रविवार, 29 जनवरी 2012

अन्ना की चापलूसी में लिप्त क्यों है मीडिया



न्यूज़ चैनल आजकल पता नही किस लफड़े में पड़ गये है जहा अन्ना वहा मीडिया . खबरे कुछ ऐसी , अन्ना कराएंगे आयुर्वेदिक इलाज़ , अन्ना कर रहे है गाव में आराम , अन्ना हजारे की तबियत बिगड़ी , अन्ना ने कहा इस देश में लोकशाही नही है , अन्ना नही करेंगे राहुल -सोनिया के घर के बाहर धरना . पता नही क्यों ये मीडिया वाले अन्ना पर मेहरबान है ? पता नही क्या दे दिया है अन्ना ने मीडिया वालो को या फिर जहा से ये सब चलते है उन लोगो को ? आम जनता को इस बात से क्या लेना देना की अन्ना अंगेजी दवाई खाए या फिर देसी , क्या बेहूदा खबर है यह .अन्ना नही देंगे राहुल -सोनिया के घर के बाहर धरना लेकिन क्यों ? ये पूछा किसी मीडिया वाले ने ? पता नही अन्ना ने मीडिया को क्या दे दिया है की मीडिया में लगातार अन्ना छाए है ? मै तो समझता हूँ हमारे मीडिया चैनल्स को अन्ना की चिंता छोड़ देश की चिंता करनी चाहिए . अन्ना हजारे की उम्र के इस देश में बजुर्ग लोग जाड़े की वजह से मर रहे है चुकी उनके पास कम्बल नही है रजाई नही है ,घर नही है , दो वक्त की रोटी नही है लेकिन ये मीडिया वाले उस अन्ना का गुणगान कर रहे है उस अन्ना को सहानुभूति दिला रहे है जिसके पीछे देश के बड़े बड़े डाक्टर है . जिस इंसान के पास सब कुछ है उसी को देशवासियों के सामने बेचारा साबित करने में लगे है ताकि कुछ छवि मीडिया की भी सुधर जाए और अन्ना को फिर से लोकप्रियता का बादशाह बना दिया जाए . लेकिन इसके पीछे की एक और चाल है जिस वजह से अन्ना का चापलूस बन गया है मीडिया बाबा रामदेव की लोकप्रियता को तोड़ना . लेकिन इन लोगो यानी हमारे मीडिया बंधुओ को इतना समझना होगा की कितनी भी चापलूसी से आप लोग अन्ना को इस देश का न हीरो बनाने की कोशिश कर लो लेकिन अब इस देश की जनता सेकुलर मीडिया और सेकुलर अन्ना के जाल में नही फसेगी .

बुधवार, 25 जनवरी 2012

क्या अब भारत इस्लामिक कट्टरपंथियों के इशारे पर चलेगा ?

सलमान रुश्दी खबरों में है कारण उनकी ( द सटेनिक वर्सेज ) विवादित किताब यही वह किताब है या फिर इसके कुछ अंश है जिसकी वजह से देश में बवाल उठ गया है . इस्लामिक कट्टरपंथी लगातार हिंसा की धमकी दे रहे है और केंद्र से लेकर राजस्थान सरकार दबाव में है इसी वजह से उनका जयपुर दोरा रद्द हुआ यहाँ तक की उनकी विडिओ कोंफ्रेसिंग भी . लेकिन एक बात मेरे और तमाम देशवासियों के मन में चल रही है की आखिर भारत सरकार इस्लामिक कट्टरपंथियों के दबाव में क्यों है ? क्या भारत सरकार वोट बैंक की निति के तहत काम कर रही है ? क्या भारत सरकार या राजस्थान सरकार रुश्दी को सुरक्षा देने में विफल है ? क्या भारत सरकार हमारे देश में किसी भी हिंसा से निपट पाने में पुलिस ,सेना को निपटने में सक्षम नही मानती ? ऐसे तमाम सवाल है मेरे मन में और तमाम देशवासियों के मन में जो भारत सरकार और राजस्थान सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते है . एक और सवाल है मेरे मन में जो शायद सबसे ज्यादा सशक्त और महत्वपूर्ण है
क्या अब भारत इस्लामिक कट्टरपंथियों के इशारे पर चलेगा? यह वह सवाल है जो शायद भारत को धीरे – धीरे ही सही तालबानी क़ानून , परम्पराओं ,संस्कृति के नजदीक ले जाता दिखता है .चुकी इस तरह के फतवे , अभिव्यक्ति की आवाज को दबाना , आजाद भारत में जायज नही है आज सलमान रुश्दी पर कट्टरपंथियों के दबाव में सरकार है कल किसी और मामले में होगी . कभी वन्दे मातरम , तो कभी ग से गणेश पर विवाद , तो कभी रेलगाड़ी के आगे शुभारम्भ पर नारियल फोड़ने पर विवाद , आखिर यह सब कब तक चलेगा कब तक दबाव सहेगी भारत सरकार ?

