इस पत्रिका के सम्पादक डॉ0 राजीव रत्न अपनी इस पत्रिका के विशेष संरक्षकों में मायावती मंत्रिमण्डल के पांच वरिष्ठ मंत्रियों क्रमशः स्वामी प्रसाद मौर्य (प्रदेश बसपा के अध्यक्ष भी हैं।), बाबू सिंह कुशवाहा, पारसनाथ मौर्य, नसीमुद्दीन सिद्दकी, एवं दद्दू प्रसाद का नाम बहुत ही गर्व के साथ घोषित करते हैं। क्या इस षड्यंत्र में मायावती के मंत्रियो का भी हाथ है . राजनीति को चमकाने के लिये किसी धर्म को बदनाम किया जाना जायज है . भले ही पत्रिका के मालिक ने यह मायावती को खुश करने के लिये किया हो अथवा नही लेकिन वह यह क्यों भुल गये वह भी एक हिन्दू है . अभी यह साफ़ नही हो पाया है की मुख्यमंत्री मायावती से इनके सम्बन्ध है भी या नही लेकिन एक बात तो तय है अगर यह खबर देश के कोने कोने तक पहुची तो मायावती की सोशल इंजीनियरिंग वाली छवि को धक्का लगेगा . एक बात समझ से बाहर है अब तक यह खबर किसी चैनल ने नही दिखाई क्या यह पत्रिका साम्प्रदायिक नही है . अगर किसी और धर्म प़र एसी टिप्पणी होती तो ?.
प्रदेश सरकार ने हालांकि विवादित पत्रिका के मई अंक जब्त करने के साथ जोन्पूर के जिलाधिकारी को उसके शीर्षक को निरस्त करने के आदेश दिए है .




4 टिप्पणियाँ:
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