चिट्ठाजगत
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गुरुवार, 14 जून 2012

क्या वाकई कलाम साम्प्रदायिक हैं ?

पिछले कुछ दिनों से जब से पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का नाम राष्ट्रपति की रेस में सामने आया है तब से कुछ लोग फसबूक और अन्य साइटों पर कलाम को साम्प्रदायिक , आर एस एस का मुखोटा बताकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं ! लेकिन ऐसे लोग कलाम को आर एस एस का मुखोटा या फिर साम्प्रदायिक साबित करने में क्यों लगे हुए हैं !
१ क्या इसलिए की उन्होंने भारत को एक मजबूत देश बनाने के लिए काम किया है ?
२ क्या इसलिए की वह एनडीए के उम्मीदवार हो सकते हैं ?
३ क्या इसलिए की वह भारतीय संस्कृति का सम्मान करते हैं ?
४ क्या इसलिए की वह देशभक्त हैं ?
क्या ये सभी बाते जो की कलाम में हैं वह उन्हें साम्प्रदायिक अथवा आर एस एस का मुखोटा साबित करती हैं ! क्या भारत में रहकर भारत की मजबूती के लिए काम करना गुनाह है अथवा साप्रदायिकता ? क्या एनडीए का उम्मीदवार होना सम्प्रदायिकता है जब की एन डी ए में अकेली बीजेपी नही है नितीश , बादल जैसे धर्मनिरपेक्ष लोग भी शामिल हैं ! या फिर जो लोग कलाम का विरोध कर रहे हैं या उन्हें साम्प्रदायिक तत्व बता रहे हैं उनकी नजर में जो भी भारतीय संस्कृति का सम्मान करे वाही साम्प्रदायिक होता है ! एक और अहम बात कलाम देशभक्त हैं इसमें कोई दो राए नही लेकिन क्या यही देशभक्ति उनकी कमजोरी है जो ऐसे तत्व उन्हें आर एस एस का मुखोटा बताते हैं , क्या देशभक्त होना गुनाह है ?
यदि कलाम इन्ही गुणों से साम्प्रदायिक हैं अथवा आर एस एस के मुखोटे हैं तब तो भारत की पूरी सेना ही साम्प्रदायिक है आर एस एस की मुखोटा है हर वह आदमी साम्प्रदायिक है जो भारत के हित के बारे में सोचता है ! भारत के सभी विज्ञानिक साम्प्रदायिक हैं , सभी समाजसेवी साम्प्रदायिक हैं , साभी साधू संत साम्प्रदायिक हैं , सभी वे नेता भी साम्प्रदायिक हैं जो देशभक्त है अथवा इस देश के भले के लिए काम करते हैं !

बुधवार, 16 मई 2012

शाहरुख़ की असली जगह जेल !

शारुख खान जिसे हमारा मीडिया किंग खान और बादशाह खान के नाम से पुकारता है विवादों में है ! दरअसल शारुख और विवादों का सिलसला लगा रहता है ! कभी शारुख अमेरिका में चैकिंग  को लेकर बवाल मचाता है तो कभी फराह खान के पति  को थप्पड़ जड़ देता है तो कभी सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीकर कानून को तोड़ता है ! कई बार तो यही शारुख खान सलमान खान और आमिर खान से भी पंगा ले लेता  है !
बार - बार हाथापाई करनेवाला शारुख खान अब  तक खुला घूम रहा है ! जब की आम आदमी को किसी से उंचा बोलने पर जेल में डाल दिया जाता है ! यदि आम आदमी हाथापाई करे तो पुलिस उसके साथ बहुत कुछ कर देती है लेकिन जब शारुख खान जैसा बड़ा स्टार खुले आम भारत के संविधान का मजाक बनाता है किसी को गली - गलोच देता है मारपीट करता है सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पिता है तब भी वह खुला घूमता रहता है ! क्या शारुख खान के खिलाफ भी पुलिस को वाही सख्ती नही बरतनी चाहिए जो वह किसी साधारण आम इंसान के साथ बरतती है ! अथवा रुपयों और शोहरत के बल पर सैफ और शारुख किसी से   मारपिटाई करते रहे उसे अनदेखा कर दिया जाना चाहिए ! यदि यह सब करने के बाद आम आदमी की जगह जेल है तो जेहादी मानसिकता वाले शाहरुख़ की भी जगह जेल ही होनी चाहिए !

गुरुवार, 10 मई 2012

अमरनाथ यात्रा के लिए सब्सिड़ी क्यों नही ?

