बुधवार, 13 अक्तूबर 2010

इस धारावहिक की सभी घटनाये काल्पनिक है ?

इस धारावहिक की सभी घटनाये काल्पनिक है ? इनका वास्तविक जीवन से कोई सम्बन्ध नही है हम ओरतो प़र हो रहे अत्याचारों का विरोध करते है?  ये लेने  आपको हर रोज टीवी चैनल्स प़र दिखाई सुनाई देती होंगी . एक ओरत है अम्मा जी जो नही चाहती गाव में लड़की पैदा हो तभी तो वह उसे गिरा देती है अथवा लड़की की माँ को जान से मरवा देती है . वाह भई वाह क्या कहानी है . लाल टिका लगाये माला पहने लोग उन ओरतो के पीछे दोड़ते है जिनके पेट में लड़की हो . जैसे उन्हें और कोई काम ही नही है ? दस दस पहलवान एक ओरत के पीछे पड़े है क्यों की वह  एक बच्ची को जन्म देने वाली है . आखिर एसा कोन सा गाव है जहा की मुखिया का काम केवल इतना है लड़की को पैदा न होने देना ? क्या अपने कोई एसा गाव देखा या सूना जहा लड़की ही नही हो . क्या आपने  एसे गुंडों की फोज़ देखि जो सभी तरह की गुंडागर्दी छोड़ दबंगई  छोड़ एक ओरत के पीछे पड़े है वह भी इसलिए की उस ओरत की कोख में एक बच्ची है . आजकल टीवी चैनल मनोरंजन कम  और जहर ज्यादा फैला रहे है ओरत और मर्द के बीच एक एसी खाई उत्पन्न की जा रही है जिसे शायद भरना कुछ सालो में नामुनकिन होगा .देश में तमाम तरह की बुराइया है परन्तु उन्हें यही एक बुराई नज़र आती है . लेकिन इसमें जितना मसाला लगाकर पेश किया जा रहा है वह सब  पारिवारिक बुनियाद को तो हिला ही रहा है साथ ही भारत के घर घर में नफरत के विस्फोट पैदा कर रहा है . आखिर इस तरह के एक्सपेरिमेंट्स सस्ती टी आर पी के लिये होते है  .  यह एक विशेष समाज प़र निशाना भी होता है उस समाज को जलील करने के लिये वाह समाज है देश का बहुसंख्यक समाज .हिन्दू समाज को जलील करने का कोई मोका टीवी चैनल्स नही छोड़ना चाहते इसीलिए तो विलेन के कोस्तुम भी भारतीय संस्कृति के होते है जिससे भारतीय संस्कृति को बदनाम किया जा सके . मै इनसे पूछना चाहता हूँ कोन सा वह धर्म है जिसमे बच्चियों के पाँव धोये जाते है उनका माता कहकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है . कोन सा धर्म है जिसने स्त्री को पूरे जगत की माँ मना है . किस धर्म में धरती को माता इश्वर को माता कहा जाता है . इन सभी बातो के जवाब ये जानते है परन्तु इन्हें हिन्दू समाज के घर घर में नफरत का बीज बोना है और उसमे हिन्दू समाज को सड़ता हुआ देखना इनका उदेश्य है

1 टिप्पणी:

  1. आपका प्रश्न सोचने वाला है।
    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (15/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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