गुरुवार, 19 जनवरी 2012

हिन्दू संघठन साधू संत हिन्दू समाज में बदलाव करे

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हिन्दू संघठन साधू संत हिन्दू समाज में बदलाव करे

पोस्टेड ओन: 20 Jan, 2012 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में
आज जिस तरह से हिन्दुओ को दलित ,राजपूत , ब्राह्मण , बनिया , पंजाबी ,मराठी , जाट के नाम पर बाटा जा रहा है . जिस तरह से दलितों को हिन्दू से अलग दिखाने , राजपूतो को सर्व्नो से अलग दिखाने , सवर्णों को हिन्दू से अलग दिखाने . हिन्दू धर्म के रीती -रिवाज ,कर्म – काँडो को ढोंगी ,दकियानूसी बताने , हिन्दू त्योहारों को अंधविश्वास बताने , हिन्दुओ को ओरत विरोधी समाज बताने का प्रयास किया जा रहा है उससे निपटने के लिए हिन्दू संघठनो को कुछ जरुरी उपाय तेज़ी से करने होंगे नही तो हिन्दू समाज बुरी तरह से टूट जाएगा और भारत फिर से विभाजन का दंश झेलने को मजबूर होगा और हिन्दू जाती का भारी नुक्सान होगा .इसलिए आर एस एस , वि एच पि , बजरंग दल और साधू संत हिन्दुओ को संघठित करने के लिए यह जरुरी बदलाव करे .
१ हिन्दू मरीज एक्ट में बदलाव के लिए शांतिपूर्वक आन्दोलन – आज जिस तरह से हिन्दुओ को तलाक लेने में समय लगता है तलाक की कारवाई किस कद्र लम्बी चलती है यह इस बात से जाना जा सकता है की एक इंसान की आधी उम्र तक गुजर जाती है तलाक लेने दोबारा घर बसाने में जब की अन्य धर्म जैसे इस्लाम में इतना समय नही लगता इस वजह से कुछ लोग हिन्दू धर्म को न चाहते हुए भी त्याग देते है अथवा धर्म परिवर्तन कर लेते है . इस तरह की समस्या से निपटने के लिए सभी हिन्दू संघठन , साधू संत देश की जनता को एक मंच पर लेकर आये और कोई शांति पूर्वक आन्दोलन चला कर इस एक्ट में बदलाव के लिए आवाज उठाये
२ जिस तरह से सरकार मुस्लिमो को आरक्षण दे रही है उससे न सिर्फ दलित हिन्दुओ में अपितु सर्वण हिन्दुओ में भी नाराजगी है अतः इससे बेहतर मोका हिन्दुओ को संघठित करने का उन्हें जागरूक करने का नही हो सकता लेकिन इसमें किसी एक पार्टी एक दल का योगदान काफी नही है इसलिए देश के हर देशभक्त साधू संत , को इसमें अपना योगदान देना होगा
३ जहा जहा हिन्दू असंतुष्ट है अथवा जिस भी राज्य क्षेत्र में उन्हें अब तक हिन्दू संघठन दल या किसी राजनैतिक दल में महत्व पूर्ण पद नही मिला है वहा , वहा उन्हें संतुष्ट करने उन्हें अपने साथ लेने की कोशिश तेज़ी से हो .
४ अंतरजातीय विवाह – अंतरजातीय विवाह में जिस तरह से लड़ाई जह्ग्दे होते है उनका विरोध किया जाये और हिन्दू समाज को यह समझाया जाए की आखिर यह जातिवाद हमें गुलामिकाल में ही मिला है न की जातिवाद हिन्दुओ में शुरू से फैला हुआ है ताकि विदेशी पैसे से हिन्दुओ का धर्म परिवर्तन न हो सके और अंतरजातीय विवाहों का स्वागत किया जाये जिससे हिन्दुओ का आपसी रिश्ता कायम हो सके और उंच नीच जातिवाद की दीवार को तोड़ा जा सके .
५ गुरु बाल्मिक ,रविदास जी की जयंती न सिर्फ धूमधाम से मनाई जाए बल्कि उसमे हिन्दू संघठनो के भी बड़े पदाधिकारी ,कार्यकर्ता का भी सहयोग हो ताकि समाज जातिवाद से उपर उठे .
५ गुरु बाल्मिक ,रविदास जी की जयंती न सिर्फ धूमधाम से मनाई जाए बल्कि उसमे हिन्दू संघठनो के भी बड़े पदाधिकारी ,कार्यकर्ता का भी सहयोग हो ताकि समाज जातिवाद से उपर उठे .
६ हिन्दू त्योहारों होली , दिवाली , कुम्भ , का धार्मिक महत्व ही नही वज्ञानिक दृष्टि से महत्व भी समझाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी को चर्च पोषित मीडिया इस भरम में न डाल पाए की हिन्दू त्यौहार अंधविश्वास है रुढ़िवादी है .
७ वर्त त्योहारों का महत्व सम्ज्झाया जाए और यह भी समझाया जाए की कर्वाचोथ , रक्षाबंधन नारी के सम्मान के लिए है न की उसे प्रताड़ना देने के लिए चुकी आजकल हिन्दुओ को ओरत विरोधी बताने का परचार तेज़ी से हो रहा है .

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