भारत सरकार की ओर से प्रत्येक वर्ष भारतीय हज समिति के द्वारा हज के लिए जाने वाले मुसलमान तीर्थयात्रियों को हवाई किराए में सब्सिडी दी जाती है जिसका सारा खर्च स्वयं सरकार एयर इंडिया को अदा करती है. ..........................................................................................................
वहीँ अमरनाथ जाने वाले प्रत्येक यात्री का खर्च लगभग दस से बारह हजार रुपए आता है जिसे हर यात्री सवयम उठाता है ! यानी जिन परिवारों में पांच सदस्य है तो उनका खर्च प्रति व्यक्ति दस हजार के हिसाब से पचास हजार हुआ ! इस देश का आम आदमी जिसके पास इतना रुपया नही है अथवा १०० , २०० रुपया कमाने वाला आम आदमी अमरनाथ के दर्शन अपने परिवार के साथ नही कर सकता ! परिवार तो छोड़िये वह अकेला भी इतनी महंगी यात्रा नही कर सकता ! देश में लाखो लोग ऐसे हैं जो जीवन भर एक आस लगाये रहते हैं की वह भी अमरनाथ के दर्शन कर सकेंगे लेकिन अधिक खर्चे की वजह से उनकी यह इच्छा उनकी साथ ही मर जाती है ! सवाल उठता है मुसलमानों का विदेशी खर्चा उठाने वाली भारत सरकार इस देश के आम आदमी को कब समझेगी ! इस देश के देशभक्त हिन्दुओ का सम्मान कब करना सीखेगी ! वोट बैंक के लालच में कब तक हिन्दुओ की आत्मा पर प्रहार  करती रहेगी ! अपनी घाढ़ी खून - पसीने की कमाई से टेक्स  देने वाले और देश  को विकास की दिशा देने वाले समाज की अनदेखी कब तक करती रहेगी !जब देश के अल्पसंख्यक समाज को तीर्थ यात्रा के लिए सब्सिडी दी जा सकती है तो देश के बहुसंख्यक समाज के गरीबो को क्यों नहीं ?

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

सचिन महान नही है !

आज मै सचिन समर्थको की नाराजगी झेलने आया हूँ ! हो सकता है आज मुझे कुछ ब्लोग्गर मित्र राष्ट्रद्रोही मानने लगे ! चुकी इस देश में सचिन को एक भगवान बना दिया गया है कुछ लोगो ने ! जिसकी वजह से ऐसे बहुत से लोग है जो सचिन के खिलाफ कुछ भी सुनना नही चाहते ! लेकिन मै सचिन को महान या भगवान नही मानता मै उन्हें भी एक आम आदमी या आम क्रिकेटर की तरह मानता हूँ ! कारण निम्नलिखित है !
१ सचिन भी और क्रिकेटरों की तरह नीलाम होते है !
२ सचिन भी पैसो के लिए खेलते है जैसे बाकी क्रिकेटर !
३ सचिन उस उम्र में भी खेलते है जब उनका पर्दर्शन अच्छा नही होता जब की अब उन्हें सन्यास लेकर नये खिलाडियों को मोका देना चाहिये !
४ सचिन ने कभी भी राज ठाकरे की हिंसाओ का विरोध नही किया बल्कि उनकी राज ठाकरे से दोस्ती है !
५ सचिन से बढ़िया खिलाड़ी हमारे देश में और भी हुए हुए है जैसे गांगुली ,कुंबले , कपिल लेकिन उन्होंने कभी खुद को भगवान कहलवाना पसंद नही किया !
मेरा मानना बिलकूल साफ़ है सचिन कोई भगवान नही है बल्कि वह एक साधारण इंसान है ! सचिन से बेहतर प्रदर्शन करने वाले इस देश में या फिर विदेश में बहुत से खिलाड़ी हुए है लेकिन उनके गुणगान में इस तरह का भोंडा प्रचार नही किया गया ! लेकिन हमारे मीडिया जगत और राजनातिक जगत के लोग उन्हें महिमा मंडित करते रहे है शायद उनकी कुछ मजबूरिया होंगी ! लेकिन इस देश के आम आदमी को सचिन भगवान लगने लगे है तब भी हमारे देश के मीडिया और राजनातिक मजबूरियों का ही दोष है ! काश इस देश के युवाओं के आइकोन भगत सिंह , सुब्रहमन्यम स्वामी , महराना प्रताप , विवेकानन्द , होते तब इस देश की तस्वीर कुछ और ही होती ! लेकिन अफ़सोस सचिन , शारुख ,आमिर ,सलमान ही इस देश के युवाओं के आदर्श बना दिए गये है जिसका खामियाजा देश भुगत रहा है !

