रविवार, 23 मई 2010
राष्ट्र अपमानित है
कनाडा द्वारा बी एस ऍफ़ के खिलाफ अपमान जनक टिप्पणी की गयी बी एस ऍफ़ को हिंसक सेना बताया . यह राष्ट्र के मुह प़र तमाचा है लेकी उससे बड़ी बात केंद्र ने इस प़र कोई सख्त प्रतिक्रिया नही दी . जिस बी एस ऍफ़ के बाल प़र आज राष्ट्र सुरक्षित है जिसके बाल प़र हमारे राजनीतिज्ञ सुरक्षित है क्या उसके खिलाफ भारत की धरती प़र ही एसा कहना उचित है . और उपर से केंद्र का ढुल मूल रवैया .जो लोग टन - मन - धन से देश सेवा कर रहे है क्या यह बात उनके मनोबल को नही घटाती . अपनी जान प़र खेलकर जो देश की सुरक्षा कर रहे उनके खिलाफ एसी टिप्पणी . राष्ट्र को कब तक अपमान सहना पडेगा इन विदेशियों से . एसा ही एक मामला कुछ माह पहले सामने आया था जब जर्मनी से आये सांसदों के एक शिष्टमंडल ने गुजरात के मुख्यमंत्री को हिटलर कहा था . क्या यह गुजरात की जनता का अपमान नही है . एक लोकतांत्रिक ढंग से चुने हुए मुख्यमंत्री को हिटलर कहना देश की जनता के मुह प़र तमाचा है लेकिन केंद्र की सरकार तब भी खामोश थी और अब भी . वैसे बी एस ऍफ़ के मामले में विदेश मंत्रालय ने कनाडा सरकार के समक्ष आपति दर्ज करा दी है . लेकिन बड़ा सवाल कब तक हमारे ही देश में हमारे ही भारतवासियों को विदेशी अपमानित करते रहेंगे . अभी कुछ देर पहले एक खबर और भी आई है उनकी तरफ से सफाई दी जा रही है ' मै इस बात प़र जोर देना चाहती हूँ की कनाडा भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का असीम सम्मान करता है कनाडा के मन में भारतीय सशत्र सेना और उससे जुडी संस्था के लिये बहुत सम्मान है . लेकिन यह तो वही बात पहले गाली दी और बाद में माफ़ी मांग ली
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3 टिप्पणियाँ:
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