शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

बोलीवूड में जमकर तुष्टिकर्ण

कुछ साल पहले एक फिल्म बनी नाम था उसका गदर एक प्रेमकथा . इस फिल्म को मै भारतीय समाज के लिये मत्वपूर्ण मानता हूँ चुकी इस फिल्म ने एक तरफ उन हिन्दुओ का दर्द दिखाया जिन्हें मत्परिवार्त्न होने की वजह से अपना देश छोड़ना पड़ा  . एक बहुत ही सपष्ट बात इस फिल्म में कही गयी एक डाएलोग के जरिये ' आखिर पाकिस्तान निकला तो भारत में से ही है , बाप बाप होता है और बेटा बेटा . यह वह बात है जो शायद हमारे नेता नही कह सकते . एक फिल्म और है जिसे मै देखता हूँ तो आँसू निकलते है नाम है बोर्डर . इस फिल्म में कारगिल की लड़ाई दिखाई गयी है इस फिल्म में देशभक्ति के डएलोग है , जोश है . लेकिन अब की फिल्मे देखता हूँ तो लगता है आने वाले दिनों में इस देश के लोग देशभक्त काम या फिर न के बराबर होंगे क्यों की दिमाघ अब सेक्स की तरफ बढ़ रहा है . युवाओं की गलती नही है किन्तु फिल्म बनाने वालो की है . फिल्मे बनती है माई नेम इज खान , एक खान की अमेरिका में चैकिंग हो तो पूरे वर्ड को कपडे फाड़ कर दिखाओ . लेकिन जब हिन्दुस्तानी को जबरन अपने ही देश से अपने गाव , शहर से निकाला जाए तब कोई बोलने तक को तैयार नही होता . अपने लोगो अपने देश को भूल अमेरिका में खामिया धुनधने चले ये लोग भारत के मूल निवासियों की समस्याओं को मुह चिडाते नजर आते है .आज इस देश में हिन्दुओ को भाईचारे ,अहिंसा के बड़े बड़े पाठ पढाये जाते है लेकिन जिन लोगो को पाठ पढ़ाने की जरुरत है  उन्हें  कोन से पाठ पढाये जाते है ?

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