रविवार, 29 जनवरी 2012
अन्ना की चापलूसी में लिप्त क्यों है मीडिया
बुधवार, 25 जनवरी 2012
क्या अब भारत इस्लामिक कट्टरपंथियों के इशारे पर चलेगा ?
सलमान रुश्दी खबरों में है कारण उनकी ( द सटेनिक वर्सेज ) विवादित किताब यही वह किताब है या फिर इसके कुछ अंश है जिसकी वजह से देश में बवाल उठ गया है . इस्लामिक कट्टरपंथी लगातार हिंसा की धमकी दे रहे है और केंद्र से लेकर राजस्थान सरकार दबाव में है इसी वजह से उनका जयपुर दोरा रद्द हुआ यहाँ तक की उनकी विडिओ कोंफ्रेसिंग भी . लेकिन एक बात मेरे और तमाम देशवासियों के मन में चल रही है की आखिर भारत सरकार इस्लामिक कट्टरपंथियों के दबाव में क्यों है ? क्या भारत सरकार वोट बैंक की निति के तहत काम कर रही है ? क्या भारत सरकार या राजस्थान सरकार रुश्दी को सुरक्षा देने में विफल है ? क्या भारत सरकार हमारे देश में किसी भी हिंसा से निपट पाने में पुलिस ,सेना को निपटने में सक्षम नही मानती ? ऐसे तमाम सवाल है मेरे मन में और तमाम देशवासियों के मन में जो भारत सरकार और राजस्थान सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते है . एक और सवाल है मेरे मन में जो शायद सबसे ज्यादा सशक्त और महत्वपूर्ण है
क्या अब भारत इस्लामिक कट्टरपंथियों के इशारे पर चलेगा? यह वह सवाल है जो शायद भारत को धीरे – धीरे ही सही तालबानी क़ानून , परम्पराओं ,संस्कृति के नजदीक ले जाता दिखता है .चुकी इस तरह के फतवे , अभिव्यक्ति की आवाज को दबाना , आजाद भारत में जायज नही है आज सलमान रुश्दी पर कट्टरपंथियों के दबाव में सरकार है कल किसी और मामले में होगी . कभी वन्दे मातरम , तो कभी ग से गणेश पर विवाद , तो कभी रेलगाड़ी के आगे शुभारम्भ पर नारियल फोड़ने पर विवाद , आखिर यह सब कब तक चलेगा कब तक दबाव सहेगी भारत सरकार ?
क्या अब भारत इस्लामिक कट्टरपंथियों के इशारे पर चलेगा? यह वह सवाल है जो शायद भारत को धीरे – धीरे ही सही तालबानी क़ानून , परम्पराओं ,संस्कृति के नजदीक ले जाता दिखता है .चुकी इस तरह के फतवे , अभिव्यक्ति की आवाज को दबाना , आजाद भारत में जायज नही है आज सलमान रुश्दी पर कट्टरपंथियों के दबाव में सरकार है कल किसी और मामले में होगी . कभी वन्दे मातरम , तो कभी ग से गणेश पर विवाद , तो कभी रेलगाड़ी के आगे शुभारम्भ पर नारियल फोड़ने पर विवाद , आखिर यह सब कब तक चलेगा कब तक दबाव सहेगी भारत सरकार ?