शनिवार, 21 जनवरी 2012

इस्लामिक धर्मगुरूओ का दोहरा रवैया

सलमान रुश्दी के भारत आने की खबर क्या चली की इस्लाम के धर्म गुरुओ ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और सरकार पुलिस भी उनके दबाव में दबती गयी कारण वोट बैंक की राजनीति . लेकिन कारण जो भी हो यहाँ एक बात गोर करने लायक है जिस तेवर से इस्लाम के धर्म गुरुओ ने सलमान रुश्दी की आवाज को दबाया है वही आवाज , वही तेवर वह आतंक को दबाने में क्यों नही लगाते ? वही तेवर वह कसाब और अफजल जैसे आतंकियों को फ़ासी पर लटकाने के लिए सरकार को क्यों नही दिखाते ? क्यों सरकार पर दबाव नही बनाते की बार -बार ला एंड ऑर्डर के नाम पर अफजल की फ़ासी की सजा को लंबा खीचना इस्लाम की , मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुचाना है ? इससे आम भारतीयों की नजर में मुसलमानों की छवि को ठेस पहुचती है क्यों नही कहते ये सब सरकार से ? जब – जब कभी तसलीमा नसरीन या फिर सलमान रुश्दी जैसे लेखक इस्लाम के कुछ मुद्दों से असहमत होते है तब – तब उनके खिलाफ फतवे निकलते है उन्हें जान से मारने की धमकिया मिलती है लेकिन जब एम् ऍफ़ हुसैन जैसे लोग जिस देश की खाते है उसी देश की संस्कृति को ठेस पहुचाते है तब इस्लामिक धर्मगुरु कहा होते है ? जब लव जेहाद का खेल सामने आता है तब कहा होते है इस्लामिक धर्म गुरु ? आखिर क्यों मुसलमानों को नही समझाते की गौ वध हिन्दुओ की धार्मिक भावनाओं का अपमान है ? आखिर क्यों त्योहारों पर गौ वध या गौ बलि पर प्रतिबंध नही लगवाते ? आखिर क्यों काश्मीर में तिरंगा न फहराने देने का विरोध का करते , आखिर क्यों कर्नाटक के ईदगाह मैदान में तिरंगा न फहराने देने का विरोध करते ? आखिर क्यों धर्म आधारित आरक्षण का विरोध नही करते ? आखिर क्यों आर्थिक आरक्षण की वकालत नही करते ? अकेले सलमान रश्दी का विरोध , तसलीमा नसरीन का विरोध करके वह इस्लाम की छवि को सुधार सकते है ? क्या किसी की अभिव्यक्ति को दबाकर इस्लाम को चार चाँद लग सकते है ? आखिर चाहते क्या है इस्लामिक धर्म गुरु क्या यह उनका दोहरा रवैया नही है जो केवल इस्लाम , इस्लाम और केवल इस्लाम पर ही उन्हें  इन्साफ नाइंसाफी की याद दिलाता है भले ही कानून को ताक पर क्यों न रखना पड़े ?

क्या है चुनावी मुद्दा जन्लोपाल ,काला धन या फिर ...अपनी जात

वह घडी नजदीक है जिस घडी का सभी को इंतज़ार था खासतोर पर उन प्रदेशो की जनता को जहा यह चुनाव होने है . चुनावों से बहुत पहले से ही हमारे देश में भर्ष्टाचार और काला धन एक मुद्दा था लोग इन्ही मुद्दों से तंग आकर सडको पर निकले थे . यह देश की युवा पीढ़ी ने पहली बार देखा था की कोई गैर राजनैतिक संगठन इतने बड़े आन्दोलन की अगुवाई कर रहा था . पहले बाबा रामदेव बाद में टीम अन्ना दोनों ने ही भर्ष्टाचार के मुद्दे पर देश को जागरूक किया . लेकिन दोनों ही आन्दोलन सरकार ने विफल कर दिए लेकिन इस बात से इनकार नही किया जा सकता की भारत की जनता के मन में भर्ष्टाचार और विदेश में पड़े लाखो करोड़ रुपयों को लेकर गुस्सा है और वह चाहती है की देश में भ्रष्टाचार न हो काला धन वापस आये . लेकिन भारत में जैसे जैसे चुनाव करीब आते है वैसे – वैसे राजनीतिग्य अपने -अपने दाव चलने लगते है कोई मुफ्त शिक्षा के नाम पर , कोई साइकल के नाम पर , तो कोई मुफ्त कम्प्यूटर के नाम आम जनता के वोट अपनी झोली में लाना चाहता है . लेकिन राजनेताओं का असली तुरुप का पत्ता सिद्ध होता है जातीय फैक्टर यह वह फैक्टर है जो आपको जीत का मन्त्र देता है . उम्मीदवार चाहे कितना भी दागी हो ह्त्या के उस पर आरोप हो लूट -मार उसका पेशा हो भार्श्त्चार के कितने ही आरोप उस पर लगे हो लेकिन उसकी जीत तब लगभग सुनिश्चित हो जाती है जब उसकी जाती का उस क्षेत्र में दब -दबा हो जहा से वह चुनाव लड़ रहा होता है . तब यह मुद्दे कही गुम से हो जाते है सुशासन , सवच्छ शासन , भ्रष्ट मुक्त शासन , काला धन , जन्लोक्पाल और तब देशभक्ति की भावना भी जाती के प्रभाव के निचे कही दब जाती है देश प्रदेश के नेता फिर से अन्ना या बाबा रामदेव जैसे भ्रष्टाचार से लड़ने वाले नायको को ठेंगा दिखाकर कुर्सी हतियाने में कामयाब हो जाते है ,फिर से वही भ्रष्टाचारी ,लूटपाट के आरोपी , बलात्कार के आरोपी हमारे सिस्टम का एक हिस्सा बन जाते है .किसी को कैबिनेट में जगह तो किसी को मुख्य संसदीय सचिव जैसे पद दे दिए जाते है और पूरे पांच साल तक वही लोग देश या प्रदेश की जनता को खून के आंसू रुलाते है . अपने यार – दोस्त , रिश्तेदारों को गुंडा गर्दी का खुला लाइसेंस इन्ही लोगो की वजह से ही मिलता है . इस बार के विधान सभा के चुनावों में भी कुछ एसा ही है अन्ना और बाबा रामदेव की मेहनत पर पानी फेरने का मन लगभग सभी राजनातिक दलों ने बना लिया है और वह उसी फार्मूले को अपना आधार बना कर चुनाव लड़ रहे है जिसे वह पहले आधार बना कर चुनाव लड़ते आये है राजनीति में जातिवाद अथवा जाती की राजनीति . वह फिर से देशवासियों , प्रदेशवासियों को राजपूतो , ब्राह्मणों , जाटो , दलितों , मुस्लिमो के नाम पर बाटने में लगे है .उनका लक्ष्य एक ही है मात्र सत्ता…. किसी भी कीमत पर . जिस क्षेत्र में राजपूत अधिक है वहा राजपूतो को टिकेट मिलेगी , जहा जाट अधिक है वहा जाटो को और जहा दलित अधिक है वहा दलितों को और जिस क्षेत्र में मुस्लिम अधिक है वहा मुस्लिमो को . जनता भी एक बार फिर जातीय भावनाओं में बहकर उसे ही वोट देगी जो उसकी जाती धर्म से ताल्लुक रखता है चाहे वह कितना ही बड़ा अपराधी क्यों न हो . बेशक से उनका गाव ,शहर , राज्य पिछड़ता रहे लूट अपराध का बोल -बाला प्रदेश में चलता रहे . चुकी राजनीति में जातिवाद भारत में एक कडवी सच्चाई है और यही सच्चाई राजनातिक दल समझते है तभी हर उम्मीदवार जाती के गुना भाग से तय होता है और हर बार मतदाता उन्हें वोट देकर सत्ता सोपकर पछताता है चुकी हर बार योग्यता , इमानदारी ,सवच्छ छवि पर भारी पड़ती है ………अपनी जाती