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

बाबा रामदेव जी टीम अन्ना से सावधान

मित्रो , पिछले कुछ दिनों से अनुमान लगाया जा रहा है की अन्ना हजारे अब बाबा रामदेव के साथ मिलकर काम करेंगे ! इसी कड़ी में अन्ना बार – बार बाबा रामदेव के साथ मुलाकात कर रहे है ! शायद यह अन्ना की खिसकती लोकप्रियता है जिसका अंदाजा अन्ना और उनकी टीम को मुंबई में हुए अनशन की भीड़ को देखने पर हुआ ! जिसमे जनता ने लगभग उनका साथ छोड़ दिया था ! इसी घटती लोकप्रियता को वापस पाने के लिए आज वही अन्ना बाबा रामदेव का साथ पाने की जी तोड़ कोशिशो में लगे है जो कभी बाबा के आने पर उनको मंच से निचे बैठने की बाते किया करते थे ! लेकिन बाबा रामदेव जी को अन्ना टीम की इस तरह की करतूतों से सबक लेने की जरूरत है ! चुकी यह वही अन्ना है जिन्होंने देश का ध्यान काले धन के मुद्दे से हटाकर जन्लोक्पाल पर ला दिया था जब की बाबा रामदेव की मेहनत से ही देश में काले धन और भ्रष्टाचार के प्रति देश में जागरूकता पैदा हुई थी ! लेकिन फिर भी देश को मुद्दे से भटकाने के बावूजद भी टीम अन्ना जन्लोक्पाल पास नही करवा सकी ! वही अन्ना की टीम में सेकूलर छवि के चलते अब भी कुछ ऐसे लोग है जिनका राष्ट्रवाद से दूर – दूर का नाता नही है ! उन्ही में से एक नाम है प्रशांत भूषण का जो अफजल गुरु का केस लड़ रहे है यह वही प्रशांत भूषण है जो एक बार काश्मीर पर बयानबाजी कर तेजिन्द्र सिंह बग्घा से पिटाई करवा चुके है ! लेकिन अफ़सोस की वे महात्मा अन्ना हजारे जी की टीम में अब भी बने है ! वही अपनी फिसलती जुबान से सुर्खिया पाने वाले केजरीवाल भी कभी इस्लामिक टोपी पहनकर मुसलमानों को रिझाने की कोशिश करते है लेकिन उन्हें रिझा नही पाते है बल्कि ऐसे -ऐसे कट्टरपन्थियो को मंच तक पहुचाते है जो की राष्ट्र से प्रेम तक नही करते राष्ट्रभक्ति की बात तो बहुत दूर की है ! ऐसे में सवाल यह उठता है की क्या ऐसी टीम भर्ष्टाचार से लड़ने में बाबा रामदेव का राष्ट्रहित के लिए साथ दे पाएगी ! ऐसे में बाबा रामदेव को अन्ना और उनकी टीम से न सिर्फ सावधान रहने की जरुरत है बल्कि राष्ट्रहित के लिए टीम अन्ना से दूरी बनाने की भी जरूरत है !

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

आतंकी से बेहतर है बाबा बन जाना !

पिछले कुछ दिनों से मिडिया और इन्टरनेट पर बवाल है इस बात को लेकर की नर्मल बाबा भक्तो से २००० रुपया लेते है ! जिसका जैसे गुस्सा निकलता है वह निकल रहा है ब्लोग्गर बंधू लेख से मीडिया खबरों की सनसनी से तो आम जनता सडको पर और साधू – संत न्यूज़ चनलो के स्टूडियो पर ! लेकिन सवाल यह उठ्त्ता है की निर्मलजीत सिंह नरूला निर्मल बाबा बन कैसे गये !
कई बार सुनने में आता है की मुसलमानों में शिक्षा की कमी और गरीबी उन्हें आतंकवादी बनने पर मजबूर करती है ! गरीबी और निर्मल बाबा का भी नाता रहा है आज तक को दिए इंटरव्यू में वह बार – बार यही बतलाने की कोशिश कर रहे थे की उन्होंने बहुत ही कष्टपूर्ण दिनों को देखा है ! झारखंड में एक परिवार ने उन्हें भगोड़ा करार दिया है। निर्मल बाबा ने उस परिवार के मकान में रहते हुए मकान मालिक को किराया भी नहीं दिया और ताला लगाकर भाग गए। वही निर्मल बाबा ने एक ईट का भट्ठा भी लगाया लेकिन उसमे सफल नही हुए ! गढ़वा में कपड़ा का बिजनेस किया. पर इसमें भी नाकाम रहे ! बहरागोड़ा इलाके में माइनिंग का ठेका भी लिया ! निर्मल बाबा का झारखंड से पुराना रिश्ता रहा है. खास कर पलामू प्रमंडल से. 1981-82 में वह मेदिनीनगर (तब डालटनगंज) में रह कर व्यवसाय करते थे. चैनपुर थाना क्षेत्र के कंकारी में उनका ईंट-भट्ठा भी हुआ करता था, जो निर्मल ईंट के नाम से चलता था ! यदि निर्मल बाबा की पूरी जिन्दगी को देखा जाये तो उनमे एक असफल व्यापारी की छवि नजर आती है और यही कष्टों भरे दिन जब आज तक पर बाबा को याद आये तब भी बाबा से भावुक हुए बिना नही रहा गया ! इन्ही असफलताओं ने जालन्धर से झारखण्ड से दिल्ली के सफर तक निर्मल सिंह नरूला का साथ चोली दामन का बना रहा ! ऐसे नाजुक हालत और असफलताओं का परिणाम है की एक असफल व्यापारी निर्मलजीत सिंह नरूला निर्मल बाबा बन गया जो आज ! करोडो के वारे न्यारे कर रहा है !
कुछ लोग बाबा को ठग कहने को आजाद है तो कुछ अन्धविशवासी तो कुछ भारतीय परम्पराओं को ठेस पहुचने का दोषी ! लेकिन फिर भी गरीबी के कारण आतंकी या माओवादी होने से कही बेहतर है ठग बाबा का जीवन वय्तित किया जाये ! चुकी इसमें दुसरे के जीवन को बेहतर बनाने के लिए खीर से लेकर गोल – गप्पे खाने की बाते की जाती है न की गोली – बारूद से किसी को कत्लेआम करने की !

