शुक्रवार, 4 जून 2010

आतंकियों प़र एक शेर

पिछले दिनों एक नेता आतंकवादियों के घर दुःख जताने पहुचे . क्या जमाना आ गया है आतंकियों के घर दुःख जताने नेता इसलिए जा रहे है की उनकी राजनीति चमक जाए . पहले जमाना था के शहीदों के घर नेता जाते थे उनके परिवारों को सहानुभूति देने . जिस तरह से कलियुग अपने कदम बधा रहा है धरती प़र पाप और पापी दोनों बढ़ रहे है और सज्जन व्यक्तियों की जनसंख्या घट रही है . इसे देखते हुए हमारे देश में एक शेर था जो शहीदों प़र था परन्तु आने वाले सालो में यह कहावत कुछ इस परकार होगी . और इसमें तुष्टिकर्ण की नीतिया जिम्मेदार होंगी

आतकवादियो के घरो प़र लगेंगे हर बरस नेताओं के मेले
वतन को तोड़ने वालो का बाकी अब यही एक निशा होगा

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