गुरुवार, 19 जनवरी 2012

हिन्दू संघठन साधू संत हिन्दू समाज में बदलाव करे

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हिन्दू संघठन साधू संत हिन्दू समाज में बदलाव करे

पोस्टेड ओन: 20 Jan, 2012 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में
आज जिस तरह से हिन्दुओ को दलित ,राजपूत , ब्राह्मण , बनिया , पंजाबी ,मराठी , जाट के नाम पर बाटा जा रहा है . जिस तरह से दलितों को हिन्दू से अलग दिखाने , राजपूतो को सर्व्नो से अलग दिखाने , सवर्णों को हिन्दू से अलग दिखाने . हिन्दू धर्म के रीती -रिवाज ,कर्म – काँडो को ढोंगी ,दकियानूसी बताने , हिन्दू त्योहारों को अंधविश्वास बताने , हिन्दुओ को ओरत विरोधी समाज बताने का प्रयास किया जा रहा है उससे निपटने के लिए हिन्दू संघठनो को कुछ जरुरी उपाय तेज़ी से करने होंगे नही तो हिन्दू समाज बुरी तरह से टूट जाएगा और भारत फिर से विभाजन का दंश झेलने को मजबूर होगा और हिन्दू जाती का भारी नुक्सान होगा .इसलिए आर एस एस , वि एच पि , बजरंग दल और साधू संत हिन्दुओ को संघठित करने के लिए यह जरुरी बदलाव करे .
१ हिन्दू मरीज एक्ट में बदलाव के लिए शांतिपूर्वक आन्दोलन – आज जिस तरह से हिन्दुओ को तलाक लेने में समय लगता है तलाक की कारवाई किस कद्र लम्बी चलती है यह इस बात से जाना जा सकता है की एक इंसान की आधी उम्र तक गुजर जाती है तलाक लेने दोबारा घर बसाने में जब की अन्य धर्म जैसे इस्लाम में इतना समय नही लगता इस वजह से कुछ लोग हिन्दू धर्म को न चाहते हुए भी त्याग देते है अथवा धर्म परिवर्तन कर लेते है . इस तरह की समस्या से निपटने के लिए सभी हिन्दू संघठन , साधू संत देश की जनता को एक मंच पर लेकर आये और कोई शांति पूर्वक आन्दोलन चला कर इस एक्ट में बदलाव के लिए आवाज उठाये
२ जिस तरह से सरकार मुस्लिमो को आरक्षण दे रही है उससे न सिर्फ दलित हिन्दुओ में अपितु सर्वण हिन्दुओ में भी नाराजगी है अतः इससे बेहतर मोका हिन्दुओ को संघठित करने का उन्हें जागरूक करने का नही हो सकता लेकिन इसमें किसी एक पार्टी एक दल का योगदान काफी नही है इसलिए देश के हर देशभक्त साधू संत , को इसमें अपना योगदान देना होगा
३ जहा जहा हिन्दू असंतुष्ट है अथवा जिस भी राज्य क्षेत्र में उन्हें अब तक हिन्दू संघठन दल या किसी राजनैतिक दल में महत्व पूर्ण पद नही मिला है वहा , वहा उन्हें संतुष्ट करने उन्हें अपने साथ लेने की कोशिश तेज़ी से हो .
४ अंतरजातीय विवाह – अंतरजातीय विवाह में जिस तरह से लड़ाई जह्ग्दे होते है उनका विरोध किया जाये और हिन्दू समाज को यह समझाया जाए की आखिर यह जातिवाद हमें गुलामिकाल में ही मिला है न की जातिवाद हिन्दुओ में शुरू से फैला हुआ है ताकि विदेशी पैसे से हिन्दुओ का धर्म परिवर्तन न हो सके और अंतरजातीय विवाहों का स्वागत किया जाये जिससे हिन्दुओ का आपसी रिश्ता कायम हो सके और उंच नीच जातिवाद की दीवार को तोड़ा जा सके .
५ गुरु बाल्मिक ,रविदास जी की जयंती न सिर्फ धूमधाम से मनाई जाए बल्कि उसमे हिन्दू संघठनो के भी बड़े पदाधिकारी ,कार्यकर्ता का भी सहयोग हो ताकि समाज जातिवाद से उपर उठे .
५ गुरु बाल्मिक ,रविदास जी की जयंती न सिर्फ धूमधाम से मनाई जाए बल्कि उसमे हिन्दू संघठनो के भी बड़े पदाधिकारी ,कार्यकर्ता का भी सहयोग हो ताकि समाज जातिवाद से उपर उठे .
६ हिन्दू त्योहारों होली , दिवाली , कुम्भ , का धार्मिक महत्व ही नही वज्ञानिक दृष्टि से महत्व भी समझाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी को चर्च पोषित मीडिया इस भरम में न डाल पाए की हिन्दू त्यौहार अंधविश्वास है रुढ़िवादी है .
७ वर्त त्योहारों का महत्व सम्ज्झाया जाए और यह भी समझाया जाए की कर्वाचोथ , रक्षाबंधन नारी के सम्मान के लिए है न की उसे प्रताड़ना देने के लिए चुकी आजकल हिन्दुओ को ओरत विरोधी बताने का परचार तेज़ी से हो रहा है .

