सोमवार, 10 मई 2010

हिन्दू धर्म प़र ऊँगली उठाने वालो के लिये एक लेख

मेरी यह पोस्ट उन लोगो के लिये है जो लोग अक्सर हिन्दू धर्म प़र ऊँगली उठाते है और प्रतिदिन बखेड़ा खड़े करे रहते है . तभी कुछ दिनों से मै भी कुछ सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रहा था . जो मेरे ही नही हर हिन्दू के मन में भी उठते है . उन सवालों के जवाब तलाशने के लिये मै कई साधुओ के पास गया और जितनी जानकारी मै एकत्रित कर सका वह प्रस्तुत है उसके कुछ अंश .मै समझता हूँ टीवी प़र धारावाहिकों के माध्यम से हिन्दू धर्म प़र जो दुष्प्रचार किया जा रहा है वह भ्रम लोगो में फैलना कम होगा और लोग जागृत होंगे .




क्यों करते है तुलसी है पूजा =हिन्दू स्तरीय तुलसी की पूजा अपने सोभाग्य एवं वंश वृद्धि के लिये करती है . र्रमयं कथा में वर्णित एक परसंग के अनुसार राम दूत हनुमान जी जब सीता का पता लगाने गये तो वहा उन्होंने एक घर के अंगन में तुलसी का पोधा देखा जो की विभिष्ण का घर था उन्होंने तुरंत अनुमान लगा लिया की यह किसी धर्म परायण व्यक्ति का घर है अर्थात तुलसी पूजा की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है .
वज्ञानिक अर्थ  = तुलसी की पतियों में स्क्राम्क ' कितानुओ ' को मारने की अद्भुत शक्ति होती है . तुलसी एक दिव्य ओषधि का पोधा है . जुकाम खासी , मलेरिया आदि में लाभदायक है . इतना ही नही केंसर जैसी भयानक बिमारी में भी ठीक करने में लाभदायक है .
क्यों हिन्दू धर्म में मृतक की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करते है = हिन्दुओ की धार्मिक आस्था के अनुसार मृतक की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करने से मृतक की आत्मा को शान्ति मिलती है .
वज्ञानिक अर्थ = वज्ञानिक प्रिक्ष्नो से यह निष्कर्ष निकला है की अस्थियो में फास्फोरस अत्याधिक मात्रा में पायी जाती है जो खाद के रूप में भूमि को उपजाऊ बनाने में सहायक है . गंगा नदी के जल से हमारी अन्न उपजाने वाली जमीन की सिचाई होती है . जमीन की उर्वरा शक्ति बढाने में फास्फोरस सहायक है जो की गंगा के जल में अस्थिया प्रवाहित करने के कारण बहुत अधिक मात्रा में निहित है
 
आज के लिये इतना ही वक्त की कमी के कारण बाकी का लेख कल लिखा जाएगा . लेकिन इन दो बातो से भी यह प्रमाणित होता है की जिन बातो को आज रुढ़िवादी बताया जा रहा है और प्रहार किये जा रहे है वे बिलकुल निराधर है और ऋषि मुनियों ने जो परम्पराए बनाई है उनका वज्ञानिक अर्थ भी है

14 टिप्‍पणियां:

  1. बॆहद प्रभावशाली लेख !

    इस विशय मे और भी जानकारिया पाने के लिये हमार ब्लोग पर आमंत्रित है! वेदो से सम्बन्धित बातो के लिये यहा क्लिक करे !


    http://vivekanand-pandey.blogspot.com/2010/05/blog-post_01.html

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  2. विकाश जी उपयोगी जानकारी दने पर धन्यावाद व बधाई दोनों स्वीकार करें