शनिवार, 21 जनवरी 2012
इस्लामिक धर्मगुरूओ का दोहरा रवैया
सलमान रुश्दी के भारत आने की खबर क्या चली की इस्लाम के धर्म गुरुओ ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और सरकार पुलिस भी उनके दबाव में दबती गयी कारण वोट बैंक की राजनीति . लेकिन कारण जो भी हो यहाँ एक बात गोर करने लायक है जिस तेवर से इस्लाम के धर्म गुरुओ ने सलमान रुश्दी की आवाज को दबाया है वही आवाज , वही तेवर वह आतंक को दबाने में क्यों नही लगाते ? वही तेवर वह कसाब और अफजल जैसे आतंकियों को फ़ासी पर लटकाने के लिए सरकार को क्यों नही दिखाते ? क्यों सरकार पर दबाव नही बनाते की बार -बार ला एंड ऑर्डर के नाम पर अफजल की फ़ासी की सजा को लंबा खीचना इस्लाम की , मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुचाना है ? इससे आम भारतीयों की नजर में मुसलमानों की छवि को ठेस पहुचती है क्यों नही कहते ये सब सरकार से ? जब – जब कभी तसलीमा नसरीन या फिर सलमान रुश्दी जैसे लेखक इस्लाम के कुछ मुद्दों से असहमत होते है तब – तब उनके खिलाफ फतवे निकलते है उन्हें जान से मारने की धमकिया मिलती है लेकिन जब एम् ऍफ़ हुसैन जैसे लोग जिस देश की खाते है उसी देश की संस्कृति को ठेस पहुचाते है तब इस्लामिक धर्मगुरु कहा होते है ? जब लव जेहाद का खेल सामने आता है तब कहा होते है इस्लामिक धर्म गुरु ? आखिर क्यों मुसलमानों को नही समझाते की गौ वध हिन्दुओ की धार्मिक भावनाओं का अपमान है ? आखिर क्यों त्योहारों पर गौ वध या गौ बलि पर प्रतिबंध नही लगवाते ? आखिर क्यों काश्मीर में तिरंगा न फहराने देने का विरोध का करते , आखिर क्यों कर्नाटक के ईदगाह मैदान में तिरंगा न फहराने देने का विरोध करते ? आखिर क्यों धर्म आधारित आरक्षण का विरोध नही करते ? आखिर क्यों आर्थिक आरक्षण की वकालत नही करते ? अकेले सलमान रश्दी का विरोध , तसलीमा नसरीन का विरोध करके वह इस्लाम की छवि को सुधार सकते है ? क्या किसी की अभिव्यक्ति को दबाकर इस्लाम को चार चाँद लग सकते है ? आखिर चाहते क्या है इस्लामिक धर्म गुरु क्या यह उनका दोहरा रवैया नही है जो केवल इस्लाम , इस्लाम और केवल इस्लाम पर ही उन्हें इन्साफ नाइंसाफी की याद दिलाता है भले ही कानून को ताक पर क्यों न रखना पड़े ?
क्या है चुनावी मुद्दा जन्लोपाल ,काला धन या फिर ...अपनी जात
वह घडी नजदीक है जिस घडी का सभी को इंतज़ार था खासतोर पर उन प्रदेशो की जनता को जहा यह चुनाव होने है . चुनावों से बहुत पहले से ही हमारे देश में भर्ष्टाचार और काला धन एक मुद्दा था लोग इन्ही मुद्दों से तंग आकर सडको पर निकले थे . यह देश की युवा पीढ़ी ने पहली बार देखा था की कोई गैर राजनैतिक संगठन इतने बड़े आन्दोलन की अगुवाई कर रहा था . पहले बाबा रामदेव बाद में टीम अन्ना दोनों ने ही भर्ष्टाचार के मुद्दे पर देश को जागरूक किया . लेकिन दोनों ही आन्दोलन सरकार ने विफल कर दिए लेकिन इस बात से इनकार नही किया जा सकता की भारत की जनता के मन में भर्ष्टाचार और विदेश में पड़े लाखो करोड़ रुपयों को लेकर गुस्सा है और वह चाहती है की देश में भ्रष्टाचार न हो काला धन वापस आये . लेकिन भारत में जैसे जैसे चुनाव करीब आते है वैसे – वैसे राजनीतिग्य अपने -अपने दाव चलने लगते है कोई मुफ्त शिक्षा के नाम