बुधवार, 18 जनवरी 2012

बाबा रामदेव जी टीम अन्ना से सावधान

मित्रो , अब फिर से अन्ना टीम उस जहाज की सवारी करने को बेकरार है जिस जहाज ने उसे सम्पूर्ण भारत का हीरो बनने का मोका दिया .लेकिन उसी जहाज को टीम ने हाइजैक करने काम भी किया और उस जहाज की दिशा को तो न मोड़ पाए लेकिन देश की दशा को जरुर तोड़ -मोड़ दिया . लेकिन हर बनावटी चीज़ का अंत होता है सो अन्ना हजारे और उनकी लोकप्रियता का भी अंत हो गया . लेकिन अन्ना की टीम है की लगातार सुर्खियों में बने रहना चाहती है और वह फिर से उसी जहाज पर बैठने की कोशिशो में लगी है जी हां वह जहाज है बाबा रामदेव जिनकी चरण वंदना करके टीम अन्ना उनके मंच पर पहुची और देश को खुद का चहरा दिखाया और बाबा की लड़ाई को कमजोर किया और देश को एक जन्लोक्पाल पर लटकाया . उसका नतीज़ा यह हुआ की यह देश आज त्राहिमाम -त्राहिमाम कर रहा है .लेकिन इतना सब करके भी लगता है टीम अन्ना का मन नही भरा उसे इस बात का कोई अहसास नही लगता की देश के साथ उन्होंने गलत किया उन्हें तो बस खुद फिर से एक हीरो बनाना है जनता की नजरो में . तभी तो ठीक उस समय वे लोग बाबा रामदेव जी का हाथ थामने उनके मंच पर चढ़ने के लिए बेकरार है जिस समय बाबा की स्वाभिमान यात्रा की पूरे देश में धूम है और बाबा फिर से एक नायक की तरह उबर रहे है लेकिन यह एन जी ओ मण्डली पता नही इसे क्या भय सता रहा है की फिर से बाबा के आन्दोलन में घुसपैठ करना चाहती है . लेकिन अपनी तो बाबा रामदेव जी को एक ही सलाह है की इस बाबा गलती न करे चुकी उनकी एक गलती की सज़ा उन्हें और इस देश क भुगतनी पड़ सकती है इसलिए बाबा इनका समर्थन बेशक ले लेकिन इन्हें मंच पर एक हीरो न बन्ने दे इन्हें भी आम आदमी की तरह मंच से नीचे ही बैठाया जाए ताकि आन्दोलन को इसी प्रकार का कोई नुक्सान न हो नही तो पता नही कल को फिर से ये लोग जन्लोक्पाल के मुद्दे या फिर किसी और मुद्दे पर देश की जनता को गुमराह करे और देश का भत्ता बिठाये .

मंगलवार, 10 जनवरी 2012

किस हक़ से हिन्दुओ के वोट मांगते हो ?

मित्रो जब भी चुनाव आते है तभी ये सभी राजनैतिक पार्टिया मुस्लिमो को पटाने में लग जाती है सभी पार्टिया ऐसी तुष्टिकर्ण पर उतारू हो जाती है की हिन्दुओ के हित मारने लगती है उनके हक़ छिनने लगती है . जहा एक और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों में होड़ लगी है मुस्लिमो को आरक्षण देने की वही होड़ लगी है हिन्दुओ के हको को मारने की . कोई साढ़े चार पर्तिशत आरक्षण देता है तो कोई नो पर्तिशत की घोषणा करता है और कोई अठारह पर्तिशत आरक्षण देने की वकालत करता है . लेकिन इस सारे आरक्षण की राजनीति के खेल में आम हिन्दू का हक़ छिना जा रहा है चुकी यह आरक्षण अनुसूचित जातियों के कोटे में से ही दिया जा रहा है .पहले हमारे प्रधानमंत्री जी ये खुले आम कह चुके है की देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का है .ये सभी लोग सत्ता की सीधी तक हिन्दुओ के वोटो से ही पहुचते है जैसे मुलायम सिंह यादव वोट बैंक , मायावती दलित वोटबैंक और अन्य हिन्दू वोट , कोंग्रेस ,सभी हिन्दुओ के वोट तो मांगते है पर हिन्दुओ के वोटो के सहारे सता में आकर हिन्दुओ की अनदेखी करते है उन्हें आतंकी कहते है उनके धर्म को अपमानित करते है ,शहीदों का अपमान करते है , यदि कोई हिन्दू दंगे में मारा जाय तो ये ऐसे नाक सिकोड़ लेते है जैसे कोई आतंकी मारा गया है लेकिन मुस्लिम पर कुछ भी आंच आ जाए तो ये लोग आसमान को सर पर उठा लेते है . जैसे इन्हें हिन्दू शब्द , हिन्दू संस्कृति से ही नफरत हो जैसे इनका एकमात्र लक्ष्य हिन्दुओ को कमजोर करना हो . फिर किसलिए ये लोग हिन्दुओ के वोट मांगते है जब की इनका लक्ष्य मुसलमानों को अधिक से अधिक सब्सिडी देना , हिन्दू के टैक्स से मदरसे बनवाना , अधिक से अधिक मुसलमानों को सुविधाए देना क़ानून के तहत. आखिर किस हक़ से ये हिन्दुओ के वोट मांगते है जब की इन्हें हिन्दुओ को किसी किस्म का कोई लाभ देने की कोई इच्छा ही नही है .

