सन 1951 की बात है। ह्यूज बीवर उन दिनों गिनीज ब्रेवरीज में काम करते थे। एक दिन वे अपने दोस्तों के साथ चिड़ियों का शिकार करने के लिए निकले। युवा शिकारियों का यह दल कुछ समझ पाता इससे पहले ही उनके सामने से चिड़ियाओं का एक झुंड बहुत तेजी से निकल गया। ह्यूज और उनके दोस्त हैरत में पड़ गए कि आखिर ये कौन सी चिड़ियाएँ है थीं जो इतनी तेजी से उड़ती हैं। कुछ का अंदाजा था कि वह बया जैसा कोई पक्षी था जबकि कुछ कह रहे थे कि वह तीतर से मिलती कोई प्रजाति थी। यह तय नहीं हो पाया कि आखिर वे कौन सी चिड़ियाएँ थीं।
ह्यूज ने घर आकर यह पता लगाने के लिए किताबें अलटी-पलटी कि आखिर योरप का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी कौन सा है। कई किताबें उलटने के बाद भी उन्हें अपनी जिज्ञासा का उत्तर नहीं मिला। ह्यूज अपने काम में लगे रहे। 1954 में एक किताब में उन्होंने अपने प्रश्न का उत्तर पाया, यह भी कोई बहुत प्रामाणिक उत्तर नहीं था।
इस पूरी घटना से ह्यूज बीवर के मन में यह बात आई कि कई लोगों के मन में इस तरह के प्रश्न उठते होंगे और उनका उत्तर न मिलने पर इन्हें कितनी निराशा होती होगी। ह्यूज ने यह विचार अपने मित्रों को सुनाया।
मित्र ने उन्हें नोरिस और रॉस मॅक्विटर नाम के दो युवकों से मिलाया। ये दोनों लंदन में एक तथ्यों का पता लगाने वाली एजेंसी के लिए काम करते थे। तीनों ने मिलकर 1955 में पहली गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स निकाली और फिर धीरे-धीरे यह नई किताब लोगों को इतनी पसंद आने लगी कि इसकी प्रतियाँ हर साल बढ़ती गईं।
आज इस रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज करवाने के लिए दुनियाभर के लोग उत्सुक रहते हैं और तरह-तरह के काम करते हैं। ह्यूज एक मुश्किल में पड़े और उससे एक नया रास्ता निकला। याद रहे, हर मुश्किल के पास सिखाने के लिए बहुत कुछ होता है
http://hindi.webdunia.com/miscellaneous/kidsworld/ajabgajab/ से लिया गया
बुधवार, 23 दिसंबर 2009
मंगलवार, 22 दिसंबर 2009
भारतीय यहाँ कोन रहेगा ??????
बहुत दिनों से हर आदमी बस यही कहता फिर रहा है मै मराठी हूँ ,पंजाबी , तुम up के भइये हो ,तुम बिहारी हो , मजदूरी करने के लिए जब भी किसी स्टेट का नागरिक किसी दुसरे राज्य में मेहनत करने जाता है तो उसे ये सब सहना पड़ता है . भारत के किसी भी राज्य का नागरिक किसी भी राज्य में न तो आतंक फ़ैलाने जाता है और न ही अपनी जनसँख्या को वह बढाकर उस राज्य के नागरिको को अपना गुलाम बनाने .वह मात्र अपने बीवी बच्चो के लिए रोटी का इंतजाम करने जाता है . लेकिन फिर भी दुसरे राज्य में जाने पर उसे वह सम्मान नही मिल पाता जो एक इन्सान को मिलना चाहिए . भारत का संविधान कहता है कोई भारतीय किसी भी राज्य या शहर गाव में रह सकता है . भारत आज आजाद देश है फिर भी नागरिको को इतनी भी आजादी नही की वह रोजगार के लिए किसी भी शहर अथवा गाव में रह सके . इस तरह की बातो से कई बार राजा महाराजो का जमाना याद आ जाता है जिसे हम या तो टीवी पर या फिर किताबो में पढ़ते आये है . जिस पारकर वह लोग एक दुसरे के राज्यों पर हमला कर जीत लिया करते थे उसी प्रकार यह आज भी जारी है . फर्क केवल इतना है पहले राजा लोग ये सब किया करते थे लेकिन आज प्रजा आम आदमी ये सब कर रहा है . आम आदमी जो की उसी राज्य का है उसकी मानसिकता यह है की उस शेत्र पर केवल उसी का वर्चस्व रहे . और इस आग में घी डालने का कम राज ठाकरे जैसे लोग करते है . अगर इस देश में कोई मराठी कोई पंजाबी,बंगाली ,बिहारी , हरियाणवी हो जाएगा तो भारतीय यहाँ कोन रहेगा . वही जमाना फिर से आजाएगा राजा वाला . एक दुसरे से उलझे रहने वाला .