मेरी यह पोस्ट उन लोगो के लिये है जो लोग अक्सर हिन्दू धर्म प़र ऊँगली उठाते है और प्रतिदिन बखेड़ा खड़े करे रहते है . तभी कुछ दिनों से मै भी कुछ सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रहा था . जो मेरे ही नही हर हिन्दू के मन में भी उठते है . उन सवालों के जवाब तलाशने के लिये मै कई साधुओ के पास गया और जितनी जानकारी मै एकत्रित कर सका वह प्रस्तुत है उसके कुछ अंश .मै समझता हूँ टीवी प़र धारावाहिकों के माध्यम से हिन्दू धर्म प़र जो दुष्प्रचार किया जा रहा है वह भ्रम लोगो में फैलना कम होगा और लोग जागृत होंगे .
क्यों करते है तुलसी है पूजा =हिन्दू स्तरीय तुलसी की पूजा अपने सोभाग्य एवं वंश वृद्धि के लिये करती है . र्रमयं कथा में वर्णित एक परसंग के अनुसार राम दूत हनुमान जी जब सीता का पता लगाने गये तो वहा उन्होंने एक घर के अंगन में तुलसी का पोधा देखा जो की विभिष्ण का घर था उन्होंने तुरंत अनुमान लगा लिया की यह किसी धर्म परायण व्यक्ति का घर है अर्थात तुलसी पूजा की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है .
वज्ञानिक अर्थ = तुलसी की पतियों में स्क्राम्क ' कितानुओ ' को मारने की अद्भुत शक्ति होती है . तुलसी एक दिव्य ओषधि का पोधा है . जुकाम खासी , मलेरिया आदि में लाभदायक है . इतना ही नही केंसर जैसी भयानक बिमारी में भी ठीक करने में लाभदायक है .
क्यों हिन्दू धर्म में मृतक की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करते है = हिन्दुओ की धार्मिक आस्था के अनुसार मृतक की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करने से मृतक की आत्मा को शान्ति मिलती है .
वज्ञानिक अर्थ = वज्ञानिक प्रिक्ष्नो से यह निष्कर्ष निकला है की अस्थियो में फास्फोरस अत्याधिक मात्रा में पायी जाती है जो खाद के रूप में भूमि को उपजाऊ बनाने में सहायक है . गंगा नदी के जल से हमारी अन्न उपजाने वाली जमीन की सिचाई होती है . जमीन की उर्वरा शक्ति बढाने में फास्फोरस सहायक है जो की गंगा के जल में अस्थिया प्रवाहित करने के कारण बहुत अधिक मात्रा में निहित है
आज के लिये इतना ही वक्त की कमी के कारण बाकी का लेख कल लिखा जाएगा . लेकिन इन दो बातो से भी यह प्रमाणित होता है की जिन बातो को आज रुढ़िवादी बताया जा रहा है और प्रहार किये जा रहे है वे बिलकुल निराधर है और ऋषि मुनियों ने जो परम्पराए बनाई है उनका वज्ञानिक अर्थ भी है



14 टिप्पणियाँ:
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