शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

मोल्वियो को आगे आना होगा कट्टरता कम करने के लिए

भारत में मुसलमान सबसे ज्यादा सुरक्षित भी है और सम्मान के साथ जीते भी है . पश्चिमी देशो से ज्यादा सम्मान मुसलमानों को भारत में मिला है लेकिन यह बात मुसलमान समझ नही पा रहे है . इन बातो को बहुत ही सरलता पूर्वक समझा जा सकता है . अभी हाल ही में स्विज़ेरलैंड की घटना गोर करने लायक है क्यों की भारत में एसा कभी भी नही हुआ और एक और घटना  शाहरुख़ के साथ घटी जिसमे उनकी चेकिंग की गयी इसलिए की उनके नाम के पीछे खान था . और वह घटना कैसे भुलाई जा सकती है जब एक भारतीय डॉक्टर प़र आस्ट्रलिया में आरोप लगे थे . कदम कदम प़र मुसलमानों को पश्चिमी देश में बदनाम किया जाता है . भारत में मुसलमानों का इतिहास लगभग २५० सालो का है लेकिन अब भी बहुत सी शिकायते है जिनमे से कुछ जायज कुछ नाजायज़ है .आजादी के समय मुस्लिम जनसंख्या २०% थी इस दोरान मुसलमानों को कई उचे उचे पद मिले लेकिन कट्टरता फिर भी बनी रही . कभी किसी कट्टरपंथी ने फतवा निकाला तो कभी किसी मोलवी ने . अगर मोलवी लोग हक़ के लिए फतवे निकालते है तो उन्हें बढ़ रही जनसंख्या प़र भी कोई फ़तवा निकलना चाहिए .  ३ ,३ शादियों से अपने समाज को जागरूक करना  चाहिए . मोलवी लोग गणेश पूजा प़र फतवे निकलते है तब तो उन्हें अपने धर्म में फैली कुछ बुराइयों  को भी दूर करना चाहिए अगर सच में आम मुसलमान का हित चाहते है तो उन्हें मुसलमानों को शिक्षा के प्रति भी जागरूक करना चाहिए . हर समय शिकायत तो की जाये और कट्टरता के बीज बो दिए जाये लेकिन समाधान न किया जाये कहा की इंसानियत हुई . कट्टरता को कम करने का पाठ भी पढ़ाया जा सकता है . मैंने अपनी जिन्दगी में एसे मुसलमानों को भी देखा है जिन्हें अपने कम से मतलब है और एसे मुसलमानों को भी जिन्हें केवल कट्टरता फैलानी आती है . लेकिन बुराई के साथ अच्छाई भी बह जाती है लेकिन बड़े लोगो का कर्तव्य बनता है बुराई को अच्छाई में तब्दील किया जाये 

4 टिप्‍पणियां:

  1. जनाब भारत में हमारा इतिहास 250 साल का है पढकर हैरत होती है, अजमेर वाली दरगाह पर कई साल पहले 786 वां उर्स मनाया गया, मुस्लिम बादशाहों की जन्‍म तिथियां देख लेते तो भी बहुत कुछ समझ में आजाता, मैं 35 साल की उम्र में कोई ऐसा मुसलमान न देखा जिसने 3 शादी कर रखी हों, आपको तो यह भी नहीं पता होगा केवल इस्‍लाम एक शादी को प्रेरित करता है,
    फतवों के नाम पर कुछ गडबडी है परन्‍तु उसमें सुधार हुआ है, अब किसी के नाम से फतवा अर्थात धार्मिक राय नही दी जाती, बढती जनसंख्‍या पर सरकारी रिपोर्टें बताती हैं सब ठीक-ठाक है

    कटटरता धर्म निरपेक्ष देश में वाकई दोष है इसे दूर किया जाना चाहिये,

    आगे बहस करने के लिए साईबर मौलानाओ से बातें किजिये
    hamarianjuman.blogspot.com

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  2. Mohammed Umar Kairanvi
    sahb dhrmic rai ka jeeta jagta namuna to abhi vande matrm par hi diya tha or jahaa tak jansnkhya ka swal hai kuch ek padhe likho ko chod diya jaye to kabhi haryana ka nuh ilaka dekhiyega

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  3. कृष्णगोपालजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जीवन समर्पित प्रचारकों की टोली से जुड़े यशस्वी और मेधावी प्रचारक हैं। वनस्पति विज्ञान में शोध करने के उपरांत उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रकार्य के लिए अर्पित किया। संप्रति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजनानुसार वह पूर्वोत्तर भारत के क्षेत्र प्रचारक का दायित्व निर्वाह कर रहे हैं। व्यक्तिरूप से वे गहन जिज्ञासु और अध्यावसायी हैं। स्वदेशी, डंकेल प्रस्तावों पर उन्होंने करीब 15 वर्ष पूर्व विचारपूर्वक अनेक पुस्तकों का लेखन किया। कालांतर में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन पर अत्यंत सारगर्भित पुस्तक की रचना की। वर्तमान लेखमाला उनके द्वारा लिखित पुस्तक भारत की संत परंपरा पर आधारित है, यद्यपि इसमें कुछ नए आयाम भी उन्होंने जोड़े हैं।

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  4. मोल्वियो को आगे आना होगा कट्टरता कम करने के लिए , per wo aage nahi aayege kyoki jo dharmik kataarpar hai uo islam ki bonyadi cheez hai, isi se perrit hokar tamor lung, babar, mugal vans ke anek rajao ni hindu par julm kiye, jab kuran mai likha hai ki kaphiro ko maar do unki doolat loot lo to maise molvi kase ye baat kaha de,

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