गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

खाने में सुधार लाये बच्चो के सुनहरे भविष्य के लिये जागरूक हो



भारत मै शहर तेज़ी से बढ़ रहे है और उसी तेज़ी से खानपान भी बदल रहा है . खानपान महज़ स्वाद का मुदा बनकर रह गया है चाहे स्वाद के लिये स्वास्थ्य से समझोता ही क्यों न करना पड़े . एसा खानपान स्वाद की वजह भारतीयों को कायल तो बना रहा है लेकिन हड्डियों मै कमजोरी पैदा कर रहा है . शहर हो या गाव अब तो हर जगह ही यह प्रचलन चल निकला है . घी , दूध , दही , ताज़ा मखन खाने वाले लोग आइसक्रीम खाने प़र बड़ा ही गर्व अनुभव करते है . आज से लगभग १० साल पहले तक हरियाणा में सुबह का नाश्ता लह्स्सी घी और बाजरे के रोट और चटनी हुआ करते थे लेकिन अब चाए ब्रेड या बिस्कुट . जेम , ब्रेड टोस्ट और भी पता नही कितने पदार्थ सवाद से भरपूर . जो केवल स्वाद देते है और यही आदत आगे चलकर मजबूरी का रूप धारण करती है .लेकिन माँ बाप इसे मजबूरी बनाने में अहम भूमिका निभा रहे है आखिर क्यों . जो खाना शारीर को लगता नही है वही अपने बच्चो को खिलाया जा रहा है बच्चो के साथ कैसा खिलवाड़ है यह . एसा करने वाले दो तरह के माँ - बाप है १ वह जिन्हें सुबह दफ्तर जाना होता है और एक वह जिन्हें अमीरों के चोचले करने होते है या जो सुबह प्राथी आलू की गोभी की या दही जमाने में आलस बरतते है और अपना समय बच्चो में न देकर अपने जीवन का लुत्फ़ उठाते है . लेकिन आगे चलकर यह खाना बच्चो को उनकी हडियो को विकसित नही होने देता और उनकी हड्डिया चुने की तरह हो जाती है जो मजबूत नही होती .और व्यक्ति समय से पहले बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है . जिससे की मानसिक संतुलन और शारीरक संतुलन बिगड़ सकता है आज कल खान पान में बहुत अधिक परिवर्तन आ गया है जो भारतीयों को बीमारियों की और ले जा रहा है . लेकिन माँ - बाप सही खुराक अपने बच्चो को दे तो वह भी एक बेहतर जीवन जी सकते है . अगर आपका बच्चा १० से १२ साल का है तो आप उससे केवल अच्छा पढने की ही उपेक्षा न करे उसके शारीर प़र भी ध्यान . बाजारों के चटर - पटर से बचाए और अपने पैसो को सही इस्तेमाल करे . अगर १६ से १८ साल की उम्र आपके बच्चे की है तो आप उसे कम से कम  १ ग्लास जूस रोजाना पिलाए . और बर्ह्म्चार का पालन कराए सुबह ४ या चाह बजे उठाकर आप उसे दोडाये . शुरुआत १ किलो मित्र से करे बाद में धीरे - धीरे बढाकर इसे आप चार किलो मित्र तक ले जाए . जिन बच्चो का स्पोर्ट्स में मन लगता है उन्हें १६ साल से रेस शुरू कर देनी चाहिए . स्पोर्ट्स में कारीअर भी है और नाम भी यश , पैसा सभी कुछ . लेकिन इस सब के लिये माँ - बाप के मार्गदर्शन की जरूरत होती है .  यह सब सवच्छ  भोजन से ही हो सकता है

2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी प्रस्तुती मानवता पे आधारित सार्थक विवेचना के लिए धन्यवाद / वैकल्पिक मिडिया के रूप में ब्लॉग और ब्लोगर के बारे में आपका क्या ख्याल है ? मैं आपको अपने ब्लॉग पर संसद में दो महीने सिर्फ जनता को प्रश्न पूछने के लिए ,आरक्षित होना चाहिए ,विषय पर अपने बहुमूल्य विचार कम से कम १०० शब्दों में रखने के लिए आमंत्रित करता हूँ / उम्दा देश हित के विचारों को सम्मानित करने की भी वयवस्था है / आशा है आप अपने विचार जरूर व्यक्त करेंगें /

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