शनिवार, 23 अक्तूबर 2010

आतंकी के घर आतंकी पैदा होना ही हमारा दुर्भागया

यह एक पुरानी कहावत है राक्षस के घर राक्षस और सज्जन पुरूष के घर गुणवान ,देवता सवभाव ओलाद होती है . वैसे ये कहावत बनी है तो सोच समझ कर ही बनी बनाई गयी होगी लेकिन इसके गलत मतलब भी निकाले गये . कोई खुनी , चोर ,अथवा डाकू है उसका बेटा यही सब होगा . यदि वह अपने पुत्र को इस तरह के माहोल से दूर रखता है तो वह कैसे इन सबमे से कुछ भी होगा . मान लीजिये पाकिस्तान में किसी आतंकवादी को बेटा हुआ और वह भारत में किसी आतंकी घटना को अंजाम देने आया और किसी कारणवश अपने परिवार को भी ले आया लेकिन वह और उसकी पत्नी मारी जाती है और उसकी संतान को कोई गोद ले लेता है अच्छी शिक्षा संस्कार मिलते है क्या १८ साल बाद उसे कोई आतंकवादी का बेटा कह सकता है . रावण एक राक्षस था उसका भाई बिभीषण राम भक्त , या भक्त पर्लाहद इस तरह की प्राचीन कहानिया जो आपको केवल भारत में ही मिलेंगी उनमे भी इस तरह का सपष्ट सन्देश मिलता है . इसी तरह अगर पकिस्तान को ही लीजिये पकिस्तान में आज आतंकी क्यों पलते है क्यों की उन्हें एसी ही शिक्षा मिलती है यदि भारत में भी पाकिस्तानी शिक्षा दी जाए तो क्या भारत में भी तालिबानी विचारों के लोग जन्म नही लेंगे . पकिस्तान एक नाकाम देश तो है ही साथ ही एक एसा देश भी है जो भारत की ख़ुशी देखकर कभी चीन तो कभी अमेरिका के आगे कटोरा लेकर खड़ा हो जाता है . ये भी उसके संस्कार होंगे लेकिन पकिस्तान में भी कुछ पर्तिशत जनता एसी होगी जो ख़ुद को इन विचारों से अलग रखकर अपनी पहचान बनाना चाहती होगी . मेरा कहने का मतलब सिर्फ इतना है जो भीख अमेरिका और चीन जैसे देश पाक को भीख में देते है उसे सही ढंग से शिक्षा या उधोगो को बढवा देने में लगाया जाये . सभी देशो को सख्ती से पाक में प्रेम भाईचारे का सन्देश देना होगा जिससे पाकिस्तानी जनता का जीवन केवल आतंकी के बेटे जैसा न होकर भक्त पर्ल्हाद जैसा हो . लेकिन भाइयो और बहनों किसी देशी या विदेशी बुद्धिजीवी , मीडिया , नेता , या किसी देश  में इतनी हिम्मत कहा के आतंकी को आतंकी कहे और उसके बेटे को भक्त पर्ह्लाद की राह दिखाए क्यों की दाल रोटी इसी से चल रही  है . और पैदा हो रहे है राक्षस के घर राक्षस ,आतंकी के घर आतंकी पैदा होना ही हमारा दुर्भागया बनता जा रहा है

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