गुलामी वाला . कोई राज्य किसी दुसरे राज्य के नागरिक को निकलेगा तो कोई तीसरे फिर चोथे फिर पांचवे . और फिर कहा होगा भारत . आपस में ही लोग इतने कट्टर होते जा रहे है . की वह देश की तरक्की या ख़ुद की आर्थिक स्थिति को सुधरने की जगह सरकारी इमारतो बसों आदि में आग लगा रहे है . चाहे इस देश का कोई भी इन्सान हो बना तो भारत माता से ही है इसी मिटटी से ही बना है
रविवार, 20 दिसंबर 2009
भारत तो जाती पाती में ही उलझकर रह जाएगा
वर्तमान में भारत के नागरिको में देशभक्ति का आभाव होता जा रहा है . किसी भी शेत्र को लेलिजिये कोई भी राज्य या कोई भी शहर गंभीर मुद्दों या फिर किसी भी प्रकार का राष्ट्रिय मुद्दा हो आप मुश्किल से ५० आदमी नही जुटा सकते . लेकिन आप किसी फिल्म स्टार को बुला लीजिये लाखो लोग एक्त्त्रित हो जायेंगे मात्र एक झलक पाने को . आजकल भारतीय केवल एन्जॉय कर रहे है लाइफ को किसी का भी राष्ट्र की तरफ ध्यान नही है और खासकर युवा तो मोजमस्ती में इतने डूब गये है की १०० में से १ युवा ही होता होगा जो देश की रक्षा के लिए आर्मी ज्वाइन करना चाहता हो . आजका युवा एसी जॉब करना चाहता है जिसमे पैसा और पर्सनैलिटी हो . देशसेवा का जज्बा युवाओं में दिन पर्तिदिन घटता जा रहा है .
और आजकल उन लोगो की जनसँख्या में भी काफी बढ़ोतरी हो रही है जो लोग जाती के नाम पर लाखो एकत्रित हो जाते है एकता में कोई बुराई नही लेकिन . हर इन्सान अपनी जाती का सम्मलेन करेगा तो भारत तो जाती पाती में ही उलझकर रह जाएगा . अब किसी जातीय सम्मलेन में एसा क्या ज्ञान होता है की उसमे वही जाती हिस्सा ले जिसने वह प्रोग्राम किया है . अगर कोई ज्ञान की बात है तो वह सभी में बाटी जा सकती है . जातीय समूहों में देश को बाटने से देश को नुकसान ही हो रहा है . युवाओं का तो जोर एसे सम्मलनों में बढ़ चढ़कर होता है . हम भारतीय एसे जातीय सम्मलेन कर के क्या साबित करना चाहते है .किसके आगे ख़ुद को ऊँचा साबित करना चाहते है या अपने ही लोगो को नीचा ? इससे तो बेहतर युवाओं में नई पीढ़ी में देशभक्ति का संचार करना चाहिए और इसमें सभी का दुसरे शेत्रो को भी निमंत्र्ण देना चाहिए . ताकि भारत के लोग एक दुसरे को जान सके .
और आजकल उन लोगो की जनसँख्या में भी काफी बढ़ोतरी हो रही है जो लोग जाती के नाम पर लाखो एकत्रित हो जाते है एकता में कोई बुराई नही लेकिन . हर इन्सान अपनी जाती का सम्मलेन करेगा तो भारत तो जाती पाती में ही उलझकर रह जाएगा . अब किसी जातीय सम्मलेन में एसा क्या ज्ञान होता है की उसमे वही जाती हिस्सा ले जिसने वह प्रोग्राम किया है . अगर कोई ज्ञान की बात है तो वह सभी में बाटी जा सकती है . जातीय समूहों में देश को बाटने से देश को नुकसान ही हो रहा है . युवाओं का तो जोर एसे सम्मलनों में बढ़ चढ़कर होता है . हम भारतीय एसे जातीय सम्मलेन कर के क्या साबित करना चाहते है .किसके आगे ख़ुद को ऊँचा साबित करना चाहते है या अपने ही लोगो को नीचा ? इससे तो बेहतर युवाओं में नई पीढ़ी में देशभक्ति का संचार करना चाहिए और इसमें सभी का दुसरे शेत्रो को भी निमंत्र्ण देना चाहिए . ताकि भारत के लोग एक दुसरे को जान सके .
शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009
किसकी जात महान ?????????
