सोमवार, 11 जनवरी 2010

क्या इसे एक अछि खबर मानकर इसका स्वागत किया जाये

प्रोपर्टी बाज़ार में छा  गयी है मासूमी . कुछ माह पहले जो जमीन २००० रूपए गज रातो रत बिक जाती थी उसे अब कोई ८००  सो रूपए गज नही खरीद रहा . प्रोपर्टी डीलरों  ने पिछले कई सालो से खूब चाँदी कुटी . लाखो रूपए कामके ख़ुद को साधन सम्पन्न किया . प्रोपर्टी डीलरों ने एसा ताना बना बुना की आम आदमी  के बस से पर हो गया था पलट या किसी भी तरह की जमीन लेना . एक और प्राणी था जिसकी जमीन से सोना दे रही थी जमीदार . कुछ जमीदारों ने खेती को छोड़ प्रोपर्टी का धंधा  शुरू कर दिया था . लेकिन अब सभी मायूस है लेकिन एक आदमी है जो इस खेल को देखकर मन को तोड़ कर बैठा रहा . वह था आम आदमी जिसे घर बनाने के लिए जमीन चाहिए थी लेकिन महंगी जमीन को वह खरीद नही सकता . प्रोपर्टी में मंदी छाने से घर का सपना साकार होगा . क्या वह घर बना सकेगा अगर जमीन के भाव असमान न चुक्र जमीन पर आये तो घर का सपना साकार हो सकता है तो क्या इसे एक अछि खबर मानकर इसका स्वागत किया जाये

2 टिप्‍पणियां:

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