सोमवार, 9 जनवरी 2012

धर्मपरिवर्तन पीठ में चुरा घोपने के सामान

कल मै बोर्डर फिल्म देख रहा था फोजियो की ज़िन्दगी को जानने और देशप्रेम की भावना को जगाने के लिए बहुत ही सुंदर तरीके से इस फिल्म का निर्माण किया गया है . इस फिल्म को देखने के बाद पता लगता है की कैसे हमारे सैनिक बर्फ में तपतपाती रेत में रहकर देश की रक्षा करते है . खुद की जान की भी फ़िक्र न कर धरती माँ के लिए शहीद हो जाते है लेकिन मेरे मन में एक ख्याल एक दर्द उस फिल्म को देखते -दखते लगातार चल रहा था की फोजी लोग अपनी जान पर खेल रहे है लेकिन नेता लोग देश में ही अलगावाद की परिस्थितियों को जन्म दे रहे है लगातार वोट बैंक की निति के चलते धर्मपरिवर्तन को बढ़ावा दे रहे है , एक नहीं कई विभाजनो की नीव इस देश में डाल रहे है . एक फोजी अपनी धरती माँ के लिए लड़ रहा है लेकिन पीछे से उसी के घर को ही कमजोर करने की साज़िश रची जा रही है . एक फोजी इस्लामिक जेहादियों से लड़ रहा है और दूसरी और ये नेता मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष में रखने के लिए लगातार हिन्दू स्वाभिमान पर चोट कर रहे है उसे आतंकी बता रहे है . जो लोग जबरन धर्मपरिवर्तन करा रहे है या फिर बहला फुसला कर धर्मपरिवर्तन करवाने में लगे है जिनका मकसद इस देश को इस्लामिक रंग में रंगना है उन लोगो का साथ दे रहे है मुझे लगा की ये उनकी शहादत का अपमान है यह पीठ में चुरा घोपने जैसा है . यह ठीक उसी प्रकार है जैसे युद्ध में किसी देश की सेना से न जीत पाना लेकिन उस देश में धर्म परिवर्तन कर अपनी एक सेना बनाना और फिर गरहयुद्ध दंगो का माहोल तैयार करना उसी देश के लोगो अपने ही देश के खिलाफ लडवाना उस देश की संस्कृति सभ्यता को नष्ट करना और फिर उस देश को भी इस्लामिक मुल्को की लिस्ट में लाना . फिर मेरे मन में एक सवाल उठा की फिर क्यों हमारे सैनिको को बेवकूफ बनाया जा रहा है जब किसी न किसी तरीके से हमारे देश के नेता चाहते ही है की यह देश इस्लामिक मुल्क बन जाए तो फिर क्यों देश को बेवकूफ बनाया जा रहा है आतंक से लड़ाई लड़ने के नाम पर . जब की पाकिस्तान या आइएसाइ का काम तो इस देश में धर्मान्त्र्ण के जरिये जारी है ही इस देश को इस्लामिक रंग में रंगने की तैयारी तो हमारे नेता रच ही रहे है उधर सैनिक अपनी जान गवा रहे है और इधर धर्म के नाम पर पीठ में छुरा घोपा जा रहा है और जगह जगह विभाजन की नीव डाली जा रही है जेहाद के लिए भारत की धरती भारत के लोगो को ही तैयार किया जा रहा है .

हरयाणा में बीजेपी की स्थिति कैसे ठीक हो

राष्ट्रीय पार्टी का दावा करने वाली भाजपा क्यों हरयाणा में दहाई का आकड़ा भी नही छु पाती क्यों बार -बार इसे किसी साथी की तलाश रहती  है इन सभी बातो का जवाब तलाशेंगे हम अपने इस लेख में .

जातीय सम्मिकर्ण में कमजोर - इस बात में  कोई दो राय नही है की हरयाणा  चुनाव में जीत जातीय सम्मिक्र्ण तय करते है कोंग्रेस और इनेलो दोनों ही पार्टिया जाटो पर टिकी है और सत्ता सुख भी जाट वोटरों के सहारे भोगती आई है वही पुराने कोंग्रेसी भजनलाल नॉन जाट नेता रहे है इसी परम्परा पर चलकर कुलदीप ने भी नॉन जाटो को रिझाया है एसे में अब सवाल है की बीजेपी कहा है है और क्या कर रही है .भाजपा की पकड अब तक न तो जाटो में मजबूत है और न ही दलितों में ....३० % पंजाबियों को लेकर और ब्राह्मण बनिया को लेकर बीजेपी एक मजबूत स्थिति मे. आ सकती है लेकिन वह एसा नही कर रही और विफलता उसका हर चुनाव में साथ नही छोडती .
व्यापारियों के मुद्दे न उठाना - बेशक से भाजपा पर व्यापारियों की पार्टी होने के आरोप लगे लेकिन हरयाणा में यह पार्टी व्यापारियों को भी साथ नही ले पा रही है हांसी ,हिसार ,गुडगाव में जब व्यापरियों के साथ  कुछ घटनाएं हुई तब भी यह पार्टी खुद को व्यापारियों का हमदर्द साबित नही कर पायी . एसे में ओम परकाश चोटाला ने इन सभी घटनाओं मुद्दों को उठाया और ओमपर्काश चोटाला समय समय पर व्यापरी सम्मलेन भी कर रहे है और साथ ही साथ पंजाबी वोटरों को लुभाने के लिए उनके पास अध्यक्ष पद पर अशोक अरोड़ा भी है जिनकी धीरे धीरे ही सही पंजाबियों में पैठ बढ़ रही है . भाजपा ने पंजाबियों को अपने पक्ष में लेने का बेहतरीन मोका तब अपनी हाथ से निकाल दिया जब अखिल भारतीय पंचनद समिति जिसके पंजाब केसरी के सम्पादक अश्विनी कुमार अध्यक्ष है को सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन नही दिया भाजपा पंजाबियों का समर्थन अब भी पा सकती है यदि वह अखिल भारतीय पंचनद समिति की कुछेक मांगे मान ले और पंजाबियों को उनका जायज हक़ देने का समर्थन करे.


