ रहा पश्चिमी प्रभाव भारत को असभ्यता की और ले जाएगा . जिसमे न तो रिश्तो की कोई अहमियत होगी और न ही कोई जरुरत . क्या यह वंश परम्परा खत्म होने की तरफ पहला कदम तो नही है