पर , कोई साइकल के नाम पर , तो कोई मुफ्त कम्प्यूटर के नाम आम जनता के वोट अपनी झोली में लाना चाहता है . लेकिन राजनेताओं का असली तुरुप का पत्ता सिद्ध होता है जातीय फैक्टर यह वह फैक्टर है जो आपको जीत का मन्त्र देता है . उम्मीदवार चाहे कितना भी दागी हो ह्त्या के उस पर आरोप हो लूट -मार उसका पेशा हो भार्श्त्चार के कितने ही आरोप उस पर लगे हो लेकिन उसकी जीत तब लगभग सुनिश्चित हो जाती है जब उसकी जाती का उस क्षेत्र में दब -दबा हो जहा से वह चुनाव लड़ रहा होता है . तब यह मुद्दे कही गुम से हो जाते है सुशासन , सवच्छ शासन , भ्रष्ट मुक्त शासन , काला धन , जन्लोक्पाल और तब देशभक्ति की भावना भी जाती के प्रभाव के निचे कही दब जाती है देश प्रदेश के नेता फिर से अन्ना या बाबा रामदेव जैसे भ्रष्टाचार से लड़ने वाले नायको को ठेंगा दिखाकर कुर्सी हतियाने में कामयाब हो जाते है ,फिर से वही भ्रष्टाचारी ,लूटपाट के आरोपी , बलात्कार के आरोपी हमारे सिस्टम का एक हिस्सा बन जाते है .किसी को कैबिनेट में जगह तो किसी को मुख्य संसदीय सचिव जैसे पद दे दिए जाते है और पूरे पांच साल तक वही लोग देश या प्रदेश की जनता को खून के आंसू रुलाते है . अपने यार – दोस्त , रिश्तेदारों को गुंडा गर्दी का खुला लाइसेंस इन्ही लोगो की वजह से ही मिलता है . इस बार के विधान सभा के चुनावों में भी कुछ एसा ही है अन्ना और बाबा रामदेव की मेहनत पर पानी फेरने का मन लगभग सभी राजनातिक दलों ने बना लिया है और वह उसी फार्मूले को अपना आधार बना कर चुनाव लड़ रहे है जिसे वह पहले आधार बना कर चुनाव लड़ते आये है राजनीति में जातिवाद अथवा जाती की राजनीति . वह फिर से देशवासियों , प्रदेशवासियों को राजपूतो , ब्राह्मणों , जाटो , दलितों , मुस्लिमो के नाम पर बाटने में लगे है .उनका लक्ष्य एक ही है मात्र सत्ता…. किसी भी कीमत पर . जिस क्षेत्र में राजपूत अधिक है वहा राजपूतो को टिकेट मिलेगी , जहा जाट अधिक है वहा जाटो को और जहा दलित अधिक है वहा दलितों को और जिस क्षेत्र में मुस्लिम अधिक है वहा मुस्लिमो को . जनता भी एक बार फिर जातीय भावनाओं में बहकर उसे ही वोट देगी जो उसकी जाती धर्म से ताल्लुक रखता है चाहे वह कितना ही बड़ा अपराधी क्यों न हो . बेशक से उनका गाव ,शहर , राज्य पिछड़ता रहे लूट अपराध का बोल -बाला प्रदेश में चलता रहे . चुकी राजनीति में जातिवाद भारत में एक कडवी सच्चाई है और यही सच्चाई राजनातिक दल समझते है तभी हर उम्मीदवार जाती के गुना भाग से तय होता है और हर बार मतदाता उन्हें वोट देकर सत्ता सोपकर पछताता है चुकी हर बार योग्यता , इमानदारी ,सवच्छ छवि पर भारी पड़ती है ………अपनी जाती
गुरुवार, 19 जनवरी 2012
हिन्दू संघठन साधू संत हिन्दू समाज में बदलाव करे
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हिन्दू संघठन साधू संत हिन्दू समाज में बदलाव करे
पोस्टेड ओन: 20 Jan, 2012 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में
