मंगलवार, 3 अगस्त 2010

भगत सिंग तो पैदा हो परन्तु .........

आज फिर से एक क्रांति की जरुरत  है .                         है ना .........
लेकिन वह मेरे आपके घर में नही पडोसी के घर में पैदा होना चाहिए . है ना
क्यों मेरे घर में क्यों नही या आपके घर्म में क्यों नही ?
मेरे लड़के को डॉक्टर ,इंजिनियर , बनना है .
है ना ?
फिर कैसे हो भगत सिंग कैसे उठाये अन्याय के खिलाफ आवाज़ ?
मेरा लड़का क्यों पड़े इन चक्कर में .
यही सोच है हम भारतीयों की . आज की ढक लो कल किसने देखा .जिन्दगी को जियो मोज लो . यही सोच तो हो गयी है हम भारतीयों की . खाओ पियो मोज करो और सो जाओ .
फिर क्यों करते हो देश की चिंता . क्यों ख़ुद को राष्ट्रवादी कहते हो जैसा चल रहा है चलने दो . कभी कहते हो बाबा रामदेव हमारा , क्या तुम्हारी देश के पार्टी कोई जिम्मेदार नही है . अगर मोज लेनी है तो क्यों करते हो राष्ट्रवाद की बाते . राष्ट्रवादी बाते करते हो तो राष्ट्रवादी बनो अपन्प्नी जिम्मेदार को समझो . मै कोई आम आदमी नही तुम भी कोई आम आदमी नही ..........इस धरती की संतान है हम इसके लिये जान देना सिखों ............
याद करो अपने पूर्वजों की कुर्बानियों को . जातियों प़र मत लड़ो लड़ो तो देश के लिये मरो तो देश के लिये .

2 टिप्‍पणियां:

  1. अगर मोज लेनी है तो क्यों करते हो राष्ट्रवाद की बाते . राष्ट्रवादी बाते करते हो तो राष्ट्रवादी बनो अपन्प्नी जिम्मेदार को समझो

    kon sunega kisko sunaayen isliye chup ahte hai

    chintan aapka yakinan sochne ke liye majboo karta hai lekin kise aap jaise ya hum jaise insano ko janvaro ko nahi aaj janvar jyada ho gaye hai insan tobahut hi kam hai .

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  2. http://www.aloe-veragel.com/2010/08/myrrh-equivalent-immortality-for-body.html

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