शनिवार, 5 दिसंबर 2009

भारत की अपनी पहचान हो

भारत के राष्ट्रीय खेल कबड्डी कुश्ती और हाकी की अनदेखी की जाती रही है । और जो विदेशी खेल है उन्हें सरंखो पर बठाया jata रहा है । वसे खेल ही नही हर चीज़ जो भारत संस्कृती से जुड़ी है उसे भारतीय समाज भूलता जा रहा है । जैसे भारतीय भाषा कपड़े और खाना भी फास्टफूड हो गया । लेकिन बात खेलो की । कुश्ती भारत का प्राचीन खेल रहा है । राजे महाराजो से कुश्ती और कबड्डी चलती आ रही है । लेकिन आज देश के कुछेक कस्बो और गावो को छोड़ दिया जाए तो कुश्ती और कब्बड्डी न के बराबर है । हर जगह सिर्फ़ क्रिकेट ही जनून है । शायद इसमे पैसा ज्यादा है इसलिए । में क्रिकेट या फूटबल किसी भी खेल के खिलाफ नही हूँ । लेकिन हर भारतीय की तरह मेरा भी एक ही सपना है । भारत की ख़ुद की पहचान हो । जैसे आज पूरा विशव योग का कायल है कोई एक खेल हो जो भारतीय गर्व से कह सके ये हमने दिया है विश्व को
वसे भारत ने भोत कुछ दिया है विश्व को । दुनिया की तमाम किताबे भारतीय वेदों से ही बनी है । और दुनिया की सभी भाषाओ की जननी संस्कृत है । आज भी संस्कृत सबसे सम्मानीय भाषा है । एसा ही कुछ खेलो में नाम कमाया जाए तो में समझता हूँ भारत को खेलो में एक अलग पहचान मिलेगी ।

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