मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

अछे कर्म करने से आगे का भाग्य सुधार सकता है


दुखो के आने का कारण क्या होता है मनुष्य के कर्मो का फल . कर्म दो प्रकार के होते है एक भले कर्म और दुसरा बुरे . जब मनुष्य साधन - सम्पन्न हो जाता है तो वह जमकर उत्पात मचाता है और सभी धर्म कार्यो को भूलकर इश्वर भक्ति को भूलकर केवल रुपया कमाता है अथवा कमाए हुए रुपयों को खुलकर जीता है उनका आनन्द लेता है . मोह - माया मै डूबा मनुष्य अपने मित्रो से भी मुह मोड़ता है और कई बार परिवार भी उसे कोई ख़ास मैने नही लगता . वह सब कुछ गलत अच्छा खाने लगता है पश्चिमी सभ्यता का हो जाता है और अपनी आस्थाओं के साथ खिलवाड़ भी कर जाता है या उन्हें अंधविश्वास बताकर उनका अपमान करने लगता है . लेकिन समय चक्र जब सुखो का पूरा होता है तब धीरे - धीरे किसी न किसी तरीके से कर्मो का फल सामने अता है और मनुष्य या तो गरीब हो जाता है अथवा कोई बिमारी से गर्स्त भी हो जाता है . फिर भी बहुत सालो तक उसका घमंड नही टूट पाटा क्यों की वह होश मै नही होता . और जब गरीबी - दुःख हद्द से बढ़ते है तब वह हर मंदिर मै जाता है और ज्योतिषियों के पास जाता है . लेकिन ज्यादा समय ज्योतिषियों के पास ही जाता है वह कर्मो के रहस्य को जान नही पाता . मनुष्य तब संभलता है जब वह अपने कर्मो को समझता है उसे अहसास होता है तब जाकर वह कुछ धर्म कर्म कर अपने जीवन और अपने परिवार की स्थिति को धीरे - धीरे संभाल सकता है . इसमें उसे यह ध्यान मै रखना होता है जो कुछ भी हो रहा है और होगा सब भगवान् की कृपा से ही है लेकिन कर्म करना उसकी जिम्मेदारी कर्तव्य है . सनातम मै समस्त संसार को एक परिवार माना गया है लेकिन आज का मनुष्य अपने बीवी - बच्चो को परिवार मानता है और बाहर की दुनिया मै लुट खसूट कर अपने भाग्य को उजाड़ लेता है . इसलिए मनुष्य के कर्म सुख - दुःख मै सामान हो और सामान रूप से पक्षियों को दाना , कुत्ते को रोटी , पक्षियों को पानी , गाय को रोटी या हरा , खाग्ड़ को सानी हरा   देता रहे तो दुःख जीवन मै कभी भी नही आयेगा . अगर आपकी आर्थिक स्थिति कहती ही आप इन प्राणियों मै से किसी एक को पाल सकते है अथवा इन्हें भोजन दे सकते है तब भी यह आपकी श्रद्धा है . क्यों की यही सवर्ग है और यही नर्क है कर्मो का ही फेर है .

1 टिप्पणी:

  1. दुख में सुमिरन सब करै , सुख में करे ना कोई ।
    जो सुख में सुमिरन करै दुख काहे को होई ।।
    सिर्फ ईश्‍वर की ही नहीं .. सुख में हमें हर बात का ध्‍यान रखना चाहिए !!

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