बुधवार, 5 मई 2010

इस देश में अच्छे मुसलमानों की कोई कमी नही

एक आम मुसलमान जो मेहनत ,मजदूरी  कर अपना और अपने बच्चो का पेट पाल रहा  है  उसे दंगे प्रसादों से क्या लेना . सच में आम मुसलमान भारतीय संस्कृति में घुल मिल भी सकता है और एसे बहुत से मुसलमान है भी . लेकिन क्या कारण है वही आम मुसलमान भी दंगो की भीड़ में शामिल हो जाता है . देश के संविधान को मानने  से इनकार करने अथवा उसका विरोध करने लगता है . इसका कारण सपष्ट है और बिलकुल पारदर्शी है जो मुसलमान को एक भारतीय से पहले  एक मुसलमान बना देता है . रोज - रोज के दुष्प्रचार कभी कैसे फतवे तो कभी वैसे  जो देश हित में नही है जो देश की विचारधारा से मेल नही खाते . मुसलमानों के लिये अलग पढ़ाई इस तरह की बाटे अथवा मुद्दे जो देश का विरोध करती है यही वह चालबाजो की रणनीति है जो आम मुसलमान को भारत से अलग करती है . जिससे देशभक्त मुस्लिम की मानसिकता को भी परिवर्तित कर दिया जाता है . भारत में एसे बहुत से मुस्लिम मिल जायेंगे जो मंदिर में भी माथा टेकते होंगे लेकिन मुल्ला - मोलवी इनकी सोच में परिवर्तन कर देते है . और टकराव की स्थिति को उत्पन्न कर देते है .हिन्दू किसी भी जगह मंदिर - मस्जिद - गुरुद्वारे चर्च कही भी जा सकते है और सभी का सम्मान करते है . इसी तरह कई मुस्लिम भी भारतीय संस्कृति में घुल - मिल गये है लेकिन उन्हें यह अहसास कराया जाता है तुम अल्लाह के बन्दे हो . तभी मुस्लिम समाज पूरे विश्व में अलग - थलग पड़ता जा रहा है . मंदिर जाने  या किसी तरह की पूजा अर्चना प़र भी फतवे निकाल दिए जाता है कभी वन्दे मातरम प़र फतवे निकाले जाते है और मुस्लिम को एक अलग मानसिकता में ड़ाल दिया जाता है . और यही दंगे प्रसाद की जड़ है इसी तरह की बाटे हिन्दू - मुस्लिम एकता नही होने देती और हम खो देते है कई राष्ट्र भगत .

12 टिप्‍पणियां:

  1. शानदार लेख...
    हिंदी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा...

    जय हिन्द
    वन्दे मातरम्

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  2. महान पोस्ट
    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें और मुझे कृतार्थ करें

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  3. धर्म विशुद्ध व्यक्तिगत आस्था का प्रश्न है। वे प्रत्येक व्यक्ति की भिन्न हो सकती हैं। लेकिन सामाजिक समरसता तभी बनी रह सकती है जब हम अपनी आस्था के साथ औरों की आस्था का सम्मान करें।

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  4. जैसे फ़िरदौस जी, महफूज़ जी और मैं....

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  5. इस देश में बुरे मुसलमानों की भी कमीं नहीं हैं जैसे : मोहम्मद उमर कैरानवी, सलीम ख़ान, डॉ अनवर जमाल आदि

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  6. इदरीसी मेरी जान तू फौजिया को मत भूला कर ऐसे कहा कर फ़िरदौस जी, महफूज़ जी, फौजिया जी और मैं इदरीसी

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  7. EJAZ AHMAD IDREESI JEE
    मोहम्मद उमर कैरानवी, सलीम ख़ान, डॉ अनवर जमाल YE LOG KHUD NHI BHTKE INHE INKE AKAO NE BHTKAYAA HAI INHE SAHI MARGDARSHN MILTA TO YAH BHI EK BEHTR SOCH RAKHTE

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  8. हम आपसे पूरी तरह सहमत हैं

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  9. http://blogmadad.blogspot.com/2010/05/blog-post.html

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