बचपन से आज तक सुनता आया हूँ मेरा देश महान . और मानता भी आया हूँ महाराणा प्रताप , मंगल पांडे , झाँसी की रानी , भगत सिंह , मदन लाल धींगरा , वीर हकीक़त राय सभी की महानता को सविकारा और शहीदों और ऋषि मुनियों ने भारत को महान बनाया .दुनिया से अलग एक शांति और धर्म पर चलने का सन्देश दिया लेकिन अधर्म के खिलाफ लड़ने की शिक्षा भी दी . इन्ही की प्रेरणा पर भारतीय चलते आये है . लेकिन कुछ सालो से भारतीयों को एक रोग हो गया है वह रोग है जात पात का . इन् शहीदों ने किसी जाती विशेष के लिए अपने प्राणों की आहुति नही दी थी लेकिन आज २१ सदी में जी रहा इन्सान शहीदों को भी जात पात में बाटना चाहता है . शहीदों की कुर्बानिया भारत माता की रक्षा के लिए उन्होंने दी . ताकि आने वाली पढ़ियो को एक आजाद हवा में साँस लेने का मोका मिल सके . लेकिन आज भारतीय जात पात पर लड़ ही नही रहे बल्कि देश को कमजोर भी कर रहे है . हम पर कभी मुगलों तो कभी अंग्रेजो ने जुर्म ढहाया . और जब हम आजाद हुए तो नई गुलामी में चले गये उंच नीच की गुलामी . आजादी की लड़ाई सभी भारतीयों ने छुआ छुट जैसी बीमारियों को मिटाकर लड़ी थी . जभी हमें आजादी मिली . देश को बटने से टूटता है किसी भी जाती से पहले हम एक भारतीय है . कभी शेत्रो पर लड़ाई कभी भाषा पर और कभी जात पर . जात के नाम पर लाठिया निकल जाती है और लग जाते है अपनों का खून बहाने . इसलिए युवाओं में भी देशभक्ति की भावना कम हो रही है और जाती भक्ति की भावना बढ़ रही है . . कोई भी इन्सान जो भारतीय है वो इसी मिटटी से बना है . देश मज़बूत तभी होगा जब सभी भारतीय जात पात पर लड़ना छोड़ देश की तरक्की पर सोचेंगे 

कल की परतियोगिता जीती थी विजय वडनेरे जी ने आज आप भी अच्छा सा कमेंट्स भेजकर बन सकते है कमेंट्स के हीरो
मुल्क का बटवारा किया हासिल किया क्या . कल की परतियोगिता जीती थी विजय वडनेरे जी ने आज आप भी अच्छा सा कमेंट्स भेजकर बन सकते है कमेंट्स के हीरो
गुरुवार, 17 दिसंबर 2009
बुधवार, 16 दिसंबर 2009
धुप या हवन की सामग्री पर छपे देवी देवताओ के पोस्टर उन्हें नहर में ढाले
धुप हवन की सामग्री या फिर कोई भी पूजा से जुदा सामान उनके dabbo पर देवी देवताओ की तस्वीर मिलती है . व्यापारी श्रधा से तस्वीर लगाते है . एक अछि बात कही जा सकती है . लेकिन जो लोग पूजन के लिए इन्हें लेते है क्या वह इनका वही सम्मान करते है जब पूजा की विधि पूरी कर ली जाती है अथवा सभी लोग घर में मंदिर के लिए धुप अगरबत्ती लाते है . लेकिन जब वह अगरबत्तियां सभी जगा दी जाती है कुछ लोग सभी तो नही लेकिन कुछ लोग उन्हें सडको पर फैक देते है . जिन देवी देवताओ को हम सभी सम्मान देते है जिन्होंने पृथ्वी , मानव जाती की की रचना की उनका अपमान कैसे शोभा देता है हमें . इंसान घर पर देवी देवताओ को सम्मान देता है सुबह शाम जोत जगाता है लेकिन सड़क पर गुजरते समय अपने आप को इतना उप्पर समझ लेता है की किसी देवी देवता के कैलंडर या तस्वीर को किसी एसे सुरक्षित स्थान पर भी रखना उचित नही समझता जहा कम से कम कोई भी पराणी पाप का भागीदार न बने . उस समय इन्सान क्यों भगवान से ख़ुद को ऊपर मान बैठता है . एक कहावत है दुःख में सिमरन सब करे सुख में करे न कोई सुख सिमरण जो करे दुःख काहे को होई . ये कहावत बिलकुल सही है इन्सान इतना मतलबी होता है भगवान उसे जब याद आते है जब उसे कोई दुःख हो कोई कष्ट हो . जब वह सांसारिक सुख सुविधा से लैस हो जाता है तो वह लोभ माया में डूब जाता है . और उसे यह भी याद नही रहता वह मात्र इन्सान है कोई भगवान नही .
शिक्षा : सभी भारतवासी धुप सामग्री की खाली दब्बियो को चलते पानी में विसर्जित करे या उन्हें एसा स्थान दे जहा किसी के पैर नही पड़े
शिक्षा : सभी भारतवासी धुप सामग्री की खाली दब्बियो को चलते पानी में विसर्जित करे या उन्हें एसा स्थान दे जहा किसी के पैर नही पड़े
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