सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

योग गुरु के दावो में कितना सच ?

बाबा रामदेव जिन्हें योग गुरु के नाम से दुनिया जानती है लेकिन उनकी पहचान बदल रही है . वह एक योग गुरु , सन्यासी ही नही एक अच्छे बिजनेसमेन  भी है आज भारत ही नही विदेशो में भी दिव्यफर्मेची के काउंटर है . इतना सब है परन्तु कुछ तो कमी है कही ना कही की बाबा राजनीति में भी पाँव जमा रहे है . बाबा के मुद्दे देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराना , काला धन लाना है .गरीबी खत्म करना  भारत सवाभिमान जो की बाबा का ट्रस्ट  है को भगतो द्वारा  दान राशी भी मिलती है .बाबा में जो देशसेवा करने का जज्बा है क्या वह राजनीति में आये बिना पूरा नही होगा ? जब की आज बाबा के २ करोड़ से भी ज्यादा  अनुयायी है .जो हर संभव मदद दान देने को तत्पर रहते है . अब तक बाबा के ट्रस्ट को जो रुपया मिला है उस पैसे से कितने गरीबो का मुफ्त इलाज़ हुआ , कितने भूखो तक खाना पहुचा , कितने बाढ़ पीडितो को राहत मिली , कितनी गरीबी दूर हुई ?
                          यह बात न ही आजतक मेरे ज्ञान भण्डार  में है क्यों की मैंने या मेरे किसी भी दोस्त रिश्तेदार से मुझे इस तरह की जानकारी मिली . इतना जरूर है बाबा  गाडियों प़र गावो में जाकर भारत स्वाभिमान का प्रचार कर रहे है लेकिन इस तरह की कोई तस्वीर या विडिओ मैंने अब तक नही देखि जिसमे बाबा भारत के गरीबो की किसी परकार की मदद कर रहे हो . हो सकता है आपने देखि हो लेकिन मैंने न देखि हो इसके लिये मै क्षमा चाहता हूँ  . अगर कोई भाई इस बारे में कुछ बताये तो मै उसका आभारी रहूंगा . मै ये जाना चाहता हूँ की बाबा सत्ता में आने से पहले देश के गरीबो के लिये अथवा देश के लिये क्या कर रहे है .

5 टिप्‍पणियां:

  1. dekha to maine bhi nahi hai ...lekin ek baat hai agar garibon ko khana khilane se hi ye desh sudhar sakta to aise asharam bapu jaise bahut se log hai jinke bhandare chalte rahte hai ,garibi door karne ke liye madad ki nahi samasya ki jad ko khatm karna jaroori hai .shayad unki soch kuch alag ho ye to vaqt hi batayega ki kuch hota hai ki nahi lekin bharashtar jaisi samasya ka samadhan aasan nahi hai kuch to alag karna hoga .jo bhi ho hum to asha karte hai ki ye roshni ki kiran ek suraj ki tarah chamke .

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  2. भाई विकास जी आपका ज्ञान भंडार वास्तव में अभी खाली ही है | यदि आप वास्तव में अपने ज्ञान भंडार को भरना चाहते हैं तो सुबह ५-३० बजे आस्था चैनल और शाम को ८ से ९ आस्था या ९से १० संस्कार चैनल देखा करिए | ज्ञान के भंडार में इतनी क्षमता बढ़ जाएगी की आप बुद्ध बन जायेंगे | देश,धर्म, समाज,संस्कारों का भला कैसे हो सकता है इसको जान जायेंगे | वैसे तो बहुत से लोग इस संसार में उल्लू का जीवन जी रहे हैं जो सूर्य के प्रकाश को देखना ही नही चाहते या देख कर भी आँखे चुन्धियाने के कारण उसी प्रकाश में दोष निकालते हैं | लेकिन मेरा मानना तो यह है कि किसी किताब को पढ़-समझ कर ही उसमे लिखे हुए का ज्ञान हो सकता है, क्योंकि दुकान में तो सब प्रकार की पुस्तकें रखी रहती हैं किसी गलत किताब को देख लेने से सभी किताबों को उस जैसा नहीं समझना ही बुद्धिमानी है | इससे अधिक मैं आपको इमेल से लिंक भेज सकता हूँ पर उसके लिए मेरे इमेल बॉक्स में आपका इमेल पता होना चाहिए,इसलिए इमेल भेजना | वैसे मेरा ब्लॉग भी है tensionpoint.blogspot.com क्योंकि यहाँ पर लिंक बनाना मुझे नहीं आता | आशा है बुरा नहीं मानोगे |
    धन्यवाद

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  3. neer bhaai

    aapne bapu asharam ji ke baare mein kaha, pr yahan to unka mudda hi nhi tha, unhone kabhi ye dawa nhi kiya ki wo bharat sse gareebi hata denge, khair ye to koi b nhi kr payega.. Pr mera sawaal ye hai ki inki ninda kar ke humein kya milega, bajaye ye sab likhne ke hum ye kyun na sochein ki humne aaj tak kisi gareeb ke liye kyya kiya?

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  4. दिपाली "आब" ji
    yah kisi ki neendaa nhi un daavo ki pol kholne or unke baare me kuch sochne ki koshish hai jo khud ko raajniti me shirsh pad par pahuchtaa dekhne ke liye anaap shnaap paisaa hamare bhaai bahno se le rahe hai . or mai aapko btaa doo jis jagh aaj baabaa raamdev khde hai vah bhaart ke liye bhut kuch kar sakte hai lekin unhe bhavishy ki baate karni hai or desh par raaj karnaa esi meri raae hai

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  5. जब लोग कीचड़ से नहीं निकल पाते तो संतो
    को ही कीचड़ मैं आना पड़ता हैं ये इतिहास गवा हैं

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