क्या वास्तव में भारतीय कमजोर है बहुत से लोग हां कहेंगे और बहुत से नही . वैसे ये मिली जुली प्रक्रिया भी सही है कुछ मायनो में . अगर इतिहास को देखा जाए तो हम लोग बहुत समय तक गुलाम रहे कभी मुगलों तो कभी अंग्रेजो के अत्याचार सहते रहे .विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता को वे लोग बर्बाद करते रहे लेकिन भारतीय उन्हें खदेड़ न सके यह बाटे नई पुरानी पीढ़ी को सोचने प़र मजबूर करते है क्या हम वास्तव में कमजोर है या थे ?
लेकिन कुछ लोग यह भी समझ सकते है की हम कमजोर कभी नही रहे श्री राम जी को ही ले हजारो सालो पहले रावण को उसी के देश में जाकर हराया था . या कलियुग की बात ले ९३,००० सैनिको को गुलाम बनाकर भारत ने पूरे विश्व में अपने साहस का परिचय दिया था . या पृथ्वी राज चोहान को ही ले जिन्होंने ७७ बार मुहम्मद गोरी को माफ़ी दी वह अलग बात है अठात्र्वी बार मुह्हमद गोरी की फतह हुई और उसने पृथ्वीराज जी की आंखे निकाल ली . या झाँसी की रानी साहस पुरुषो में ही नही महिलाओं में भी है भारतीय साहसी और निडर तो है इसमें दो राए बनाना गलत होगा . लेकिन फिर क्यों हम कमजोर पड़ते है ?. हम एक दयालु देश और नागरिक है क्षमा हमारा आभुष्ण है और इसी का दुश्मन हर बार गलत फायदा उठाता है कभी हम गुलाम होते है और कभी हम आतंकी हमले में मरते है . भारत में युग युग , समय -समय प़र म्हापूरुशो ने जन्म लिया और सन्देश दिया अधर्म के खिलाफ लड़ो . गीता में श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है ' हे अर्जुन उठो अधर्म के खिलाफ लड़ो क्षत्रिय धर्म निभाओ ' . यहा वह किसी एक जाती को सन्देश नही दे रहे है वह हर भारत वंशी को कह रहे है अधर्म से लड़ो . लेकिन क्षत्रिय को एक जात समझ लिया गया और युद्ध केवल एक जाती तक सिमित होने लगा . कुछ एसा ही सन्देश गुरु गोबिंद सिंग जी ने दिया था और उन्होंने नारा दिया था 'एक लाख से एक लदाऊ तभी नाम गोबिंद कहलाऊ ' . और एसा ही उन्होंने किया . लेकिन आज तक हम इन संदेशो को अपने जीवन में नही उतार सके तभी हमारे दुश्मन देश हम प़र बम फोड़ते है और हम उन प़र दया करते है



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