बुधवार, 4 जनवरी 2012

देश को बर्बाद करने वाले महान संत है अन्ना हजारे ?

एक शख्स तीन -तीन बार अनशन करे और उसका मुदा तीनो बार एक ही हो जन्लोक्पाल ………तीनो ही बार उसे भारी जनसमर्थन मिले जनता कहे की मै भी अन्ना तू भी अन्ना . लेकिन तीनो ही बार वह इंसान माफ़ी चाहता हूँ महात्मा (फ़कीर ) उस लड़ाई को अंजाम तक पहुचाने से पहले ही मंच से भाग खड़ा हो . वह कैसे है महात्मा ? जो इंसान युवाओं में जोश जगाये सभी मुद्दों से ध्यान हटाकर एक जन्लोक्पाल पर सभी को लटकाए और हर बार यह कहे की मै तीन तीन मंत्री का विकेट लिया , ये दूसरी आजादी की लड़ाई है , लेकिन जब जब जनता अपने वाली पर आर या पार के मूढ़ में आये तो वह डॉक्टर्स की सलाह मानकर अनशन तोड़ दे तो वह कैसा महात्मा कैसा फ़कीर ? कहने का मतलब यह है ये दूसरी आजादी की लड़ाई थी जैसा की अन्ना बार -बार कह रहे थे तो जाहिर सी बात है की इस आन्दोलन से देश की उम्मीदे जुडी थी . वह हर तबका जुड़ा था जिस पर आरोप लगते थे की यह देशभक्त नही है . फिर भी इतने बड़े आन्दोलन को अन्ना ने खुद को हीरो बनाने के चक्कर में केवल खुद तक ही सिमित रखा और रामलीला मैदान और मुंबई में अपनी सेहत के कारण बीच में ही छोड़ दिया .
तीनो बार जनता ने विशवास किया लेकिन अन्ना ने आन्दोलन नाम को ही देशभक्ति नाम को शर्मिन्दा कर के रख दिया एसे में अन्ना को देश को बर्बाद करने वाला महान संत कहा जाए तो गलत नही होगा . इस आन्दोलन को अन्ना और उनकी मडली सफल होने ही नही देना चाहती थी. इसी कर्म में टीम अन्ना और खुद अन्ना महान आत्मा पर सवाल उठते है जिनका जवाब अब मीडिया से भागने वाले और देश को धोखा देने वाले अन्ना को देना ही होगा या फिर बेदी ,सिसोदिया ,केजरीवाल को देना ही होगा .
१ लगभग चार बार अन्ना ने अनशन किया क्या वह खुद को एक महात्मा स्थपित करना चाहते थे ?
२ क्या इतने बड़े आन्दोलन जिससे की पूरा देश जुड़ चुका हो किसी एक व्यक्ति की तबियत खराब होने की वजह से उसे बीच में छोड़ना जायज है ?
३ क्या कोई आन्दोलन केवल अनशन पर टीक सकता है ?
४ क्या अन्ना की बाद मंच को उखाड़ना जरूरी था मेरा मतलब जिस प्रकार बाकि देश में हजारो लोग अनशन पर थे अपने -अपने गाव शहर …क्या उसी प्रकार केजरीवाल ,बेदी अनशन करके इस मुहीम को नही चला सकते थे ?
५ क्या अन्ना और उनकी टीम को पहले से ही मालूम नही था की अनशन में तबियत बिगड़ना संभावित सी बात है क्या इस तरह सेहत की नाम पर आन्दोलन को रद्द करना जायज था ?
६ सबसे बड़ा सवाल क्या अब इस देश की जनता किसी सच्चे आन्दोलन का साथ देगी जो देशहित में होगा चुकी वह अन्ना के आन्दोलन से धोखा झेल चुकी है क्या अब उसमे अगले किसी आन्दोलन का साथ देने का साहस पैदा होगा ?