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

निर्मल की आड़ में निशाने पर हिंदुत्व


यह ठीक है की बाबा पैसे लेते है हमे बेवकूफ बनाते है ! यह भी ठीक है की निर्मल सिंह नरूला ने बाबा शब्द की ही गरिमा को तार -तार कर रख दिया है ! यह भी ठीक है की निर्मल बाबा के समोसे ,पकोड़ो ,गोल गप्पो से असहमत हुआ जा सकता है ! हरी चटनी से किसी के दुःख दूर न हो ! यह भी ठीक है की निर्मल सिंह नरूला एक व्यापारी हो सकते है ! लेकिन एक निर्मल में पूरा हिन्दुत्त्व नही है या फिर निर्मल ही हिन्दुत्त्व का असली चहरा नही है जिसकी वजह से सपूर्ण हिन्दू धर्म के बाबाओं , मंत्रो या फिर योग को गरियाया जाए ! लेकिन मीडिया जिस तरह पूरे खेल को खेल रहा है उसमे वह न सिर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ बोल रहा है बल्कि पूरे हिंदुत्व को बदनाम करने की साजिश रच रहा है ! जिन चमत्कारों या शक्तियों को भारत का जनमानस मानता आया है और महसूस करता आया है कही न कही सीधा निशाना उस पूरी सनातम परम्परा किया जा रहा है ! जो किसी भी तरह से सही नही माना जा सकता ! अभिसार शर्मा द्वारा सबसे तेज और सबसे पहले लिए गये निर्मल बाबा के इंटरव्यू में अभिसार ने कहा लाखो लोग मंदिर जाते है उनकी मन्नते तो पूरी नही होती ! एक पत्रकार का किसी धर्म विशेष के खिलाफ साजिश लगता है ! वही हिन्दुत्त्व विरोधी लोगो को स्टूडियो में बैठाकर निर्मल पर बहस को एक साज़िश के तहत पूरे सनातम परम्परा और कर्मकाण्डो को झुठलाना भी निर्मल की आड़ में पूरी सनातम परम्परा को बदनाम करने की साज़िश है ! जिस तरह से हर मुसलमान और हर इसाई मस्जिद या चर्च में जाते है वैसे ही हिन्दुओ की मंदिरों में आस्था है ! जिस तरह से किसी एक मोलवी या पादरी की गलत हरकत से इस्लाम या फिर ईसाइयत को बदनाम नही किया जा सकता ठीक उसी प्रकार एक निर्मल की वजह से पूरे हिन्दुत्त्व को बदनाम नही किया जा सकता ! लेकिन जैसे ही इंटरनेट पर निर्मल की कारगुजारियो का कच्छा चिटठा खोला गया हिन्दू विरोधी मानसिकता के लोगो ने हिन्दुत्त्व पर ही निशाना साध लिया ! जिसे किसी भी प्रकार जायज नही ठराया जा सकता ! जिस तरह से इंटरनेट पर खुद हिन्दू समुदाय के लोगो ने निर्मल बाबा का विरोध किया उसी तरह हिन्दू विरोधी मीडिया का भी विरोध होना चाहिए !