रविवार, 6 नवंबर 2011

मीडिया के निशाने पर हरियाणा की खाप पंचायते

मित्रो सभी को मेरी नमस्कार ………..
कुछ सालो से हरियाणा मीडिया के निशाने पर है पहले हरियाणा में एक ख़ास जाती पर दलित विरोधी होने के झूठी आरोप मढे गये . याद कीजिये गोहाना काण्ड क्या भूमिका निभाई थी इस मीडिया ने ……….किस तरह से जातिवाद की आग में घी डालने का काम किया था . फिर मिर्च्पूर काण्ड दोनों ही काण्ड भारतीय मीडिया ने अपनी विशेष कवरेज में मिर्च -मसाला लगाकर दिखाए जातिवाद की भावनाओं को भडकाने के लिए हर संभव प्रयास किया गया . मीडिया और उनके आकाओं का एक ही लक्ष्य है भारत को दलित सवर्ण में बाटना ताकि लोग अधिक से अधिक हिन्दू धर्म से नफरत करे और दुसरे धर्मो को कबूल करे ……….लेकिन वह ज्यादा हद्द तक हरियाणा में जातिवाद फैलाने में कामयाब नही हुआ और न ही हरियाणा में अब तक धर्मपरिवर्तन जोरो पर है . इन दोनों खबरों को बार -बार दिखाकर मीडिया एक बात साबित करने में लगा था की हिन्दुओ में दलितों पर अत्याचार होते है लेकिन उसका मकसद यही था की हरियाणा में भी अधिक से अधिक लोगो को इसाई या मुस्लिम बनाने के लिए उनमे हिन्दू सवर्णों के पर्ती नफरत की भावना भरी जाए . लेकिन हरियाणा में उसे इस मकसद में अधिक कामयाबी नही मिली ………..अब उसने दुसरा खेल -खेला ओनर किलिंग ………….इस खेल में वह हिन्दू पंचायतो को कमजोर करने के लिए उन पर ओरत विरोधी होने के आरोप लगता है चुकी हरियाणा की पंचायते संघठित है और जहा हिन्दू लोग संघठित होते है वहा अलगावाद की स्थिति कभी उत्पन्न नही होती .वैसे तो किसी भी राज्य में एक जाती की लड़की को दूसरी जाती के लड़के से विवाह करने में उसके माता पिता हिचकिचाते है कई बार बात खून -खराबे तक भी पहुच जाती है .लेकिन इस मीडिया ने हर बार हरियाणा की पंचायतो को ही दोषी ठहराया .जब की जातिवाद को फैलाने वाली पंचायते नही बल्कि भारत की राजनीती है जो पार्टी कैंडिडेट से लेकर मंत्री ,एस पि ,इन्स्पेक्टर , हवलदार चपरासी जातीय फायदे के अनुसार चुनती है . जातिवाद को ख़त्म करना सरकार की जिम्मेदारी है लेकिन वह तो आरक्षण भी जाती देखकर देती है न की इंसान की आर्थिक दशा देखकर . जाती की भावना पैदा करने वाली तो हमारी सरकारे है जो आवेदन पत्र पर भी जाती लिखने का खाना बनाती है . अब ऐसे में पंचायतो का क्या दोष ………..जब देश के राजा ही जातिवाद को बनाये रखना चाहते हो अपने फायदे के लिए तो पंचायतो को तो उन्ही के नक़्शे कदम पर चलना ही होगा न . लेकिन इस मीडिया की हिम्मत उन लोगो से ये पूछने की तो होती नही की ये जातिवाद का खेल कब तक चलेगा बल्कि ये उन लोगो को तोड़ना चाहते है जो इस्लामिक क्त्त्रपन्थियो या इसाई मशीनरियो के मंसूबो को सफल नही होने देना चाहते . मित्रो …….यही मीडिया एक गोत्र में विवाह को जायज ठहराता है गोत्र्र यानी वंशावली जो सदियों से चली आ रही है . एक गोत्र के लड़का -लड़की यानी भाई -बहन लेकिन मीडिया और बुद्धिजीवी पता नही किस किस्म के है की भाई -बहन के विवाह को जायज मानते है . इंसान की सवतंत्रता मानते है मित्रो हमारा देश गोत्र्वाद को ज़ब भी मानता था जब भारत गुलाम था लेकिन अब तो हम आजाद है फिर क्यों अपने ही लोग भारत की संस्कृति को तोड़ने में लगे है .इसका सीधा सादा सा जवाब है ये बुद्धिजीवी ,मीडिया हिन्दू संस्कृति को तोड़ने के लिए कभी दलितों पर अत्याचार तो कभी हिन्दू धर्म में ओरतो से भेद -भाव के भद्दे आरोप लगाकर हिन्दुओ को अलग थलग करना चाहता है लेकिन जब यह इस गंदे मकसद में कामयाब नही होता  जो लोग इतना सब करने पर भी नही झुकते उन्हें पूरे भारत में बदनाम करने के लिए सब कुछ करता है चुकी यही उसके आकाओं  का आदेश है .इसी मीडिया को उस समय साप सूंघ जाता है जब कश्मीर में लडकियों के मोबाइल रखने कोलेज जाने पर पाबंदी लगाईं जाती है तब इस मीडिया और बुद्धिजीवी वर्ग को ओरतो की आजादी का ख्याल नही आता ..यही मीडिया और बुद्धिजीवी लोग उस समय कही नजर नही आते जब भारत  में लव जेहाद होता है भोली -भाली लडकियों को जल में फसाया जता है क्या यह ओरतो पर लडकियों पर अत्याचार नही .

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