शनिवार, 13 फरवरी 2010
अमन की आशा '''''''' fuuuuuuuuuusssssssssssss '
२६ - ११ के बाद एक बार फिर से भारत प़र बड़ा हमला हुआ है इस बार निशाने प़र सिर्फ और सिर्फ भारत ही था . कई न्यूज़ चैनल कहते है यहूदियों का पूजा सथल निशाना था लेकिन पूजा सथल किसी और देश में नही भारत में ही तो था . कुछ विदेशियों को आतंकियों का निशाना बताते है लेकिन वह भी तो भारत में हमारे मेहमान ही है . कुछ ही दिन पहले आतंकियों ने बड़ी रैली की लाहोर में जिसमे खुलम - खुल्ला भारत प़र हमले की चेतावनी दी गयी थी . और हुआ भी वैसा ही . और इसी बीच निकली एक आशा ' अमन की आशा ' . और तुरंत ही फूस साबित भी हो गयी होना ही था . पाक के साथ दोस्ती अथवा मधुर सम्बन्ध ठीक उसी तरह है किसी पागल कुत्ते के गले में रस्सी बांधकर उससे लाड प्यार करने के बराबर . क्यों की पाक की हालात भी उसी पागल की तरह है जिसे हम कितना भी प्यार दे वह हमे काटेगा ही . उसका हमारे हरियाणा में तो एक ही इलाज़ होता है ' लठो से पीटकर मारना ' . ठीक है हम लोग दयालु है लेकिन दया की हद्द हो गयी है अब क्या हमने मार खाने का ठेका ले रखा है . होना तो ये चाहिए की पाक हमारे पैरो में गिरकर माफ़ी मांगे लेकिन जो हो रहा है वह दुनिया की नजर में हमे कमजोर साबित कर रहा है . हम इतिहास से सिख भले ले अथवा नही वर्तमान से तो सिख ले . पाक प़र हमें सिर्फ और सिर्फ हमला करना चाहिए ' आर या पार ' . कोई बात नही केवल हमला बारूद का जवाब बारूद से हर एक जख्म का जवाब देना चाहिए . कोई आशा की तरंग नही फूटनी चाहिए ' इनफ इज इनफ
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4 टिप्पणियाँ:
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