शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

टीम अन्ना यानी बिन तली का लोटा

दोस्तों , जिस बात का डर था वही हुआ बिन तली का लोटा टीम अन्ना ने वो कर ही दिया जिसकी उससे उम्मीद थी ! जब पहली बार टीम अन्ना के मुखिया अन्ना हजारे ने अनशन लीला रची थी उस समय छाती ठोककर कहा था की हम राजनीति में नही आयेंगे और ये भी कहा था की जब तक लोकपाल नही आयेगा हम अनशन से नही उठेंगे ! पहली बार में janlokpaal तो आया नही उलटे अपने वादे से मुकरी यही टीम अन्ना के मुखिया अनशन से बगैर बिल पास करवाए ही देश में थाली बजवा दिए और देश में खुद को महात्मा भी कहलवा दिए ! अब इनकी तिकड़ी ने नो दिन का अनशन किया है और ये भी अनशन तोड़ रहे हैं पहले ये लोग दावे कर रहे थे प्राण जाए लेकिन अनशन नही तोड़ेंगे राजनीति में नही आयेंगे ! लेकिन नो दिन और पहले के तेरह दिन और मीडिया के सहयोग से हीरो बने महात्मा बने अन्ना हीरो बनी टीम अन्ना अब राजनीति में आ ही रही है ! दोस्तों ….जब से इस टीम अन्ना का जन्म अचानक से हुआ है मै तो तब से लिखता आ रहा हूँ की इस टीम के मंसूबे बड़े ही खतरनाक है , मत बजाओ अन्ना इस देश का बाजा , ! दोस्तों देश का बाजा ये टीम बजा कर रहेगी चुकी इस टीम का मकसद है देश पर सेकूल्रिज्म को बढ़ावा देना और इसके सदस्य भी हाई फाई ब्रांड के सेकुलर है एक है की मुसलमानों की भीड़ खीचने के लिए इस्लामिक टोपी पहनता है और दुसरा अफजल का केस लड़ता है और एक है की माओवादियों की मध्यस्थता करता है कश्मीर पर बयानबाजिया करता है जहा तक खुद महात्मा जी का सवाल है तो वो भी कम नही है भारत माता के चित्र उसकी आँखों के सामने हटा कर राष्ट्र के पिता के चित्र लगाये जाते हैं लेकिन उसे कोई आपत्ति नही होती ! दोस्तों ,,,,,,,इस टीम ने बड़ा ही शातिराना ढंग से हिन्दुत्त्व को कमजोर करने के कोशिशि की है सबसे पहले तो इसने देशभक्तों की भीड़ जुटाई उनके दिलो में जगह बनाई और फिर संघ को गरियाया भी और बाबा रामदेव के आन्दोलन के धार को भी कमजोर किया ! आज हालात यह है की लोगो की आँखों में धुल झोक्कर ये टीम अन्ना राजनीती की गंगा को और मैला करने चली है और बीजेपी के वोट काटने के जुगाड़ में लगी है ! मेरा तो सभी देशवासियों से विनती है की इस टीम अन्ना की चाल में न फसे चुकी ये देश कब का अमेरिकी कठपुतली बना हुआ है और ये नई टीम ( ऑह सॉरी ) राजनैतिक पार्टी भी अमेरिका की कठपुतली है इससे जितना सावधान हुआ जाये हो लो और लोगो को भी सावधान करो क्या पता कल को यह बिन तली की लोटा टीम किस बात से मुकर जाए और समझोतावादी साबित हो जाए !

3 टिप्‍पणियां:

  1. bailkul sahi kaha mere bhai, saale chor hain.

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  2. (1)
    राहुल की खातिर करे, रस्ता अन्ना टीम ।
    टीम-टाम होता ख़तम, जागे नीम हकीम ।

    जागे नीम-हकीम, दवा भ्रष्टों को दे दी ।
    पॉलिटिक्स की थीम, जलाए लंका भेदी ।

    ग्यारह प्रतिशत वोट, काट कर अन्ना शातिर ।
    एन डी ए को चोट, लगाएं राहुल खातिर ।।

    (2)
    माथा भन्नाता विकट, हजम करारी हार |
    छाया सन्नाटा अटल, तम्बू-टेंट उखार |

    तम्बू-टेंट उखार, खार खाए थी सत्ता |
    हफ़्तों का उपवास, हिला न कोई पत्ता |

    कांगरेस की जीत, निरंकुश उसे बनाए |
    राजनीति की दौड़, अगर अन्ना लगवाये ||

    (3)
    कुलबुलाय कीड़ा-कपट, बेईमान इंसान ।
    झूठ स्वयं से बोल के, छोड़ हटे मैदान |

    छोड़ हटे मैदान, डटे थे बड़े शान से |
    बार बार आमरण, निकाले खड्ग म्यान से |

    अनशन अब बदनाम, महात्मा गांधी अन्ना |
    खड्ग सिंह विश्वास, टूटता मिटी तमन्ना |

    (4)
    राष्ट्र कार्य करने चले, किन्तु मृत्यु भय साथ |
    लगा नहीं सकते गले, फिर ओखल क्यूँ माथ ?

    फिर ओखल क्यूँ माथ, माथ पर हम बैठाए |
    देते पूरा साथ, हाथ हर समय बढाए |

    आन्दोलन की मौत, निराशा घर घर छाई |
    लोकपाल की करें, आज सब पूर्ण विदाई ||

    (5)

    वोटर भकुवा क्या करे, वोटर जाति-परस्त ।
    बिरादरी को वोट दे, हो जाता है मस्त ।

    हो जाता है मस्त, पार्टी मुखिया अपना ।
    या फिर कंडीडेट, जाति का देखे सपना ।

    चले लीक को छोड़, हिकारत भरी निगाहें ।
    इसीलिए हैं कठिन, यहाँ सत्ता की राहें ।।

    (6)

    यादव-मुस्लिम की सपा, धता रही बतलाय ।
    कहे राम गोपाल जी, अन्ना टीम जताय।

    अन्ना टीम जताय, जमानत बच न पाए ।
    अपना कंडीडेट, अगर अन्ना लडवाए |

    किन्तु सफा इक बात, वोट अच्छा वह काटे |
    बड़े विपक्षी वोट, यहाँ कांग्रेस हित बांटे ||

    (7)

    गिरगिटान कश्मीर पर, दिखलाये निज रंग ।
    देखो अन्ना टीम का, बदला बदला ढंग ।

    बदला बदला ढंग, चुकाया बढ़िया बदला ।
    चोला बदले छद्म, बना के सबको पगला ।

    भाजप राजद शरद, सपा तृण-मूल खलेगा ।
    बासठ शठ दल खड़े, तिर-शठ वां भी छलेगा ।

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  3. इकसठ सठ सेठा भये, इक सठ आये और |
    वा-सठ सड़-सठ गिन रहे, लेकिन करिए गौर |

    लेकिन करिए गौर, चौर की चर्चा चालू |
    रखिये निज सिर मौर, दौर चालू जब टालू |

    लाखों भरे विभेद, चुनौती बहुत बड़ी है |
    दुर्जन रहे खरेद, व्यवस्था सड़ी पड़ी है ||

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