आज जिस तरह से हिन्दुओ को दलित ,राजपूत , ब्राह्मण , बनिया , पंजाबी ,मराठी , जाट के नाम पर बाटा जा रहा है . जिस तरह से दलितों को हिन्दू से अलग दिखाने , राजपूतो को सर्व्नो से अलग दिखाने , सवर्णों को हिन्दू से अलग दिखाने . हिन्दू धर्म के रीती -रिवाज ,कर्म – काँडो को ढोंगी ,दकियानूसी बताने , हिन्दू त्योहारों को अंधविश्वास बताने , हिन्दुओ को ओरत विरोधी समाज बताने का प्रयास किया जा रहा है उससे निपटने के लिए हिन्दू संघठनो को कुछ जरुरी उपाय तेज़ी से करने होंगे नही तो हिन्दू समाज बुरी तरह से टूट जाएगा और भारत फिर से विभाजन का दंश झेलने को मजबूर होगा और हिन्दू जाती का भारी नुक्सान होगा .इसलिए आर एस एस , वि एच पि , बजरंग दल और साधू संत हिन्दुओ को संघठित करने के लिए यह जरुरी बदलाव करे . १ हिन्दू मरीज एक्ट में बदलाव के लिए शांतिपूर्वक आन्दोलन – आज जिस तरह से हिन्दुओ को तलाक लेने में समय लगता है तलाक की कारवाई किस कद्र लम्बी चलती है यह इस बात से जाना जा सकता है की एक इंसान की आधी उम्र तक गुजर जाती है तलाक लेने दोबारा घर बसाने में जब की अन्य धर्म जैसे इस्लाम में इतना समय नही लगता इस वजह से कुछ लोग हिन्दू धर्म को न चाहते हुए भी त्याग देते है अथवा धर्म परिवर्तन कर लेते है . इस तरह की समस्या से निपटने के लिए सभी हिन्दू संघठन , साधू संत देश की जनता को एक मंच पर लेकर आये और कोई शांति पूर्वक आन्दोलन चला कर इस एक्ट में बदलाव के लिए आवाज उठाये
२ जिस तरह से सरकार मुस्लिमो को आरक्षण दे रही है उससे न सिर्फ दलित हिन्दुओ में अपितु सर्वण हिन्दुओ में भी नाराजगी है अतः इससे बेहतर मोका हिन्दुओ को संघठित करने का उन्हें जागरूक करने का नही हो सकता लेकिन इसमें किसी एक पार्टी एक दल का योगदान काफी नही है इसलिए देश के हर देशभक्त साधू संत , को इसमें अपना योगदान देना होगा
३ जहा जहा हिन्दू असंतुष्ट है अथवा जिस भी राज्य क्षेत्र में उन्हें अब तक हिन्दू संघठन दल या किसी राजनैतिक दल में महत्व पूर्ण पद नही मिला है वहा , वहा उन्हें संतुष्ट करने उन्हें अपने साथ लेने की कोशिश तेज़ी से हो .
४ अंतरजातीय विवाह – अंतरजातीय विवाह में जिस तरह से लड़ाई जह्ग्दे होते है उनका विरोध किया जाये और हिन्दू समाज को यह समझाया जाए की आखिर यह जातिवाद हमें गुलामिकाल में ही मिला है न की जातिवाद हिन्दुओ में शुरू से फैला हुआ है ताकि विदेशी पैसे से हिन्दुओ का धर्म परिवर्तन न हो सके और अंतरजातीय विवाहों का स्वागत किया जाये जिससे हिन्दुओ का आपसी रिश्ता कायम हो सके और उंच नीच जातिवाद की दीवार को तोड़ा जा सके .
५ गुरु बाल्मिक ,रविदास जी की जयंती न सिर्फ धूमधाम से मनाई जाए बल्कि उसमे हिन्दू संघठनो के भी बड़े पदाधिकारी ,कार्यकर्ता का भी सहयोग हो ताकि समाज जातिवाद से उपर उठे .
५ गुरु बाल्मिक ,रविदास जी की जयंती न सिर्फ धूमधाम से मनाई जाए बल्कि उसमे हिन्दू संघठनो के भी बड़े पदाधिकारी ,कार्यकर्ता का भी सहयोग हो ताकि समाज जातिवाद से उपर उठे .
६ हिन्दू त्योहारों होली , दिवाली , कुम्भ , का धार्मिक महत्व ही नही वज्ञानिक दृष्टि से महत्व भी समझाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी को चर्च पोषित मीडिया इस भरम में न डाल पाए की हिन्दू त्यौहार अंधविश्वास है रुढ़िवादी है .
७ वर्त त्योहारों का महत्व सम्ज्झाया जाए और यह भी समझाया जाए की कर्वाचोथ , रक्षाबंधन नारी के सम्मान के लिए है न की उसे प्रताड़ना देने के लिए चुकी आजकल हिन्दुओ को ओरत विरोधी बताने का परचार तेज़ी से हो रहा है .