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  4. अब तक देश के लगभग 2 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं जोकि पाक समर्थित आतंकवाद में मरने वालों की संख्या से कई गुना ज़्यादा हैं। ऐसे ही ग़रीबों-वंचितों के दिलों में निराशा और अवसाद और फिर आक्रोश पैदा होता है। समाज शस्त्र के नियम के अनुसार समस्या से ध्यान हटाने के लिए नेता लोग मनोरंजन के साधन बढ़ा देते हैं लेकिन मनोरंजन के साधन आए दिन ऐसी हिंसक फिल्में दिखाते हैं जिनमें जनता का शोषण करने वाले नेताओं की सामूहिक हत्या को समाधान के रूप में पेश किया जाता है। व्यवस्था और कानून से अपना हक़ और इन्साफ़ मिलते न देखकर हिंसा के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। इनकी समस्या के मूल में जाने के बजाय नेता लोग इसे इसलामी आतंकवाद, नक्सलवाद और राष्ट्रवाद का नाम देकर अपनी राजनीति की रोटियां सेकने लगते हैं। व्यवस्था की रक्षा में फ़ौजी मारे जाते हैं और उनके आश्रित नौकरी और पेट्रोल पम्प आदि पाने के लिए बरसों भटकते रहते हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। देश की व्यवस्था को सम्हालने वाले तो उन लोगों की भी ख़बर नहीं लेते जिन्होंने देश का 70 हज़ार करोड़ रूपया विदेशों में जमा कर रखा है लेकिन सरकार उस मध्यवर्गीय क्लर्क की सैलरी से आयकर काटना नहीं भूलती जिसे अपने बच्चों की फ़ीस देना और उनका इलाज कराना तक भारी होता जा रहा है।
    समस्याएं बहुत सी हैं लेकिन सारी समस्याओं का कारण अव्यवस्था है। यह ‘अव्यवस्था’ केवल इसलिए है कि व्यवस्था को चलाने वाले नेता और उन्हें चुनने वाली देश की जनता अधिकांशतः अपने फ़र्ज़ की अदायगी को लेकर ‘ईमानदार’ नहीं है।
    जब उनके दिल में ‘ईमान’ ही नहीं है तो ईमानदारी आयेगी भी कैसे ?
    ईमान क्या है ?
    ईमान यह है कि आदमी जान ले कि सच्चे मालिक ने उसे इस दुनिया में जो शक्ति और साधन दिए हैं उनमें उसके साथ -साथ दूसरों का भी हक़ मुक़र्रर किया है। इस हक़ को अदा करना ही उसका क़र्ज़ है। फ़र्ज़ भी मुक़र्रर है और उसे अदा करने का तरीक़ा और हद भी। जो भी आदमी इस तरीक़े से हटेगा और अपनी हद से आगे बढ़ेगा। मालिक उस पर और उस जैसों पर अपना दण्ड लागू कर देगा। इक्का दुक्का अपवाद व्यक्तियों को छोड़ दीजिए तो आज हरेक आदमी बैचेनी और दहशत में जी रहा है। हरेक को अपनी सलामती ख़तरे में नज़र आ रही है।
    सलामती केवल इस्लाम दे सकता है
    लेकिन कब ?
    सिर्फ़ तब जबकि इसे सिर्फ़ मुसलमानों का मत न समझा जाए बल्कि इसे अपने मालिक द्वारा अवतरित धर्म समझकर अपनाया जाए। इसके लिए सभी को पक्षपात और संकीर्णता से ऊपर उठना होगा और तभी हम अजेय भारत का निर्माण कर सकेंगे जो सारे विश्व को शांति और कल्याण का मार्ग दिखाएगा और सचमुच विश्व गुरू कहलायेगा।

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  5. सिर्फ इतना कहना ही काफी होगा कि लेखनी में दम है.......बधाई.
    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड के साथ ये भी कहना पड़ेगा अब तो....

    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड, जय हिंदुत्व, जय हिन्दी

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  6. प्राणीमात्र की सेवा ही सच्चा धर्म है। हर धर्म मे मानव सेवा के बारे मे विस्तार से समझाईश दी गई है। लेकिन होता ये है कि लोग उन बातों पर ज्यादा आचरण करते हैं जो एक धर्म को दूसरे धर्म से अलग प्रदर्शित करती हैं। हिन्दु,इस्लाम और क्रिश्चन धर्मों में क्या भिन्नता है लोग उसी को पकडना चाहते हैं। पाखण्ड और दिखावे से दूर रहकर सभी धर्मों के मूल सिद्धान्तों पर आचरण करना ही सच्चा धर्म है।

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  7. अस्थियो को गंगा मे प्रवाहित करने मे परेशानी होती है क्योकि हरिद्वार जाने मे धन व समय भी लगता है इसलिए अस्थियो को सीधे खाद मे मिला देना चाहिए

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  8. विकास जी मैं आपके विचारों से प्रभावित हूँ आशा करता हूँ हम फिर मिलेंगे !!

    आप मेरा ब्लॉग भी देख सकते हैं !

    http://pareesthiti.blogspot.com/

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  9. आपने बहुत सुन्दर तरीके से अपनी बात कही है जी!फिरदौस जी से भी सहमत!

    कुंवर जी,

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  10. सराहनीय लेख है...
    मज़हब इंसानों के लिए बने हैं, न कि इंसान मज़हब के लिए...
    जिस दिन हम यह समझ जाएंगे, उस दिन मज़हब के नाम पर होने वाले फ़साद भी ख़त्म हो जाएंगे...

    पिछले कमेन्ट में 'भी' की जगह 'में' लिखा गया था...

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  11. विकास भाई, नदी में शव प्रवाह के सम्बंध में आपकी जानकारी उपयोगी है। लेकिन आजकल नदियों का प्रदूषण इतना अधिक बढ गया है, क्या ऐसे में इस तरह की परम्पराओं को बदलने की आवश्यकता नहीं?
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    कौन हो सकता है चर्चित ब्लॉगर?
    पत्नियों को मिले नार्को टेस्ट का अधिकार?

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  12. jaakir ali jee
    nadi me asthiyaa prwaahit ki jati hai n ki shv or rahi baat pardushn ki to gangaa ndi gande nalo or sivr ka paani jane se maili ho sakti hai n ki asthiyo se isliye karipya lekh ko dobara padhe

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  13. फ़िरदौस ख़ान .....ne khuli mansikta ka parichay diya hai
    muslim samaj m aisi hi soch ki jarurat hai aaj .

    adhiktar log dharmik nahi dharmandh ho rahe hai .
    insan ko dharmik hona chahiye dharmandh nahi.

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