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

फर्जी या मनगढ़ंत नही है हिन्दू शब्द

कई बार मन में सवाल उठता है की हम वाकई हिन्दू है ? खासतोर से तब से जब से मैंने ब्लोगिंग आरम्भ की है कई इस प्रकार के वायरस आपको मिलेंगे ब्लागस्पाट या फिर और वेबसाइट्स पर जो आपको एक बार तो अपनी टिप्पणियों अपने लेखो के द्वारा यह सोचने पर मजबूर कर ही देंगे की आखिर हम हमारी पहचान क्या है जो हिन्दू शब्द पर ही सीधे ऊँगली उठा कर हिन्दू अस्मिता पर ठेस पहुचाएंगे . जो सोचने पर मजबूर कर देंगे की आखिर सनातम धर्मी है क्या ? सच मानिए आज देश में एक बरहम फैलाने की कोशिश हो रही है की हम हिन्दू नही है तो ऐसे में मेरे मन के घोड़े भी मेरी आत्मा की लगाम से भागने लगे मेरे मन में भी कई प्रश्न उठे की आखिर हम खुद को कहे तो क्या कहे . तब मैंने सोचा की कुछ न कुछ एसा खोजा जाए की हिन्दू शब्द की उत्पत्ति का पता लग सके और यह भी पता लग सके की हिन्दू शब्द एक मनगढ़ंत है या फिर यह विश्व की सबसे प्राचीन सबसे महान जाती का नाम है . तभी मुझे कुछ आकडे मिले जो चीख -चीख कर कहते है की हिन्दू शब्द और जाती कोई फर्जी जाती नही है मै वही आकडे आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ .
हिंदू शब्द भारतीय विद्दवानो के अनुसार कम से कम ४००० वर्ष पुराना है।
शब्द कल्पद्रुम : जो कि लगभग दूसरी शताब्दी में रचित है ,में मन्त्र है………….
“हीनं दुष्यति इतिहिंदू जाती विशेष:”
अर्थात हीन कर्म का त्याग करने वाले को हिंदू कहते है।
इसी प्रकार अदभुत कोष में मन्त्र आता है…………………….
“हिंदू: हिन्दुश्च प्रसिद्धौ दुशतानाम च विघर्षने”।
अर्थात हिंदू और हिंदु दोनों शब्द दुष्टों को नष्ट करने वाले अर्थ में प्रसिद्द है।
वृद्ध स्म्रति (छठी शताब्दी)में मन्त्र है,………………………
हीनं दुष्यति इतिहिंदू जाती विशेष:” अर्थात हीन कर्म का त्याग करने वाले को हिंदू कहते है।
इसी प्रकार अदभुत कोष में मन्त्र आता है…………………….
“हिंदू: हिन्दुश्च प्रसिद्धौ दुशतानाम च विघर्षने”।
अर्थात हिंदू और हिंदु दोनों शब्द दुष्टों को नष्ट करने वाले अर्थ में प्रसिद्द है।
वृद्ध स्म्रति (छठी शताब्दी)में मन्त्र है,………………………
हिंसया दूयते यश्च सदाचरण तत्पर:।
वेद्………हिंदु मुख शब्द भाक्। ”
अर्थात जो सदाचारी वैदिक मार्ग पर चलने वाला, हिंसा से दुख मानने वाला है, वह हिंदु है।
ब्रहस्पति आगम (समय ज्ञात नही) में श्लोक है,…………………………..
“हिमालय समारभ्य यवाद इंदु सरोवं।
तं देव निर्वितं देशम हिंदुस्थानम प्रच्क्षेत ।
अर्थात हिमालय पर्वत से लेकर इंदु(हिंद) महासागर तक देव पुरुषों द्बारा निर्मित इस छेत्र को हिन्दुस्थान कहते है।
पारसी समाज के एक अत्यन्त प्राचीन ग्रन्थ में लिखा है कि,
“अक्नुम बिरह्मने व्यास नाम आज हिंद आमद बस दाना कि काल चुना नस्त”।
अर्थात व्यास नमक एक ब्र्हामन हिंद से आया जिसके बराबर कोई अक्लमंद नही था।
इस्लाम के पैगेम्बर मोहम्मद साहब से भी १७०० वर्ष पुर्व लबि बिन अख्ताब बिना तुर्फा नाम के एक कवि अरब में पैदा हुए। उन्होंने अपने एक ग्रन्थ में लिखा है,……………………….
“अया मुबार्केल अरज यू शैये नोहा मिलन हिन्दे।
व अरादाक्ल्लाह मन्योंज्जेल जिकर्तुं॥
अर्थात हे हिंद कि पुन्य भूमि! तू धन्य है,क्योंकि ईश्वर ने अपने ज्ञान के लिए तुझे चुना है।
१० वीं शताब्दी के महाकवि वेन …..अटल नगर अजमेर,अटल हिंदव अस्थानं ।
महाकवि चन्द्र बरदाई………………..जब हिंदू दल जोर छुए छूती मेरे धार भ्रम ।
जैसे हजारो तथ्य चीख-चीख कर कहते है की हिंदू शब्द हजारों-हजारों वर्ष पुराना है।
इन हजारों तथ्यों के अलावा भी लाखों तथ्य इस्लाम के लूटेरों ने तक्ष शिला व नालंदा जैसे विश्व -विद्यालयों को नष्ट करके समाप्त कर दिए। नोट =http://kranti4people.com/article.php?aid=2207&cid=#651
इसलिए मेरा सभी ब्लोगर्स से अनुरोध है कि वे किसी अध्यन हीन व बुद्धि हीन व्यक्ति की ग़लत जानकारी को सच न माने।हिंदू धर्म की बुराई करो और अपने को हिंदू कहो ,ऐसा करने से कोई हिंदू नही बन जाता।

इस्लामिक कट्टरपंथ से निपटने के उपाय

आज जिस तेज़ी से इस्लामिक कट्टरपंथ बढ़ रहा है जिस तरह से मुसलमानों को काफिरों (अन्य धर्मो ) के प्रति बरगलाया जा रहा है उससे निपटने के इंतज़ाम भारत की जनता को करने होंगे नही तो इस देश में जगह -जगह हर प्रान्त हर गाव शहर में काश्मीर जैसी स्थिति उत्पन्न हो जायेगी और गैर मुसलमानों का रहना अत्यंत कठिन हो जाएगा . कुछ उपाय है जो भारत की जनता सवयम संघठित होकर करे तो  धर्मंत्र्ण की समस्या से भी निजात पायी जा सकती है और हिंदुत्व की रक्षा भी हो सकती है .
१ जागरूक ब्लोग्गर सम्मलेन हो जिसमे धर्मान्त्र्ण के मुद्दे पर आम जनता में जाग्रति लाइ जाए
२ हिन्दुओ में स्वाभिमान जगाया जाए जिससे हिन्दू अपनी संस्कृति से जुड़े और भारत माता की रक्षा के लिए आगे आये
३ हर शहर हर गाव में १ रुपया हर घर से प्रतिदिन लेकर गौशालाए बनाई जाए और जो दूध घी उनसे प्राप्त हो उसे गरीब परिवार में  दलित हो या सर्वण में निशुल्क बाता  (वितरित)किया जाए  
४ जिस तरह से अन्ना के आन्दोलन में लोग मोमबत्तिया और बैनर लेकर लोग सडको पर आये थे ठीक उसी तरह से धर्मान्त्र्ण  के खिलाफ धर्मान्त्र्ण को पर्तिबंध करने के लिए लोग सरकार से मांग करे लेकिन अहिंसा से
५  जातिवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए गुरु बाल्मिक , रविदास गुरु जी जयंती धूमधाम से सर्वण लोग मनाये
६ भारतीय शिक्षा के प्रचार के लिए अधिक से अधिक गुरुकूल खोलने में सहयोग दिया जाए ताकि भारतीय शिक्षा और संस्कार भारत के लोगो भारत की जनता में जीवित रहे
७ किसी भी गलत फिल्म जो की असभ्य हो या फिर  कोमेडी सर्कस जैसे रीअल शो की तरह हो का विरोध अहिंसा से किया जाए ताकि भारत की जनता इन गाली गलोच वाले असभ्य सीरियल्स को न देखे
मेरा विशवास है की यदि भारत की जनता ब्लोग्गर्स , बुद्धिजीवी ,देशभक्त जिसे अपने देश की जरा सी भी फ़िक्र है वह लोग संघठित होकर इनमे से एक -एक कार्य भी कर ले तो भारत में धर्मंत्र्ण जैसी समस्या से निपटा जा सकता है और भारत को फिर से उन्नति की और ले जाया जा सकता है . 