बुधवार, 18 जनवरी 2012
बाबा रामदेव जी टीम अन्ना से सावधान
मित्रो , अब फिर से अन्ना टीम उस जहाज की सवारी करने को बेकरार है जिस जहाज ने उसे सम्पूर्ण भारत का हीरो बनने का मोका दिया .लेकिन उसी जहाज को टीम ने हाइजैक करने काम भी किया और उस जहाज की दिशा को तो न मोड़ पाए लेकिन देश की दशा को जरुर तोड़ -मोड़ दिया . लेकिन हर बनावटी चीज़ का अंत होता है सो अन्ना हजारे और उनकी लोकप्रियता का भी अंत हो गया . लेकिन अन्ना की टीम है की लगातार सुर्खियों में बने रहना चाहती है और वह फिर से उसी जहाज पर बैठने की कोशिशो में लगी है जी हां वह जहाज है बाबा रामदेव जिनकी चरण वंदना करके टीम अन्ना उनके मंच पर पहुची और देश को खुद का चहरा दिखाया और बाबा की लड़ाई को कमजोर किया और देश को एक जन्लोक्पाल पर लटकाया . उसका नतीज़ा यह हुआ की यह देश आज त्राहिमाम -त्राहिमाम कर रहा है .लेकिन इतना सब करके भी लगता है टीम अन्ना का मन नही भरा उसे इस बात का कोई अहसास नही लगता की देश के साथ उन्होंने गलत किया उन्हें तो बस खुद फिर से एक हीरो बनाना है जनता की नजरो में . तभी तो ठीक उस समय वे लोग बाबा रामदेव जी का हाथ थामने उनके मंच पर चढ़ने के लिए बेकरार है जिस समय बाबा की स्वाभिमान यात्रा की पूरे देश में धूम है और बाबा फिर से एक नायक की तरह उबर रहे है लेकिन यह एन जी ओ मण्डली पता नही इसे क्या भय सता रहा है की फिर से बाबा के आन्दोलन में घुसपैठ करना चाहती है . लेकिन अपनी तो बाबा रामदेव जी को एक ही सलाह है की इस बाबा गलती न करे चुकी उनकी एक गलती की सज़ा उन्हें और इस देश क भुगतनी पड़ सकती है इसलिए बाबा इनका समर्थन बेशक ले लेकिन इन्हें मंच पर एक हीरो न बन्ने दे इन्हें भी आम आदमी की तरह मंच से नीचे ही बैठाया जाए ताकि आन्दोलन को इसी प्रकार का कोई नुक्सान न हो नही तो पता नही कल को फिर से ये लोग जन्लोक्पाल के मुद्दे या फिर किसी और मुद्दे पर देश की जनता को गुमराह करे और देश का भत्ता बिठाये .
मंगलवार, 10 जनवरी 2012
किस हक़ से हिन्दुओ के वोट मांगते हो ?
मित्रो जब भी चुनाव आते है तभी ये सभी राजनैतिक पार्टिया मुस्लिमो को पटाने में लग जाती है सभी पार्टिया ऐसी तुष्टिकर्ण पर उतारू हो जाती है की हिन्दुओ के हित मारने लगती है उनके हक़ छिनने लगती है . जहा एक और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों में होड़ लगी है मुस्लिमो को आरक्षण देने की वही होड़ लगी है हिन्दुओ के हको को मारने की . कोई साढ़े चार पर्तिशत आरक्षण देता है तो कोई नो पर्तिशत की घोषणा करता है और कोई अठारह पर्तिशत आरक्षण देने की वकालत करता है . लेकिन इस सारे आरक्षण की राजनीति के खेल में आम हिन्दू का हक़ छिना जा रहा है चुकी यह आरक्षण अनुसूचित जातियों के कोटे में से ही दिया जा रहा है .पहले हमारे प्रधानमंत्री जी ये खुले आम कह चुके है की देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का है .ये सभी लोग सत्ता की सीधी तक हिन्दुओ के वोटो से ही पहुचते है जैसे मुलायम सिंह यादव वोट बैंक , मायावती दलित वोटबैंक और अन्य हिन्दू वोट , कोंग्रेस ,सभी हिन्दुओ के वोट तो मांगते है पर हिन्दुओ के वोटो के सहारे सता में आकर हिन्दुओ की अनदेखी करते है उन्हें आतंकी कहते है उनके धर्म को अपमानित करते है ,शहीदों का अपमान करते है , यदि कोई हिन्दू दंगे में मारा जाय तो ये ऐसे नाक सिकोड़ लेते है जैसे कोई आतंकी मारा गया है लेकिन मुस्लिम पर कुछ भी आंच आ जाए तो ये लोग आसमान को सर पर उठा लेते है . जैसे इन्हें हिन्दू शब्द , हिन्दू संस्कृति से ही नफरत हो जैसे इनका एकमात्र लक्ष्य हिन्दुओ को कमजोर करना हो . फिर किसलिए ये लोग हिन्दुओ के वोट मांगते है जब की इनका लक्ष्य मुसलमानों को अधिक से अधिक सब्सिडी देना , हिन्दू के टैक्स से मदरसे बनवाना , अधिक से अधिक मुसलमानों को सुविधाए देना क़ानून के तहत. आखिर किस हक़ से ये हिन्दुओ के वोट मांगते है जब की इन्हें हिन्दुओ को किसी किस्म का कोई लाभ देने की कोई इच्छा ही नही है .
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