सोमवार, 2 जनवरी 2012

अन्ना और उनकी मण्डली बाबा रामदेव का साथ दे

मित्रो जिस समय अन्ना ने आन्दोलन किया तो कुछ लोगो ने ये गलत फहमी पाल ली की ये आदमी महात्मा है  . ये भगवान है जैसे करिकेट का भगवान सचिन है  , बोलीवूद का भगवान् अमिताभ बच्चन है , वैसे ही अन्ना भी भगवान है इस देश का  . तीन -तीन बार अनशन करने और देशवासियों से मोमबत्तिया जग्वाने के बाद भी नतीज़ा वाही ढाक के तीन पात .  लेकिन मित्रो सच्चाई तो यह है की भर्ष्टाचार के मुद्दे पर बाबा रामदेव जी ने अपनी सालो की तपस्या से इस देश में अलख जगाई है . लेकिन रातो -रात मीडिया ने अन्ना हजारे को भगवान बना कर रख दिया और देश की जनता का ध्यान काले धन से हटकर अन्ना के गुणगान में लगा दिया लेकिन फिर भी देश के नागरिको को एक उम्मीद बंधी की अन्ना और उनकी मंडल इस देश में जन्लोक्पाल पास कराकर रहेंगे . लेकिनन पात है . मित्रो अन्ना हजारे और उनकी मदली ने देश को बेवकूफ बनाने के सिवा कुछ नही किया जिस समय यह देश कला धन मांग रहा था ठीक उसी समय ये लोग जन्लोक्पाल मांगने लगे . देश का ध्यान सम्पूर्ण मुद्दों से हटाकर एक जन्लोक्पाल पर अटका दिया गया . पहले अनशन में इन लोगो ने जीत के ढोल पीट दिए लेकिन इनके हाथ उस समय कुछ भी नही लगा था फिर इन लोगो के परती जब देश की जनता जागरूक होने लगी तब ये हिसार विरोध को निकल पड़े और जब इनकी वहा भी आलोचना हुई तो भी इन्होने खुद को मीडिया में बनाए रखा . अब इन्ही लोगो ने और सवयम अन्ना हजारे जी ने बड़े लम्बे छोड़े भाषण दिए की हम जेल भर देंगे लाठिया खाएंगे लेकिन जब अनशन का समय आया तो इन्हें दिल्ली की सर्द हवाओं से डर लगने लगा और ये भाग खड़े हुए मुंबई में . कभी केजरीवाल साहब गये खुद को धर्मनिरपेक्ष साबित करने उलेमाओं के पास इस्लामिक टोपी भी पहनी और संघ से दूरी भी बनाई . लेकिन भीड़ नही जुट पायी ये लोग बीच में ही अनशन छोड़ कर आ गये जेल भरने का भी प्रोग्राम कैंसिल . इसलिए अब इन लोगो को चाहिए की ये देश के लोगो को बेवकूफ न बनाये और बाबा रामदेव का साथ दे खुद को हीरो की तरह पेश   करने के चक्कर में ये लोग पहले ही देश का ध्यान असल मुद्दों से भटका चुके है .
                          

रविवार, 1 जनवरी 2012

मुस्लिम आरक्षण बहुत कुछ बदलेगा

मित्रो जिस तरह से मुस्लिम आरक्षण इस देश में लागू हुआ उससे तो लग रहा है की अब बहुत कुछ इस देश में बदलेगा . मान लीजिये किसी शहर  की दूरी एक शहर से दुसरे शहर अस्सी किलोमीटर है तो आने वाले सालो में उसका भी प्रवधान होगा  . जैसे उसके ५० किलोमीटर दायरे में जो जगह है वह मुस्लिम के लिए अरक्षित होगी , बीस किलोमीटर की जो दूरी है या जो गाव बीच में होंगे वह इसाइयों के लिए . बाकी बचा बीस किलोमीटर का जो गाव बीच में आयेंगे वहा भी ९५   पर्तिशत दलितों के लिए जमीन अरक्षित होगी . जो पांच पर्तिशत जगह होगी वह सर्व्नो के लिए . मतलब अब इस देश में परिवर्तन होने वाला है . कुछ सालो के बाद इस देश में हिन्दू समुदाय जो की अब बहुसंख्यक है वह अल्पसंख्यक दर्जे में शामिल होने के लिए आन्दोलन करेगा . मंत्री संत्री सभी अल्पसंख्यक ही होंगे . बात अब एक जगह अत्केगी वह होगा प्रधान मंत्री का पद . चलिए उसका भी जुगाड़ हो जाएगा देश का प्रधानमंत्री किसी मुस्लिम समाज से होगा चुकी सबसे अधिक जनसंख्या उसी की होगी . इसाई समाज का राष्ट्रपति होगा . बाकी छोटे मोटे पद या फिर बड़े पद होंगे मुसलमानों और इसाइयों के पास कुछेक एक बचे खुचे पदों पर दलित समाज और सवर्ण समाज कहा होगा इसकी वयवस्था अभी सूझ नही रही है .